बड़े पर्दे पर फौजियों का जलवा है भाईसाहब. 2026 अभी दो महीने पुराना भी नहीं हुआ है कि हम 'इक्कीस' और 'बॉर्डर 2' में जांबाज फौजियों की कहानी देख चुके हैं. तीसरे महीने, मार्च के लिए अनिल कपूर ने अभी से बुकिंग करवा ली है. उनकी नई फिल्म 'सूबेदार' का ट्रेलर हाल ही में रिलीज हुआ.
5 मार्च को अमेजन प्राइम पर आ रही इस फिल्म में अनिल पूर्व फौजी के रोल में हैं. शरीर पर वर्दी तो नहीं है, लेकिन वर्दी पहनी हो या नहीं, फौजी तो फौजी ही होता है. और ये भी जरूरी नहीं कि वो सरहद पर ही लड़े, लड़ाइयां तो और भी बहुत हैं. तो 'सूबेदार' साहब लोकल गुंडे-माफिया से भिड़ने जा रहे हैं. एकदम मास फिल्मी अंदाज में, धुआंधार एक्शन के साथ. मगर अनिल कपूर का ये अंदाज देखकर एक और ट्रेंड पर ध्यान जाता है- वर्दी उतार चुके हीरो की सोशल लड़ाई.
एक्स वर्दीधारियों की लड़ाई क्यों है दमदार सिंबल
एक्टर चाहे कोई भी हो, फौजी और उसकी वर्दी का अपना एक अलग कैरेक्टर होता है. देश के प्रति कमिटमेंट, लड़ते रहने की स्पिरिट, आत्मसम्मान और गर्व जैसी वैल्यूज का प्रतीक होती है वर्दी. इसलिए जब एक हीरो के साथ वर्दी जुड़ जाती है, तो उसके किरदार में विश्वास पैदा करना आसान हो जाता है.
सिनेमा में ये प्रतीक सिर्फ फौजी ही नहीं, पुलिस ऑफिसर के किरदारों में भी काम आता है. इसलिए कहानी में किसी भी अन्याय या बुराई के प्रति अगर बाकी जनता साइलेंट भी है, तब भी एक पूर्व वर्दीधारी से लड़ने की उम्मीद की जाती है. ऐसे किरदार बाकी समाज के लिए लड़ाई की स्पिरिट का प्रतीक बनते हैं और ये आम लोगों को बुराई के खिलाफ डटकर लड़ने का मैसेज देते हैं. भले ही वो लड़ाई सरकारी सिस्टम से क्यों न हो.
वर्दी उतारने के बाद भी बुराई से लड़ने के लिए तैयार हीरो का सबसे बड़ा उदाहरण 'शोले' (1975) का ठाकुर है. संजीव कुमार का ये आइकॉनिक किरदार पुलिस से कब का रिटायर हो चुका था. लेकिन उसने आततायी गब्बर के खिलाफ लड़ना चुना. खुद हथियार नहीं चला सकता था, तो जय-वीरू के जरिए लड़ा. लेकिन उसने गिव-अप करने की बजाय लड़ना चुना.
शाहरुख से अनिल तक, एक्स-वर्दीधारियों का भौकाल
सोशल जस्टिस के लिए लड़ने वाले एक्स वर्दीधारी किरदार पर्दे पर पहले भी नजर आए हैं, लेकिन इतनी जल्दी-जल्दी नहीं. लॉकडाउन के बाद से तो ऐसे किरदारों ने बड़े पर्दे पर लगातार अटेंडेंस लगाई है.
लॉकडाउन के बाद से देखें तो सामाजिक बुराई से लड़ने वाला पहला एक्स-वर्दीधारी किरदार फिल्म 'विक्रम' (2022) में नजर आया. कमल हासन ने कमांडर अरुण कुमार विक्रम का रोल किया, जो रिटायरमेंट के कई साल बाद ड्रग्स के खिलाफ लड़ने के लिए खड़ा होता है. उसकी लड़ाई का टारगेट सरकार भी है, जिसके नेता और अधिकारी भी हैं.
'जवान' में शाहरुख का यंग किरदार किसानों, जवानों और मेडिकल सिस्टम को तोड़ देने वाले भ्रष्टाचार से लड़ता दिखा. लेकिन अपनी लड़ाई के लिए वो अपने ही पूर्व सैनिक पिता की इमेज इस्तेमाल करता है. ओल्ड शाहरुख की जब कहानी में एंट्री होती है तो इस लड़ाई को और वजन मिल जाता है. 'जेलर' (2023) में एक्स पुलिस ऑफिसर रजनीकांत और 'जाट' में सनी देओल पूरे क्रिमिनल एम्पायर से भिड़ गए थे. सनी का किरदार रिटायर्ड फौजी नहीं था, अभी सेवा में ही था. मगर इस किरदार को यूज इस तरह किया गया था कि जैसे ये सोल्जर ऑफ-ड्यूटी है.
'सूबेदार' का ट्रेलर दिखाता है कि जहां गैंगस्टर बबली दीदी (मोना सिंह) और उसके भाई के दबदबे को कोई चैलेंज नहीं कर रहा, वहीं सूबेदार अर्जुन मौर्या सीन चौड़ा किए इनसे टकराने के लिए तैयार है. कहानी में किसी आम किरदार को भी इस लड़ाई के लिए सिर उठाते दिखाया जा सकता था. लेकिन तब दो दिक्कतें होतीं- साधारण बैकग्राउंड वाले हीरो का ऐसी खतरनाक गैंग से भिड़ जाना विश्वसनीय नहीं लगता. लड़ाई के पीछे हीरो की मोटिवेशन कमजोर नजर आती.
सोशल मैसेज या स्टार्स की सर्वाइवल ट्रिक?
बड़े पर्दे पर एक्स वर्दीधारियों की सोशल लड़ाई के ट्रेंड में एक और लेयर है. ज्यादातर स्टार्स ने ऐसे किरदार तब निभाए, जब स्टारडम के सफर में उनके पांव कुछ लड़खड़ाते दिखे. शाहरुख 'पठान' में भी एक एक्स सोल्जर थे, जो देश के लिए सीक्रेट मिशन्स करने वाला एजेंट बन गया. 'जवान' और 'डंकी' में भी उनके किरदार एक्स सोल्जर थे. 2023 में आईं इन तीन फिल्मों ने, एक लंबे ब्रेक के बाद शाहरुख का धमाकेदार कमबैक करवाया था.
'विक्रम' कमल हासन की कमबैक फिल्म थी. रजनीकांत 2018 के बाद से अपने कद को मैच करने वाली हिट नहीं दे पा रहे थे और बड़े पर्दे से दो साल ब्रेक के बाद उन्होंने 'जेलर' से कमबैक किया था. सनी की 'जाट' उनकी कमबैक जर्नी का हिस्सा थी. 'सूबेदार' में एक्स फौजी के रोल से अनिल कपूर भी 4 साल बाद लीड रोल में लौट रहे हैं. दिलचस्प ये भी है कि अनिल बीते दो सालों में 'फाइटर' और 'वॉर 2' में भी यूनिफॉर्म पहन चुके हैं.
स्क्रीन पर सीनियर या रिटायर्ड सोल्जर/ कॉप के रोल में स्टार्स का आना, पिछली जेनरेशन में अब भी लड़ाई की स्पिरिट बाकी होने का भी मैसेज देती है. लेकिन ये लड़ाई है क्या— फिल्मों के जरिए बुराइयों के खिलाफ लड़ाई? या बढ़ती उम्र में अपने स्टार स्टेटस को बचाए रखने की लड़ाई?
लड़ाई चाहे जो भी हो, मगर स्क्रीन पर इन किरदारों में जनता ने शाहरुख, कमल, रजनी, सनी को खूब सराहा. इनकी ये सारी फिल्में भी बड़ी बॉक्स ऑफिस हिट साबित हुईं और इनके ये किरदार पॉप कल्चर में आइकॉनिक बन गए. अनिल कपूर की 'सूबेदार' आ तो ओटीटी पर रही है. लेकिन अगर फिल्म जनता के दिमाग पर छपने में कामयाब रही तो उनका ये किरदार भी आइकॉनिक हो जाएगा.
सुबोध मिश्रा