दिग्गज सिंगर आशा भोसले को राजकीय सम्मान के साथ अंतिम विदाई दी गई. मुंबई के शिवाजी पार्क श्मशान घाट में फैंस का जनसैलाब उमड़ा, लेकिन इस भीड़ में एक सवाल बार-बार उठता रहा- क्या बॉलीवुड का मातम अब सिर्फ सोशल मीडिया पोस्ट तक सिमट कर रह गया है?
जहां एक ओर आम लोग अपनी फेवरेट सिंगर को आखिरी बार देखने के लिए दूर-दूर से पहुंचे, वहीं कई बड़े सितारे इस मौके पर नजर नहीं आए. इंडस्ट्री के कई नामचीन चेहरों ने सोशल मीडिया पर लंबी-लंबी श्रद्धांजलि पोस्ट जरूर लिखीं, लेकिन अंतिम संस्कार में उनकी गैरमौजूदगी ने लोगों को सोचने पर मजबूर कर दिया.
हालांकि, कुछ सेलेब्स ने अपनी मौजूदगी दर्ज कराई और नम आंखों से आशा ताई को अंतिम विदाई दी. लेकिन कई बड़े नामों की गैरहाजिरी चर्चा का विषय बन गई. सोशल मीडिया पर भी यही सवाल उठने लगा- क्या अब दुख जताने का तरीका बदल गया है? क्या एक पोस्ट या ट्वीट ही किसी महान कलाकार को श्रद्धांजलि देने के लिए काफी है?
कहां गायब रहे वो फेमस लोग?
आशा ताई की अंतिम विदाई और अंतिम संस्कार से वो सभी महान हस्तियां गायब रहीं जो उनके जीते-जी पैरों में गिर जाया करते थे. सम्मान से सिर झुकाते थे. इनमें दिग्गज सिंगर सोनू निगम का भी नाम आता है, जिन्होंने भरे मंच पर आशा ताई के पैर धोए थे और प्यार ने इन्हें चूमते दिखे थे. शाहरुख खान- जिनकी मैच के दौरान आशा जी का जूठा कप उठाकर खुद रखने की वीडियो खूब वायरल हुई थी. उनके सम्मान देने के किस्से कहे जाते हैं.
अमिताभ बच्चन, जिन्होंने अपने ब्लॉग में आशा के निधन का जिक्र किया और बताया कि उन्हें कितना गहरा सदमा पहुंचा है. लेकिन ये सभी लोग आशा ताई के अंतिम संस्कार से नदारद रहे.
ऐसे में वेटरन एक्ट्रेस रेखा का नाम कैसे भूला जा सकता है, जिनको आशा ने बेहतरीन गाने दिए. उमराव जान के गाने अगर आज भी याद किए जाते हैं तो वो सिर्फ आशा भोसले की आवाज की बदौलत. उनकी मधुर वाणी ने उन्हें जीवंत किया. लेकिन सोनू निगम, शाहरुख खान की तरह रेखा भी यहां से गायब दिखीं.
ग्लैमर इंडस्ट्री का कड़वा सच
मेरी नजर में ये तस्वीर थोड़ी कड़वी जरूर है, लेकिन सवाल उठाना भी जरूरी है. आशा भोसले की आवाज ने जिस दौर में पर्दे पर जादू बिखेरा, उस जादू से कई एक्ट्रेसेज की पहचान बनी- हेलेन के डांस नंबर हों, रेखा की अदाएं, जीनत अमान का ग्लैमर, करिश्मा कपूर-करीना कपूर का स्टाइल या उर्मिला मातोंडकर का ग्लैम स्क्रीन प्रेजेंस या माधुरी दीक्षित की परफॉर्मेंस- इन सबमें कहीं न कहीं आशा ताई की आवाज की चमक शामिल थी.
लेकिन उनकी अंतिम विदाई के वक्त हेलेन को छोड़कर इन सभी बड़े नामों का नजर न आना एक खालीपन छोड़ गया. हो सकता है इसके पीछे निजी कारण रहे हों, दूरियां हों या हालात, लेकिन एक फैन के तौर पर ये सवाल जरूर उठता है कि जिन आवाजों ने स्टारडम को ऊंचाई दी, क्या उनके आखिरी सफर में मौजूद होना एक भावनात्मक कर्ज नहीं था? वो भी तब जब किसी बड़े बिजनेसमैन का फंक्शन हो तो सभी अपनी मौजूदगी परिवार समेत दर्ज कराते हैं.
ऐसे में ये सिर्फ गैरमौजूदगी का मुद्दा नहीं, बल्कि उस रिश्ते का आईना है जो इंडस्ट्री और कलाकारों के बीच बनता है. और कभी-कभी वक्त के साथ फीका भी पड़ जाता है.
संगीत जगत तक सीमित रह गईं आशा
सुरों की मल्लिका आशा भोसले ने संगीत जगत को बहुत बड़ा योगदान दिया. उनका काम लेकिन सिर्फ गानों तक नहीं था. इतना लंबा, कामयाब सफर तो ऐसा है जैसे आशा का खुद सिनेमा जगत शुक्रगुजार हो. इसलिए जो लोग उनके अंतिम संस्कार में नजर आए वो बस गीतकार थे या संगीतकार. ये देखकर फैन्स को खुशी भी हुई कि आशा के सुरों को आखिरी सलाम कहने संगीत जगत आया. मगर ए लिस्टर्स गायब रहे.
इस बीच, परिवार गहरे शोक में डूबा दिखा. बेटे आनंद भोसले मेहमानों को संभालते नजर आए, जबकि पोती जनाई का रो-रोकर बुरा हाल था. उनका पूरा साथ हेलेन ने दिया. वो शुरू से लेकर अंतिम संस्कार होने तक परिवार के साथ रहीं. एक तरफ फैंस का सैलाब और दूसरी तरफ सितारों की दूरी- ये नजारा कई सवाल छोड़ गया. क्या आज के दौर में श्रद्धांजलि का मतलब बदल गया है, या फिर व्यस्तता और निजी कारणों ने इस दूरी को जन्म दिया?
आशा भोसले की आवाज और उनकी विरासत हमेशा जिंदा रहेगी, लेकिन उनकी अंतिम विदाई ने इंडस्ट्री के बदलते चेहरे पर एक नई बहस जरूर छेड़ दी है.
आरती गुप्ता