माटीगाड़ा-नक्सलबाड़ी विधानसभा क्षेत्र पश्चिम बंगाल के दार्जिलिंग जिले में स्थित है और यह दार्जिलिंग लोकसभा सीट का हिस्सा है. इसमें नक्सलबाड़ी ब्लॉक और माटीगाड़ा ब्लॉक के पांच ग्राम पंचायत शामिल हैं, जबकि सीटोंग, शिवोक हिल और शिवोक के वन क्षेत्र इसमें नहीं आते. यह निर्वाचन क्षेत्र 2008 में परिसीमन आयोग (Delimitation Commission) की सिफारिशों के
बाद बना था और शुरुआत से ही अनुसूचित जाति (SC) के लिए आरक्षित है.
हालांकि यह सीट अपेक्षाकृत नई है, लेकिन अब तक यहां तीन विधानसभा चुनाव हो चुके हैं. 2011 में कांग्रेस के शंकर मलाकार ने पहली बार चुनाव जीता और सीपीआई(एम) के झरेन राय को हराया. 2016 में मलाकार ने तृणमूल कांग्रेस (टीएमसी) के अमर सिन्हा को मात देकर सीट बरकरार रखी. लेकिन 2021 चुनाव में बड़ा बदलाव देखने को मिला, जब भाजपा के आनंदमॉय बर्मन ने टीएमसी के राजेन सुंदरस को 70,848 वोटों के भारी अंतर से हराया. बर्मन को 1,39,785 वोट (58.10%) मिले, जबकि सुंदरस को 68,937 वोट (28.65%) ही हासिल हुए. कांग्रेस, जो पहले यहां मजबूत मानी जाती थी, सिर्फ 23,060 वोट (9.58%) के साथ तीसरे स्थान पर खिसक गई.
2021 में यहां कुल 2,65,735 पंजीकृत मतदाता थे और मतदान प्रतिशत 83.65% रहा. 2024 लोकसभा चुनाव तक यह संख्या बढ़कर 2,96,214 हो गई.
2021 के अनुमान के अनुसार, यहां की जनसंख्या में अनुसूचित जाति (SC) 84,211 (31.69%), अनुसूचित जनजाति (ST) 43,155 (16.24%), और मुस्लिम मतदाता लगभग 15,413 (5.8%) हैं. मतदाता प्रोफ़ाइल में ग्रामीण मतदाता लगभग 64.19% (1,70,575) हैं, जबकि शहरी मतदाता 35.81% (95,160) हैं.
नक्सलबाड़ी क्षेत्र ऐतिहासिक रूप से भी बेहद अहम है. 1967 में यहीं से नक्सल आंदोलन की शुरुआत हुई थी, जब कट्टरपंथी वामपंथियों ने किसान क्रांति छेड़ी थी. हालांकि आंदोलन अब इस क्षेत्र से लगभग समाप्त हो चुका है, लेकिन इसकी विरासत आज भी लोगों की स्मृति में मौजूद है.
माटीगाड़ा-नक्सलबाड़ी का भूगोल उपजाऊ मैदानी इलाकों और जंगलों से घिरी पहाड़ियों का मिश्रण है. पास से तीस्ता नदी बहती है और यहां की पहचान चाय बागान हैं, जिनमें नक्सलबाड़ी और माटीगाड़ा के बागान प्रमुख हैं. कृषि यहां की मुख्य आजीविका है, जिसमें धान, मक्का और सब्जियों की खेती होती है. साथ ही, चाय उत्पादन और छोटे स्तर का व्यापार भी स्थानीय अर्थव्यवस्था को सहारा देता है. पास ही स्थित सिलीगुड़ी (10 किमी दूर) व्यापारिक केंद्र है, जो पूर्वोत्तर और हिमालयी क्षेत्र का प्रवेश द्वार माना जाता है. दार्जिलिंग शहर यहां से लगभग 65 किमी दूर है, जो एनएच-55 और हिल कार्ट रोड से जुड़ा है.
माटीगाड़ा-नक्सलबाड़ी, कोलकाता से करीब 600 किमी दूर है. इस क्षेत्र में ही स्थित बागडोगरा एयरपोर्ट इसे देश के बड़े शहरों से जोड़ता है. भारत-नेपाल सीमा भी यहां से नजदीक है और नेपाल का काकरभिट्टा कस्बा व्यापार व आवागमन का अहम केंद्र है.
वर्तमान में यह सीट भाजपा के पास है और पार्टी ने यहां गहरी पकड़ बना ली है. ऐसे में 2026 विधानसभा चुनाव में भाजपा आत्मविश्वास के साथ उतरेगी. दूसरी ओर, टीएमसी को अपनी रणनीति पर पुनर्विचार करना होगा. वहीं, अगर कांग्रेस और वामदल मिलकर फिर से सक्रिय होते हैं, तो वे भाजपा-विरोधी वोटों में सेंध लगा सकते हैं. यहां का चुनावी परिणाम मतदान प्रतिशत, जातिगत समीकरण और दार्जिलिंग तराई के राजनीतिक माहौल पर निर्भर करेगा.
(अजय झा)