Sambhal Lok Sabha Chunav Result 2019:सपा के डॉ. शफीक उर रहमान बर्क जीते

Lok Sabha Chunav Firozabad Result 2019: गठबंधन उम्मीदवार सपा के डॉक्टर शफीक उर रहमान बर्क ने अपने निकटतम प्रतिद्वंदी भाजपा के परमेश्वर लाल सैनी को 174826 मतों से हराया.

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Sambhal Lok Sabha Election Result 2019 Sambhal Lok Sabha Election Result 2019

aajtak.in

  • नई दिल्ली,
  • 23 मई 2019,
  • अपडेटेड 1:09 PM IST

17वीं लोकसभा चुनाव के तहत उत्तर प्रदेश की संभल सीट से गठबंधन उम्मीदवार सपा के डॉक्टर शफीक उर रहमान बर्क ने अपने निकटतम प्रतिद्वंदी भाजपा के परमेश्वर लाल सैनी को 174826 मतों से हरा दिया है. इस सीट पर बीजेपी और सपा में सीधा मुकाबला था.

कब  और  कितनी  हुई  वोटिंग

संभल सीट  पर  वोटिंग तीसरे चरण  में 23  अप्रैल  को  हुई  थी,  इस सीट पर 64.57 फीसदी लोगों ने अपने मताधिकार  का  इस्तेमाल  किया  था. इस सीट पर कुल 1827861 मतदाता हैं, जिसमें से 1182137 मतदाताओं ने अपने वोट डाले हैं.

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कौन-कौन  हैं  प्रमुख  उम्मीदवार

सामान्य वर्ग वाली इस सीट  पर  यूं  तो  सत्तारूढ़ भारतीय जनता पार्टी के प्रत्याशी परमेश्वर लाल सैनी है, जिनका मुख्य मुकाबला समाजवादी पार्टी के डॉक्टर शफीकुर रहमान बर्क और कांग्रेस के मेजर जगत पाल सिंह से है. प्रगतिशील समाजवादी पार्टी के करण सिंह यादव सहित 12 उम्मीदवार मैदान में हैं.

2014 का चुनाव

2014 के लोकसभा चुनाव में संभल सीट पर 62.43 फीसदी वोटिंग हुई थी, जिसमें बीजेपी प्रत्याशी सत्यपाल सैनी को 34.08 फीसदी (3,60,242) वोट मिले थे और और उनके निकटतम सपा प्रत्याशी शफीकुर रहमान बर्क को 33.59 फीसदी (3,55,068)  मिले थे. इसके अलावा बसपा के अकीलुर्रहमान को महज 23.90 फीसदी (2,52,640) वोट मिले थे. इस सीट पर बीजेपी के सत्यपाल सैनी ने महज 5,174 मतों से जीत दर्ज की थी.

संभल सीट का इतिहास

संभल लोकसभा सीट 1977 में अस्तित्व में आई, इमरजेंसी के बाद देश में पहली बार चुनाव हुए और तब यहां से चौधरी चरण सिंह की पार्टी ने जीत दर्ज की. उसके बाद 1980 और 1984 में लगातार कांग्रेस फिर 1989 और 1991 में जनता दल ने ये सीट जीती. 1996 में बाहुबली डीपी यादव ने बहुजन समाज पार्टी के टिकट पर इस सीट पर कब्जा किया.

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1998 में ये सीट वीआईपी सीटों की गिनती में आ गई जब तत्कालीन समाजवादी पार्टी के मुखिया मुलायम सिंह यादव ने लोकसभा चुनाव में जीत हासिल की. इसके बाद 1999 में भी वह यहां से चुनाव जीते. 2004 में उनके भाई प्रोफेसर रामगोपाल यादव यहां से सांसद चुने गए, लेकिन 2009 में बहुजन समाज पार्टी ने यहां से जीत हासिल की थी और बीजेपी कमल खिलाने में कामयाब रही थी.

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