'10वीं का एडमिट कार्ड मान्य, लेकिन पास सर्टिफिकेट जरूरी', बंगाल SIR विवाद पर SC की अहम टिप्पणी

बंगाल में करीब 80 लाख लोग अपनी नागरिकता और पहचान से जुड़े दावों और आपत्तियों का निपटारा कराने की कोशिश कर रहे हैं. 2002 की मतदाता सूची के साथ मिलान के दौरान विसंगतियां पाए जाने के बाद यह संकट खड़ा हुआ था.

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बंगाल में मतदाता सूची संशोधन के लिए सुप्रीम कोर्ट ने दिया अहम आदेश (File Photo: PTI) बंगाल में मतदाता सूची संशोधन के लिए सुप्रीम कोर्ट ने दिया अहम आदेश (File Photo: PTI)

aajtak.in

  • नई दिल्ली,
  • 25 फरवरी 2026,
  • अपडेटेड 7:11 PM IST

सुप्रीम कोर्ट ने बुधवार को स्पष्ट किया कि पश्चिम बंगाल में चल रही विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) प्रक्रिया के तहत कक्षा 10 की प्रवेश-पत्र (एडमिट कार्ड) को पास प्रमाणपत्र के साथ पहचान सत्यापन के पूरक दस्तावेज के रूप में प्रस्तुत किया जा सकता है.

मुख्य न्यायाधीश जस्टिस सूर्यकांत, जस्टिस जॉयमाल्या बागची और जस्टिस विपुल एम. पंचोली की पीठ ने वरिष्ठ अधिवक्ता डीएस नायडू द्वारा मामला उठाए जाने के बाद यह आदेश पारित किया.

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वरिष्ठ अधिवक्ता ने यह चिंता जताई थी कि क्या एडमिट कार्ड को स्वतंत्र पहचान दस्तावेज के रूप में स्वीकार किया जा सकता है. इस पर शीर्ष अदालत ने स्पष्ट किया कि एडमिट कार्ड केवल पूरक दस्तावेज के रूप में ही मान्य होगा.

कोर्ट ने दिए अहम निर्देश

पीठ ने कहा, “24 फरवरी 2026 के आदेश के पैरा 3(iii) में उल्लिखित सभी दस्तावेज, जो अब तक अपलोड नहीं किए गए हैं और 15 फरवरी से पहले प्राप्त हो चुके हैं, उन्हें निर्वाचन पंजीकरण अधिकारी और सहायक निर्वाचन पंजीकरण अधिकारी कल शाम 5 बजे तक संबंधित न्यायिक अधिकारियों को सौंपेंगे.”

यह भी पढ़ें: पश्चिम बंगाल SIR पर सुप्रीम कोर्ट का बड़ा फैसला, झारखंड और ओडिशा के जज भी निपटाएंगे 80 लाख केस

साथ ही अदालत ने स्पष्ट किया कि पैरा 3(iii)(c) के तहत माध्यमिक (कक्षा 10) के एडमिट कार्ड को जन्म प्रमाण और अभिभावक संबंधी प्रमाण के उद्देश्य से उत्तीर्ण (Pass) प्रमाणपत्र के साथ प्रस्तुत किया जा सकता है.

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शीर्ष अदालत ने मंगलवार को पश्चिम बंगाल में चल रही SIR प्रक्रिया के तहत मतदाता सूची से हटाए जाने का सामना कर रहे लोगों के 80 लाख दावों और आपत्तियों के निपटारे के लिए 250 जिला न्यायाधीशों के अलावा सिविल न्यायाधीशों की तैनाती की अनुमति दी. साथ ही झारखंड और ओडिशा से भी न्यायिक अधिकारियों की मांग की अनुमति दी गई.

अदालत ने कलकत्ता हाईकोर्ट के मुख्य न्यायाधीश सुजॉय पॉल के 22 फरवरी के पत्र पर ध्यान दिया, जिसमें कहा गया था कि 250 जिला न्यायाधीशों को भी सभी दावों और आपत्तियों के निपटारे में लगभग 80 दिन लग सकते हैं.

अदालत ने कहा कि यदि प्रत्येक न्यायिक अधिकारी प्रतिदिन 250 मामलों का निपटारा भी करे, तब भी पूरी प्रक्रिया में करीब 80 दिन लगेंगे, जबकि SIR की अंतिम तिथि 28 फरवरी निर्धारित है. पीठ ने वरिष्ठ और कनिष्ठ सिविल न्यायाधीशों (कम से कम तीन वर्ष के अनुभव वाले) की तैनाती की अनुमति दी और झारखंड व ओडिशा उच्च न्यायालयों से समान स्तर के न्यायिक अधिकारियों की मांग करने को कहा.

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