फराह खान आज बॉलीवुड की सबसे सफल कोरियोग्राफर और फिल्ममेकर में से एक मानी जाती हैं. लेकिन उनका बचपन बेहद संघर्ष भरा था. उनके पिता एक फिल्म की वजह से सब कुछ हार बैठे थे. फिल्म बॉक्स ऑफिस पर बुरी तरह फ्लॉप हो गई थी. हाल ही में फराह खान, एक्ट्रेस तनिषा मुखर्जी के घर गईं. इस दौरान फराह खान ने याद किया कि कैसे एक्टर देब मुखर्जी अनजाने में उनकी जिंदगी के सबसे मुश्किल दौर से जुड़ गए थे.
देब मुखर्जी, बॉलीवुड के जाने माने एक्टर और फिल्ममेकर हुआ करते थे. वो 'ब्रह्मास्त्र' डायरेक्टर अयान मुखर्जी के पिता थे. तनिषा और अयान असल जिंदगी में कजिन हैं. तनिषा के घर पर हुई बातचीत में फराह ने मजाकिया अंदाज में कहा, 'क्योंकि देबू, अयान के पिता हैं, इसलिए मैं हमेशा अयान मुखर्जी से कहती हूं कि तुम्हारे पापा की वजह से हम गरीब हो गए.' यह सुनकर तनिषा हैरान रह गईं और बोलीं, 'क्या?'
फराह ने फिर उन्हें समझाया, 'मेरे पापा ने अपनी पहली बड़ी कलर फिल्म 'ऐसा भी होता है' बनाई थी, जिसमें देब मुखर्जी हीरो थे. फिल्म शुक्रवार को रिलीज हुई और सोमवार तक हम गरीब हो चुके थे. उस जमाने में प्रोड्यूसर अपनी सारी पूंजी फिल्म में लगा देते थे.' तनिषा मुखर्जी ने भी माना कि उस समय फिल्मी परिवारों में आर्थिक अस्थिरता आम बात थी. उन्होंने कहा, 'हमारे घर में भी ऐसे दौर आए हैं. जब पापा की फिल्में नहीं चलती थीं, तो हम दो-तीन साल के लिए गरीब हो जाते थे, जब तक वे दूसरी फिल्म नहीं बना लेते.'
‘पापा के पास मरते वक्त सिर्फ 30 रुपये थे’
इससे पहले रणवीर इलाहाबादिया के इंटरव्यू में फराह खान ने फिल्म 'ऐसा भी होता है' की असफलता के बाद की तबाही के बारे में खुलकर बात की थी. उन्होंने बताया था, 'हम कंगाल हो गए थे. मैं नेपो किड नहीं हूं. मेरे पापा कंगाल होकर मरे. जब उनकी मौत हुई, तो उनके पास सिर्फ 30 रुपये थे.'
फराह खान ने याद किया कि फिल्म फ्लॉप होने के बाद उनका पूरा जीवन बदल गया था. उन्होंने कहा, 'सूरज ढलते ही हम कांपने लगते थे क्योंकि हमें पता होता था कि रात में कुछ भी हो सकता है, क्योंकि पापा शराब पी लेते थे. हम रईसों से गरीबों में आ गए थे. मेरे पापा बहुत अच्छा कर रहे थे, लेकिन उन्होंने महत्वाकांक्षा दिखाई और बड़े स्टार के साथ कलर फिल्म बनानी चाही. उन्होंने घर और सब कुछ गिरवी रख दिया. फिल्म शुक्रवार को रिलीज हुई और सोमवार तक हम गरीब हो चुके थे.'
फराह ने परिवार पर पड़े इमोशनल असर के बारे में भी बताया. उन्होंने कहा था, 'हम कई सालों तक घर पर किसी को बुला नहीं सकते थे. मेरी मां चली गई थीं, और हम ये भी नहीं बता सकते थे कि मेरे माता-पिता अलग हो गए हैं, क्योंकि वो अलग जमाना था.'
‘अब सब मजेदार कहानी बन गई है’
सिमी गरेवाल के साथ एक और इंटरव्यू में फराह खान ने अपने बचपन के ट्रॉमा को आश्चर्यजनक रूप से गर्मजोशी के साथ याद किया था. उन्होंने कहा था, 'मैं अपने बचपन, ट्रॉमा और माता-पिता के अलग होने को लेकर एक ट्रेजेडी बना सकती थी. लेकिन कड़वा बनने की बजाय मैं खुशहाल पलों को याद करना चुनती हूं.'
उन्होंने बताया कि अब वे और उनके भाई साजिद खान, उन पलों पर हंसते हैं जो कभी उन्हें डराते थे. फराह ने कहा था, 'कभी-कभी पापा बहुत गुस्सा हो जाते थे, अपनी पिस्तौल निकाल लेते थे और सब भागने लगते थे. अब वो सब मजेदार कहानी बन गई है, जिसे याद करना ज्यादा अच्छा लगता है.'
आजतक एंटरटेनमेंट डेस्क