धुरंधर 2 प्रोपेगैंडा है या नहीं? इसमें क्या प्रोपेगैंडा है, क्या नहीं? और इसे चला क्या रहा है― पॉलिटिक्स या एंटरटेनमेंट का तगड़ा डोज? जबसे आदित्य धर की फिल्म थिएटर्स में पहुंची है, तबसे इन सारे सवालों पर रोजाना बहस छिड़ी रहती है. अब इन सब सवालों के बीच कुछ ऐसा हुआ है, जो तमाम आलोचकों-फिल्म एक्सपर्ट्स-समाजशास्त्रियों के एनालिसिस से दूर, अपनी फिल्म एन्जॉय करने निकले दर्शकों का मूड बता रहा है.
धुरंधर 2 पर जिस राजनीतिक झुकाव का आरोप लगाया जा रहा है, उस विचारधारा को सबसे कम हवा देने वाले राज्यों में केरल को गिना जाता है. राइट विंग पॉलिटिक्स की तरफ झुकाव वाली द केरला स्टोरी 2 का केरल में ऐसा विरोध हुआ था कि इसे दर्शक ही नहीं मिले. थिएटर्स को फिल्म के शोज कैंसिल करने पड़े. पर उसी केरल में धुरंधर 2 को ऐसे दर्शक मिले हैं कि वहां ये बॉलीवुड की सबसे बड़ी फिल्म बन गई है.
धुरंधर 2 का केरल में धमाल
शुक्रवार को धुरंधर 2 ने इंडिया में 50 करोड़ से ज्यादा ग्रॉस कलेक्शन किया. 9 दिन में फिल्म का टोटल इंडिया ग्रॉस कलेक्शन 800 करोड़ से ज्यादा पहुंच गया. बॉक्स ऑफिस ट्रैकर जेरिन जॉर्जकुट्टी के आंकड़े बताते हैं कि धुरंधर 2 ने सिर्फ केरल में 61 लाख रुपये का ग्रॉस कलेक्शन किया. इसके साथ वहां धुरंधर 2 का टोटल ग्रॉस कलेक्शन 9 दिन में 13.50 करोड़ पहुंच गया.
इसके साथ ही धुरंधर 2 केरल में सबसे कमाऊ बॉलीवुड फिल्म भी बन गई. इससे पहले शाहरुख खान की जवान, 13.40 करोड़ ग्रॉस कलेक्शन के साथ केरल में सबसे बड़ी बॉलीवुड फिल्म थी. लेकिन जवान के टोटल ग्रॉस कलेक्शन को केरल में धुरंधर 2 ने मात्र 9 दिनों में पीछे छोड़ दिया है.
इसी से पता चलता है कि बाकी बॉलीवुड फिल्मों के मुकाबले धुरंधर 2 को केरल में बहुत तगड़ा रिस्पॉन्स मिल रहा है. जबकि इस फिल्म पर लगातार ये आरोप लगते आ रहे हैं कि ये प्रधानमंत्री मोदी और नोटबंदी के फैसले को ग्लोरिफाई करने वाला प्रोपेगैंडा है. लेकिन केरल की जनता का खुली बाहों से धुरंधर 2 का स्वागत करना कुछ और ही कहता है.
धुरंधर 2 की केरल में सक्सेस का मतलब
ये सच है कि धुरंधर 2 में एक राजनीतिक झुकाव तो है. मगर इसे फिल्ममेकर की निजी चॉइस न मानकर, सरकारी प्रोपेगैंडा कह देना भी एक अलग एक्सट्रीम है. जबकि बुद्धिजीवी वर्ग में गिने जाने वाली केरल की जनता भी फिल्म की एंटरटेनमेंट वैल्यू को, आदित्य धर की कहानी को पॉलिटिक्स से अलग रखकर देख रही है. ठीक वैसे ही जैसे देश भर की जनता धुरंधर 2 को एन्जॉय कर रही है. वरना अपनी सतह पर ही घोर पॉलिटिकल झुकाव वाली द केरला स्टोरी 2 का केरल में बहुत विरोध हुआ था.
लड़कियों के धर्मांतरण का मुद्दा उठाने वाली इस फिल्म के ट्रेलर से ही नजर आ रहा था कि ये एक खास पॉलिटिकल नैरेटिव को सपोर्ट करने वाली है. लेकिन इसे अपने प्रीक्वल द केरला स्टोरी (2024) के मुकाबले बाहुत कमजोर रिस्पॉन्स इसलिए मिला क्योंकि ये दर्शकों को एंगेज नहीं कर पा रही थी.
केरल हाई कोर्ट में द केरला स्टोरी 2 की रिलीज रोकने को याचिका भी डाली गई थी. हालांकि विवादों के बीच कोर्ट ने इस फिल्म को रिलीज के लिए क्लियर कर दिया था. लेकिन जनता का मन इतना खट्टा हो चुका था कि रिलीज के अगले ही दिन केरल के त्रिशूर, कोझिकोड और कोच्चि जैसे शहरों में द केरला स्टोरी 2 को दर्शक मिलने बंद हो गए थे. कई थिएटर्स को पहले वीकेंड में ही इसके शोज कैंसिल करने पड़े थे.
ऐसे में धुरंधर 2 को केरल में मिल रहा रिस्पॉन्स उन लोगों के लिए भी एक जवाब है जिन्हें फिल्म के पॉलिटिकल होने में प्रोपेगैंडा नजर आ रहा है. क्योंकि लेफ्ट-लिबरल विचारधारा के आगे, राइट-विंग पॉलिटिक्स से प्रभावित न होने वाली केरल की जनता धुरंधर 2 जमकर देख रही है. और ये अपने आप में इस बात का सबूत है कि फिल्म का एंटरटेनमेंट पक्ष, इसके पॉलिटिकल पक्ष से बहुत ज्यादा दमदार है.
सुबोध मिश्रा