खजौली विधानसभा सीटः क्या RJD, एनडी से टक्कर में बचा ले जाएगी सीट?

बिहार की खजौली विधानसभा सीट से राष्ट्रीय जनता दल के सीताराम यादव विधायक हैं. 2015 के चुनाव में इन्होंने बीजेपी प्रत्याशी अरुण शंकर प्रसाद को मात दी थी.

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आजेडी नेता तेजस्वी यादव (फाइल फोटो- फेसबुक) आजेडी नेता तेजस्वी यादव (फाइल फोटो- फेसबुक)

अभिषेक शुक्ल

  • नई दिल्ली,
  • 25 सितंबर 2020,
  • अपडेटेड 6:02 PM IST
  • सीताराम यादव हैं खजौली के विधायक
  • 1974 से राजनीति में हैं सक्रिय
  • 2000 में भी चुने जा चुके हैं विधायक

बिहार की 243 विधानसभा सीटों में खजौली विधानसभा का सीट क्रमांक 33 है. यह विधानसभा मधुबनी जिला, और झंझारपुर लोकसभा क्षेत्र के अंतर्गत आती है. इस सीट पर कुल वोटरों की संख्या लगभग 2,79,501 है. इस सीट से राष्ट्रीय जनता दल के सीताराम यादव विधायक हैं.

खजौली विधानसभा मधुबनी की अन्य विधानसभाओं की तुलना में पिछड़ा इलाका माना जाता है. रोजगार, अस्पताल, शिक्षा और सड़कें यहां के प्रमुख मुद्दों में शामिल हैं. 

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2015 का चुनाव  

2015 के चुनाव में आरजेडी प्रत्याशी सीताराम यादव ने भारतीय जनता पार्टी के प्रत्याशी अरुण शंकर प्रसाद को मात दी थी. आरजेडी को कुल 71,534 मत पड़े थे, वहीं बीजेपी को 60,831 वोट हासिल हुए थे. अरुण शंकर प्रसाद बीजेपी के बड़े नेताओं में शुमार रहे हैं. 2010 के चुनाव में वे इसी विधानसभा सीट से विधायक थे. उन्होंने सीताराम यादव को ही पटखनी दी थी.

सीट का इतिहास

इस सीट पर पहली बार 1951 में वोटिंग हुई थी. तब कांग्रेस पार्टी के अहमद सकूर ने निर्दलीय प्रत्याशी अर्जुन सिंह को मात दी थी. 1951, 1957 और 1962, 15 साल लगातार यहां कांग्रेस पार्टी से विधायक चुने गए. अहमद सकूर, लगातार 15 साल विधायक रहे. बीजेपी भी 2005 और 2010 के चुनाव में लागतार 2 बार चुनी गई. इस सीट से पार्टी कम, प्रत्याशियों के चुनाव की परंपरा रही है. इस सीट पर अब कुल 16 बार वोटिंग हुई है. 

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विधायक के बारे में

विधायक सीताराम यादव का जन्म 14 अप्रैल 1952 को मधुबनी के नरकटिया में हुआ था. राजनीति में उतरने से पहले ये कृषि क्षेत्र में सक्रिय थे. इन्होंने साल 1974 में राजनीति में एंट्री ली. 2000 से 2005 के बीच ये खजौली सीट से विधायक रह चुके हैं.

ये 12 पास हैं. इनके विरुद्ध 2 आपराधिक मामले भी दर्ज थे. इसके अलावा ये मुखिया, उप प्रमुख, उपाध्यक्ष, कृषि उत्पादन बाजार समिति का कार्यभार संभाल चुके हैं. कृषि और पशुपालन में विशेष अभिरुची है. देखने वाली बात यह है कि राष्ट्रीय लोकतांत्रिक गठबंधन बनाम ब्रांड तेजस्वी इस सीट को बचाने में कामयाब हो पाएगा या नहीं.

किस-किसके के बीच है मुकाबला?

खजौली विधानसभा सीट पर इस बार का मुकाबला बेहद दिलचस्प है. महागठबंधन बनाम एनडीए की मुख्य लड़ाई है. एनडीए की ओर से भारतीय जनता पार्टी के अरुण शंकर प्रसाद हैं, वहीं सामने महागठबंधन की ओर से राष्ट्रीय जनता दल के सीताराम यादव चुनाव लड़ रहे हैं. 2015 के चुनाव में भी सीताराम यादव विजयी रहे थे, ऐसे में बीजेपी की पूरी कोशिश रहेगी कि किसी भी तरह से चुनावी समर में इन्हें परास्त किया जाए. 

अन्य प्रत्याशियों में रिपब्लिकन पार्टी ऑफ इंडिया(अठावले) की ओर से बाबूलाल गुप्ता, भारतीय सबलोग पार्टी की ओर से राजदेव दास, आजाद समाज पार्टी(कांसी राम), जनशक्ति विकास पार्टी(डेमोक्रेटिक) की ओर से दिनेश प्रसाद सिंह, जन अधिकार पार्टी की ओर से ब्रजकिशोर यादव, और दी प्लूरल्स पार्टी की ओर से कुमार चैतन्य चुनाव लड़ रहे हैं. 

 

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60.89%  लोगों ने किया वोट

खजौली विधानसभा में 7 नवंबर को तीसरे चरण के तहत वोटिंग हुई. तीसरे चरण में 15 जिलों की 78 सीटों पर चुनाव संपन्न हुए थे. खजौली सीट पर कुल 60.89% फीसदी लोगों ने वोट किया है. चुनाव के नतीजे 10 नवंबर को घोषित किए जाएंगे.

 

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