लालू से क्यों नाराज हैं हेमंत सोरेन? बिहार में 12-13 सीटों पर अड़े, संथाल-कोल्हान में कांग्रेस की सक्रियता से भी नाराज

बिहार में चुनाव हैं और झारखंड में सियासी हलचल बढ़ गई है. मुख्‍यमंत्री हेमंत सोरेन की पार्टी झारखंड मुक्ति मोर्चा (JMM) इस बार बिहार विधानसभा चुनाव को 'सपोर्टिंग रोल' में नहीं, मैन प्लेयर बनकर लड़ना चाहती है. JMM ने तारापुर, चकाई, कटिहार, जमुई, पूर्णिया समेत 12–13 सीटों पर दावा किया है. हालांकि, ना तो लालू प्रसाद यादव की आरजेडी और ना ही कांग्रेस ने भरोसा दिया है. उलटे इंडिया ब्लॉक की मीटिंगों में JMM को बुलावा तक नहीं भेजा गया. नतीजन सोरेन खेमा खुलकर नाराज है.

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बिहार में विधानसभा चुनाव को लेकर सीट शेयरिंग पर मंथन चल रहा. बिहार में विधानसभा चुनाव को लेकर सीट शेयरिंग पर मंथन चल रहा.

उदित नारायण

  • नई दिल्ली,
  • 03 जुलाई 2025,
  • अपडेटेड 12:46 PM IST

बिहार में विधानसभा चुनाव दस्तक देने जा रहा है. इससे पहले INDIA ब्लॉक में सीटों की खींचतान ने सियासी माहौल गरमा दिया है. झारखंड में सत्तारूढ़ दल झारखंड मुक्ति मोर्चा (JMM) के कड़े तेवरों से साफ है कि वो इस बार बिहार में 'मेहमान' नहीं, 'भागीदार' बनकर उतरना चाहता है. JMM की मांग है कि उसे बिहार में कम से कम 12 से 13 सीटें दी जाएं. हालांकि, अंदरखाने खबर ये है कि INDIA ब्लॉक ने अब तक ना तो आधिकारिक तौर पर बातचीत की है और ना ही JMM को कोई सम्मानजनक जगह देने के संकेत दिए हैं. यही वजह है कि JMM नेता हेमंत सोरेन इंडिया ब्लॉक, खासतौर पर आरजेडी नेतृत्व (लालू यादव-तेजस्वी यादव) से नाराज हैं. 

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JMM की नाराजगी पुरानी सहयोगी कांग्रेस से भी है. झारखंड के संथाल परगना और कोल्हान को JMM का गढ़ माना जाता है और यहां कांग्रेस ने हाल के महीनों में पदयात्राएं और पंचायत सम्मेलन तेज कर दिए हैं. JMM का मानना है कि सहयोगी दल का यह ग्रासरूट शो कहीं बिहार की तरह झारखंड में भी सीट‑दबाव रणनीति ना बन जाए. हेमंत की पार्टी को यह नागवार गुजर रहा है. झारखंड में यह दोनों इलाके आदिवासी बहुल हैं. 2024 के चुनाव में JMM ने संथाल और कोल्हान में जबरदस्त प्रदर्शन किया है. संथाल की 18 सीटों में से 17 पर इंडिया ब्लॉक को जीत मिली थी.

एक बार भी JMM से चर्चा नहीं...

पहले बात बिहार की करते हैं. यहां विधानसभा चुनाव की तैयारियां तेज हैं. इंडिया ब्लॉक में आरजेडी अगुवाई कर रही है और कांग्रेस को भरोसे में लेकर सहयोगी दलों के साथ सीट शेयरिंग पर बातचीत आगे बढ़ा रही है. आरजेडी सीट बंटवारे पर अब तक चार बार बैठकें कर चुकी है. लेकिन, एक भी बार उसने JMM से चर्चा नहीं की और ना सीटों पर सहमति बनने की खबर है.

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आरजेडी फॉर्मूले पर सहमति बनाने में जुटा है और सहयोगी दलों के बड़े नेताओं से वन-टू-वन बात कर रहा है. 5 जुलाई को आरजेडी का राष्ट्रीय अधिवेशन है. उसके बाद सीट शेयरिंग पर आगे बातचीत होगी. 

JMM के प्रवक्ता मनोज पांडे भी यह बात स्वीकारते हैं और वे साफ कहते हैं, हम किसी के मोहताज नहीं हैं. अगर INDIA ब्लॉक ने हमें लायक नहीं समझा तो हम अकेले चुनाव लड़ेंगे. हमारे पास संगठन है, लोकप्रिय नेता हैं और बिहार में भी जनाधार है.

हेमंत सोरेन और तेजस्वी यादव. (File Photo- PTI)

मनोज पांडे की ये बात केवल सीटों की नहीं, तेजस्वी यादव और लालू प्रसाद यादव के नेतृत्व में चल रही महागठबंधन की 'एकतरफा' कार्यशैली पर भी सवाल है.

'बिहार में नजरअंदाज, झारखंड में साझेदार?'

JMM को इस बात की चुभन है कि झारखंड में कांग्रेस और RJD ने चुनाव के दौरान सीटों की डिमांड रखी थी और JMM ने उन्हें तवज्जो दी. लेकिन अब बिहार में JMM को कम आंका जा रहा है. साल 2024 के लोकसभा चुनाव में JMM ने बिहार में कोई उम्मीदवार नहीं उतारा और INDIA अलायंस का समर्थन किया था. इसके बावजूद उसे INDIA की बैठकों में बुलाया तक नहीं गया.

झारखंड में JMM की अगुवाई वाली सरकार में कांग्रेस और RJD शामिल हैं. लेकिन अगर JMM की नाराजगी बढ़ती रही तो इसका असर सिर्फ बिहार ही नहीं, झारखंड की सरकार पर भी पड़ सकता है.

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'हमारे नेता भी कम लोकप्रिय नहीं'

JMM की तीखी टिप्पणियों पर RJD भी चुप नहीं है. पार्टी के झारखंड में महासचिव कैलाश यादव ने कहा, अगर पेट में दर्द है तो डॉक्टर को बताना चाहिए. JMM को अहंकार में नहीं बोलना चाहिए. तेजस्वी यादव का बिहार में तूफान है. हमारी लोकप्रियता किसी से कम नहीं है. यानी RJD यह साफ कर रही है कि JMM को 'सही मंच' पर बात करनी चाहिए. न कि मीडिया में दबाव बनाने की राजनीति करनी चाहिए.

'बातचीत से हल निकलेगा'

कांग्रेस फिलहाल कूटनीति पर भरोसा कर रही है और समझौते- संयम की भाषा बोल रही है. झारखंड कांग्रेस के नेता केशव महतो कमलेश ने कहा, जैसे झारखंड में हमने मिल-बैठकर फैसला लिया, वैसे ही बिहार में भी सहयोगी दल आपसी सहमति से फैसला लेंगे. अभी बहुत समय है, बात बनेगी.

हालांकि, अंदरखाने की खबरें कुछ और ही कहती हैं. सूत्रों के मुताबिक, लोकसभा फॉर्मूले को आधार बनाते हुए RJD को 138, कांग्रेस को 54, वाम दलों को 30, VIP को 18 सीटें मिल सकती हैं. यानी JMM के लिए जगह नहीं बचती.

सूत्रों का कहना है कि अगर पशुपति पारस की पार्टी RLJP महागठबंधन का हिस्सा बनती है तो उसे बची 3 सीटें दी जा सकती हैं. JMM ने बिहार में जिन सीटों पर चुनाव लड़ने का दावा किया था, खबर है कि वे सीटें सहयोगी दलों के बीच बांटी जाएंगी.

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क्या कहती है बीजेपी?

इस पूरे विवाद पर बीजेपी नेता और राज्यसभा सांसद आदित्य साहू कहते हैं, आरजेडी और कांग्रेस कभी JMM को तवज्जो नहीं देंगे. ये लोग झारखंड की गाढ़ी कमाई को लूटकर अपने लिए सत्ता बटोरना चाहते हैं. हेमंत सोरेन सीटें मांगकर सिर्फ दिखावा कर रहे हैं.

क्या झारखंड सरकार पर खतरे के बादल?

राजनीतिक विश्लेषक कहते हैं कि अगर JMM की नाराजगी गहराई तो झारखंड में कांग्रेस और RJD की भूमिका पर भी सवाल उठेंगे. झारखंड में JMM के 34 विधायक हैं, लेकिन बहुमत के लिए 41 की जरूरत है. कांग्रेस के 16 और आरजेडी के 4 विधायक हैं. RJD और कांग्रेस मिलकर सत्ता में साझेदार हैं. अगर यह नाराजगी राजनीतिक संघर्ष में बदलती है तो झारखंड की सत्ता समीकरण भी हिल सकते हैं.

क्या JMM अकेले चुनाव लड़ेगी?

फिलहाल, राजनीतिक गलियारों में सवाल उठ रहा है कि क्या JMM बिहार में अकेले चुनावी मैदान में उतरेगी? यदि INDIA ब्लॉक उसे तवज्जो नहीं देता तो JMM न सिर्फ बिहार में उम्मीदवार उतार सकती है, बल्कि झारखंड में भी RJD-कांग्रेस के साथ रिश्तों की नई समीक्षा कर सकती है.

JMM का बिहार में क्या है परफॉर्मेंस रिकॉर्ड?

साल 2020 के बिहार विधानसभा चुनाव में झारखंड मुक्ति मोर्चा 5 सीटों पर इलेक्शन लड़ा था और कुल 25,213 वोट मिले थे. इनमें 4 सीटों पर आरजेडी और एक सीट पर कांग्रेस के खिलाफ उम्मीदवार उतारे थे. इससे पहले 2015 में JMM ने बिहार की 32 सीटों पर चुनाव लड़ा था और 1,03,940 वोट हासिल किए थे. इस चुनाव में JMM महागठबंधन का हिस्सा थी.

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साल 2010 में JMM ने अकेले 41 सीटों पर चुनाव लड़ा और 1,76,400 वोट हासिल किए थे. 2005 में JMM ने 18 सीटों पर चुनाव लड़ा था और 76,671 वोट हासिल किए थे. साल 2000 में JMM ने सबसे ज्यादा 85 सीटों पर चुनाव लड़ा और 13,06,152 वोट हासिल किए थे. 

हालांकि, 2024 के लोकसभा चुनाव में JMM ने बिहार में उम्मीदवार नहीं उतारे थे और इंडिया ब्लॉक को समर्थन दिया था. इससे पहले 2019 के लोकसभा चुनाव में झारखंड मुक्ति मोर्चा ने बिहार में 4 सीटों पर उम्मीदवार उतारे थे और कुल 30,853 वोट हासिल किए थे. इससे पहले 2014 के लोकसभा चुनाव में JMM ने 8 उम्मीदवार उतारे थे और कुल 1,89,265 वोट हासिल किए थे. 2004 में JMM बिहार में 4 सीटों पर लड़ा था और कुल 1,08,841 वोट मिले थे. हालांकि, 2024 के आम चुनाव में JMM ने बिहार में उम्मीदवार नहीं उतारे और इंडिया अलायंस के उम्मीदवारों का समर्थन किया.

बिहार में 2020 में क्या नतीजे रहे?

साल 2020 के विधानसभा चुनाव में महागठबंधन में आरजेडी 144, कांग्रेस 70, लेफ्ट पार्टियां 29 सीटों पर चुनाव लड़ी थीं. जबकि एनडीए में बीजेपी ने 110, जेडीयू ने 115, HAM ने 7,  वीआईपी ने 13 सीटों पर चुनाव लड़ा था. नतीजे आए तो बीजेपी ने 74, जेडीयू ने 43, HAM ने 4, वीआईपी ने 4 सीटें जीतीं. जबकि आरजेडी ने 75, कांग्रेस ने 19, लेफ्ट पार्टियों ने 16 सीटों पर जीत हासिल की.

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आगे क्या होगा?

JMM अगर बिहार में अकेले उतरती है तो कई सीटों पर त्रिकोणीय मुकाबला हो सकता है. RJD‑कांग्रेस को वोट कटने का जोखिम रहेगा. सीट समझौता ना बनने पर अगस्त तक घोषणा संभव है. हालांकि, अगर सीट समझौता हो गया तो गठबंधन पूरी ताकत से NDA को टक्कर देगा. 5 जुलाई को RJD के राष्ट्रीय अधिवेशन के बाद स्थिति साफ होने की उम्मीद है. पार्टी सूत्रों का दावा है कि JMM ने 12 सीटों पर बूथ मैनेजमेंट और कैंडिडेट स्क्रूटनी शुरू भी कर दी है.

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