Bilsi Assembly Seat: बीजेपी ने रोक दी थी BSP की हैट्रिक, आरके शर्मा कब्जा रख पाएंगे बरकरार?

बिल्सी विधानसभा सीट साल 1962 से सुरक्षित थी. साल 1996 में मायावती ने यहां से चुनाव लड़ा और बीजेपी के योगेंद्र कुमार सागर को हराया भी, लेकिन जीत का अंतर महज 2515 वोट का रहा था.

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यूपी Assembly Election 2022 बिल्सी विधानसभा सीट यूपी Assembly Election 2022 बिल्सी विधानसभा सीट

अंकुर चतुर्वेदी

  • बदायूं,
  • 28 नवंबर 2021,
  • अपडेटेड 4:16 PM IST
  • बिल्सी से विधायक हैं बीजेपी के आरके शर्मा
  • साल 1993 के बाद पहली बार जीती बीजेपी

उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ से 318 किलोमीटर और राष्ट्रीय राजधानी दिल्ली से 218 किलोमीटर दूर स्थित है बदायूं जिले की बिल्सी विधानसभा सीट. बदायूं जिला मुख्यालय से 27 किलोमीटर दूर स्थित बिल्सी सड़क मार्ग जुड़ा है. बिल्सी का नजदीकी रेलवे स्टेशन यहां से करीब 24 किलोमीटर दूर उझानी कस्बे में है. तीर्थ नगरी कछला भी इसी विधानसभा क्षेत्र का हिस्सा है, जहां पर भागीरथ महाराज का एकमात्र मंदिर है. पतित पावनी गंगा को पृथ्वी पर लाने के लिए राजा भगीरथ ने यहां गंगा के कछला घाट से कुछ ही दूरी पर बूढ़ी गंगा के किनारे एक प्राचीन टीले पर गुफा में तपस्या की थी.

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कपिल मुनि के आश्रम के बगल में स्थित इस गुफा को भगीरथ गुफा के नाम से जाना जाता है. करीब ही राजा भगीरथ का एक अति जीर्ण-शीर्ण मंदिर है जहां अब सिर्फ चरण पादुका बची है. इससे थोड़ी ही दूरी पर बरगद का विशालकाय वृक्ष और अन्य पेड़ों के झुरमुट के बीच मठिया है. इसी टीले पर है कपिल मुनि आश्रम और भगीरथ गुफा.

बिल्सी विधानसभा क्षेत्र में बिल्सी और उझानी कस्बे आते हैं और ये दोनों कस्बे बदायूं जिले की आर्थिक गतिविधियों का केंद्र हैं. बिल्सी विधानसभा क्षेत्र में व्यापार के बाद आमदनी का जरिया खेती-किसानी है. यहां मुख्य रूप से आलू और गन्ने का उत्पादन होता है. यहां गन्ने की अच्छी उपज होती है और 35 किलोमीटर की परिधि में 3 बड़ी चीनी मिल हैं. शेखुपुर चीनी मिल जो सरकारी मिल है. यदु शुगर मिल बिसौली में है और नगरिया शुगर मिल कासगंज जिले में है. आलू की अच्छी खेती के चलते यहां कई कोल्ड स्टोर भी हैं.

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राजनीतिक पृष्ठभूमि

साल 1951 में पहली विधानसभा में बिल्सी के वोटरों ने सहसवान ईस्ट नाम की विधानसभा के लिए वोट किया था, तब कांग्रेस के उम्मीदवार की विजय हुई थी. साल 1957 के चुनाव में इस विधानसभा सीट का नाम इस्लाम नगर हो गया और फिर से कांग्रेस के उम्मीदवार की जीत हुई. साल 1962 में इसे सुरक्षित सीट कर दिया गया और साथ ही नाम बदलकर कोट विधानसभा हो गया. 1962 के चुनाव में भी इस सीट से कांग्रेस जीत हुई.

साल 1967 में इस सीट का नाम बदलकर अम्बियापुर हो गया और ये सुरक्षित ही रही. 1967 के चुनाव में भारतीय जनसंघ के एस लाल ने कांग्रेस के केशोराम को हरा दिया लेकिन दो साल बाद 1969 के चुनाव में कांग्रेस के केशोराम ने 1967 की हार का बदला ले लिया. इस सीट के लिए शुरुआती पांच चुनाव में ही चार बार विधानसभा क्षेत्र का नाम बदला जा चुका था. 1974 में इस विधानसभा क्षेत्र का नाम बिल्सी रखा गया, जो अब तक चल रहा है. 1974 के चुनाव में कांग्रेस उम्मीदवार को नई नवेली जनता पार्टी के सोहनलाल ने हरा दिया.

करीबी अंतर से जीती थीं मायावती

बिल्सी विधानसभा सीट साल 1962 से सुरक्षित थी. साल 1996 में मायावती ने यहां से चुनाव लड़ा और बीजेपी के योगेंद्र कुमार सागर को हराया भी, लेकिन जीत का अंतर महज 2515 वोट का रहा था. मायवती तब दो सीट से जीती थीं. उन्होंने बिल्सी सीट से इस्तीफा दे दिया. उपचुनाव में बसपा से कांग्रेस के टिकट पर दो बार के विधायक रहे भोलाशंकर मौर्या उतरे. मौर्या ने बीजेपी के योगेंद्र सागर को 924 वोट के अंतर से हरा दिया.

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बीजेपी के योगेंद्र सागर को 1996 के मुकाबले ज्यादा वोट पड़े लेकिन वे बसपा उम्मीदवार से हार गए. 2002 में सपा के आशुतोष मौर्या ने बिल्सी में बीजेपी के अमित कुमार मथुरिया को हराया तो 2007 में बसपा से टिकट पर लड़े योगेंद्र सागर ने विजयी रहे. 2008 में योगेंद्र सागर पर गैंगरेप का आरोप लगा और मायावती ने 2012 में उनका टिकट काट दिया. ये सीट भी सामान्य हो गई. 2012 में बसपा से मुसर्रत अली बिट्टन ने सपा के विमल कृष्ण अग्रवाल को हराया.

2017 का जनादेश

बिल्सी विधानसभा सीट से बीजेपी ने साल 2017 के चुनाव में पंडित आरके शर्मा को चुनाव मैदान में उतारा. बीजेपी उम्मीदवार ने बसपा के मुसर्रत अली बिट्टन को 26979 वोट के बड़े अंतर से हरा दिया. 24 साल बाद इस सीट पर बीजेपी का कमल खिला. सपा के विमल कृष्ण अग्रवाल वोट के साथ तीसरे स्थान पर रहे थे.

सामाजिक ताना-बाना

बिल्सी विधानसभा क्षेत्र में कुल साढ़े तीन लाख वोटर हैं. अनुमानों के मुताबिक इस विधानसभा क्षेत्र में क्षत्रिय, मौर्या, मुस्लिम, ब्राह्मण, यादव, लोधी, वैश्य के साथ ही अनुसूचित जाति के मतदाता भी अच्छी तादाद में हैं. जातीय फैक्टर इस सीट पर अहम भूमिका निभाते हैं. इसकी तस्दीक बिल्सी विधानसभा सीट का चुनावी अतीत भी करता है.

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विधायक का रिपोर्ट कार्ड

बिल्सी के पास ही भानपुर गांव में साधारण परिवार में जन्में आरके शर्मा साल 2007 में बसपा के टिकट पर पहली बार विधायक निर्वाचित हुए थे. आरके शर्मा तब बसपा के टिकट पर बरेली की आंवला विधानसभा सीट से चुनाव मैदान में उतरे थे. इनका एक बेटा आईपीएस अधिकारी है और एक बेटी डॉक्टर है. विधायक आर के शर्मा का जनता के साथ संवाद न के बराबर रहता है. इलाके के लोगों का दावा है कि विधायक शर्मा अधिकतर समय नोएडा में ही रहते हैं.

 

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