पश्चिम बंगाल में आजादी के बाद से अब तक का सबसे अधिक मतदान प्रतिशत रिकॉर्ड किया गया है. दो चरणों में हुई वोटिंग में जबरदस्त भागीदारी देखने को मिली है. दूसरे चरण में रात 9 बजे तक 92.25 फीसदी मतदान दर्ज किया गया, जबकि पहले चरण में 93.19 फीसदी से ज्यादा मतदाताओं ने अपने मताधिकार का प्रयोग किया.
दोनों चरणों को मिलाकर कुल 6 करोड़ 81 लाख वोट पड़े हैं. संयुक्त मतदान प्रतिशत फिलहाल 92.47 फीसदी है, जिसमें मामूली इजाफा होने की संभावना जताई जा रही है. इससे पहले पश्चिम बंगाल में सबसे अधिक मतदान प्रतिशत साल 2011 में 84.72 फीसदी दर्ज किया गया था, जो इस बार काफी पीछे छूट गया है.
यदि मतदाताओं की संख्या पर नजर डालें तो पहले चरण में 3 करोड़ 60 लाख और दूसरे चरण में 3 करोड़ 21 लाख लोगों ने वोट डाले. पुरुष मतदाताओं ने पहले चरण में एक करोड़ 84 लाख और दूसरे चरण में एक करोड़ 65 लाख वोट डाले. महिलाओं ने पहले चरण में 1 करोड़ 76 लाख और दूसरे चरण में 1 करोड़ 57 लाख वोट डाले.
कुल मिलाकर पुरुष मतदाताओं का प्रतिशत 91.07 फीसदी यानी 3 करोड़ 49 लाख रहा, जबकि महिलाओं का प्रतिशत 92.28 फीसदी यानी 3 करोड़ 33 लाख दर्ज किया गया. तीसरे लिंग के 1257 यानी 91.28 फीसदी वोटरों ने भी मतदान में भाग लिया. हालांकि, ईसीआईएनईटी (ecinet) में दर्ज आंकड़े अलग तथ्य देते हैं.
इसके अनुसार पश्चिम बंगाल के 5,343 पोलिंग स्टेशनों का डेटा अभी तक अपडेट नहीं किया गया है. यह डेटा अस्थायी है. इसमें सर्विस वोटर्स और पोस्टल बैलेट शामिल नहीं हैं. अंतिम आंकड़े ईसीआईएनईटी के माध्यम से इंडेक्स कैंडिडेट्स में साझा किए जाएंगे. मुख्य निर्वाचन आयुक्त मतदान प्रक्रिया पर कड़ी नजर रखे हुए थे.
इसके लिए मुख्य निर्वाचन आयुक्त ज्ञानेश कुमार ने चुनाव आयुक्त डॉ. एस.एस. संधू और डॉ. विवेक जोशी के साथ लाइव वेबकास्टिंग के माध्यम से निगरानी की थी. यह व्यवस्था दूसरे चरण के मतदान में 100 फीसदी मतदान केंद्रों पर सुनिश्चित की गई थी. अधिकतर जगहों से रियल टाइम में ही डेटा मिल गया.
राज्य में दोनों चरणों के लिए मतदाताओं, मतदान केंद्रों, मतदान कर्मचारियों, उम्मीदवारों और मतदान एजेंटों ने अपनी भूमिका निभाई. पीठासीन अधिकारियों ने मतदान केंद्र छोड़ने से पहले चुनाव आयोग के नवीनतम निर्देशों के अनुसार मतदान समाप्त होने पर ईसीआईएनईटी पर मतदान प्रतिशत को अपडेट कर दिया.
इन चुनावों में मतदाताओं की सुविधा के लिए कई नई पहल भी की गईं. इनमें ईवीएम मतपत्रों पर उम्मीदवारों की आसानी से पहचान योग्य रंगीन तस्वीरें, मोबाइल डिपॉजिट फैसिलिटी (एमडीएफ), नई डिजाइन की गई मतदाता सूचना पर्चियां (वीआईएस) और प्रति मतदान केंद्र मतदाताओं की संख्या 1,200 तक सीमित करना शामिल है.
दिव्यांग मतदाताओं के लिए भी विशेष इंतजाम किए गए. मतदान केंद्रों पर व्हीलचेयर और स्वयंसेवक उपलब्ध कराए गए. उन्हें मतदान केंद्र तक पहुंचाने के लिए परिवहन सुविधाएं भी दी गईं. जिलावार और विधानसभा क्षेत्रवार अनुमानित मतदान प्रतिशत के आंकड़े ईसीआईएनईटी ऐप पर भी उपलब्ध करवा दिए गए हैं.
संजय शर्मा