काशी का रण: मोदी के 'घर' की 5 सीटों की दिलचस्प कहानी

PM मोदी पिछले तीन दिन से बनारस में जमे हुए हैं. लगभग एक दर्जन केंद्रीय मंत्री भी पीएम के साथ काशी में डेरा डाले हुए हैं. बीजेपी के नेताओं के मुताबिक पार्टी यूपी चुनाव जीत रही है लेकिन काशी के पांच विधानसभा सीट अलग ही कहानी बयां कर रहे हैं.

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सांकेतिक फोटो सांकेतिक फोटो

विकास कुमार

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  • 06 मार्च 2017,
  • अपडेटेड 1:28 PM IST

PM मोदी पिछले तीन दिन से बनारस में जमे हुए हैं. लगभग एक दर्जन केंद्रीय मंत्री भी पीएम के साथ काशी में डेरा डाले हुए हैं. बीजेपी के नेताओं के मुताबिक पार्टी यूपी चुनाव जीत रही है लेकिन काशी के पांच विधानसभा सीट अलग ही कहानी बयां कर रहे हैं.

काशी में कुल आठ विधानसभा क्षेत्र हैं. सेवापुरी, शिवपुरी, अजगरा, पिंडरा, शहर उत्तरी, शहर दक्षिणी, बनारस कैंट और रोहनियां. पिछले की तीन सीटों वाराणसी कैंट, वाराणसी उत्तरी और वाराणसी दक्षिणी सीटों पर भाजपा का कब्जा रहा था.

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फिलहाल बनारस में भाजपा को इन अपनी तीनों सीटें बचाने के लिए एड़ी चोटी का संघर्ष करना पड रहा है जबकि सेवापुरी विधानसभा में भी कांटे की टक्कर बताई जा रही है.

वाराणसी दक्षिणी सीट
मोदी के संसदीय क्षेत्र में यदि कोई सीट सबसे अधिक चर्चा में है तो वह वाराणसी दक्षिणी सीट है. इसकी वजह यहां से भाजपा के दिग्गज व वर्तमान विधायक विधायक और लगातार सात बार चुनाव जीत चुके श्यामदेव राय चौधरी का टिकट कटना है.इस सीट को ब्राह्मण बहुल सीट मानी जाती है. यहां से भाजपा ने वर्तमान विधायक श्यामदेव राय चौधरी का टिकट काटकर नीलकंठ तिवारी को मैदान में उतारा है.

इसी सीट से सपा व कांग्रेस गठबंधन की तरफ से राजेश मिश्रा को टिकट मिला है. राजेश हालांकि भी चुने जा चुके हैं. बावजूद इसके उन्हें भी मतदाताओं के बीच कड़ी मेहनत करनी पड़ रही है. बसपा ने यहां से राकेश त्रिपाठी को मैदान में उतारा है. वह अपने विरोधियों को कडी टक्कर दे रहे हैं.

वाराणसी उत्तरी सीट
वाराणसी उत्तरी सीट पर भी भाजपा विरोधियों और अपनों के बीच फंसी है. यहां से भाजपा ने वर्तमान विधायक रवींद्र जायसवाल को टिकट दिया है. सपा व कांग्रेस गठबंधन की तरह से अब्दुल समद अंसारी चुनाव मैदान में हैं. बसपा ने सुजीत कुमार मौर्य को इस सीट से टिकट दिया है.

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शहर उत्तरी से भाजपा के बागी उम्मीदवार सुजीत सिंह टीका मैदान में भाजपा का खेल बिगाड़ने में लगे हुए हैं. पार्टी ने हालांकि उन्हें पार्टी से निकाल दिया है और वह निर्दलीय प्रत्याशी के तौर पर चुनाव मैदान में हैं. अब्दुल समद अंसारी के एकलौते मुस्लिम होने की वजह से मुस्लिम मतदाताओं का रुझान उनकी तरफ माना जा रहा है.

वाराणसी कैंट सीट
वाराणसी कैंट सीट पर भी कांटे की टक्कर देखने को मिल रही है. सपा और कांग्रेस गठबंधन ने इस बार हालांकि अनिल श्रीवास्तव को यहां से टिकट दिया है. अनिल पहले भी कांग्रेस से ही इस सीट से चुनाव लड़ चुके हैं. तब उन्हें लगभग 50 हजार मत मिले थे. इस बार वह गठबंधन के भरोसे भाजपा को धूल चटाने का दावा कर रहे हैं.

अनिल श्रीवास्तव ने कहा कि काशी ने देश को एक प्रधानमंत्री दिया लेकिन तीन वर्षो बाद भी यहां की स्थिति जस की तस है. विकास के नाम पर कुछ नहीं हुआ है. मुख्यमंत्री अखिलेश यादव ने यहां काफी काम कराये हैं और सबसे बड़ा काम तो बनारस को 24 घंटे बिजली मुहैया कराना है.

बसपा ने इस सीट से रिजवान अहमद को मैदान में उतारा है. कैंट में हालांकि मुस्लिम मतदाताओं की अच्छी खासी संख्या है, लेकिन यहां के जानकार बताते हैं कि भाजपा को हराने के लिये मुस्लिम मतदाताओं का झुकाव सपा-कांग्रेस गठबंधन की तरफ हो सकता है.

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सेवापुरी विधानसभा सीट
बनारस की सेवापुरी सीट पर भी विरोधियों ने भाजपा की तगड़ी घेरेबंदी की है. यूं तो इस सीट पर भाजपा के सहयोगी पार्टी अपना दल (अनुप्रिया पटेल) के उम्मीदवार नीलरतन पटेल हैं. जबकि इसी सीट से अनुप्रिया की मां कृष्णा पटेल ने अपने गुट की तरफ से विभूति नारायण सिंह को टिकट दिया है.

विभूती नारायण सिंह लंबे समय तक भाजपा के नेता रहे हैं और इलाके के मतदाताओं के बीच अच्छी खासी पैठ है. दूसरी ओर सपा और कांग्रेस गठबंधन की तरफ से मंत्री सुरेंद्र पटेल चुनाव मैदान में हैं. पिछली बार भी वह इस सीट से अच्छे अंतर से जीते थे.

रोहनिया विधानसभा सीट
बनारस के इस सीट पर पटेल मतदातों की अच्छी खासी संख्या है. यह वही सीट है जहां से अपना दल की अनुप्रिया पटले 2012 विधानसभा चुनाव में जीतीं और राजनीति में आईं. इस विधानसभा चुनाव में कृष्णा पटेल बीजेपी-अपना दल की संयुक्त उम्मीदवार हैं. सपा-कांग्रेस गठबंधन के उम्मीदवार महेंद्र पटेल हैं और बसपा की तरफ से प्रमोद सिंह मैदान में हैं.

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