असम, केरल, तमिलनाडु, पश्चिम बंगाल और केंद्र शासित प्रदेश पुडुचेरी में विधानसभा चुनाव की तारीखों के ऐलान के बाद राजनीतिक दलों की प्रतिक्रियाएं सामने आने लगी हैं. भाजपा ने चुनाव कार्यक्रम का स्वागत करते हुए भरोसा जताया कि जनता विकास, स्थिरता और सुशासन के पक्ष में मतदान करेगी. भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष नितिन नवीन ने X पोस्ट में लिखा, 'पांचों राज्यों के चुनाव की तारीखों की घोषणा के साथ ही एनडीए और भाजपा के कार्यकर्ता आगामी चुनावों के लिए पूरी तरह तैयार हैं. प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में एक ओर जहां असम और पुडुचेरी में पुनः एनडीए की सरकार बनने जा रही है, वहीं दूसरी ओर पश्चिम बंगाल, तमिलनाडु और केरलम में भी जनता के आशीर्वाद से एनडीए की विजय का मार्ग प्रशस्त हो रहा है.'
भारतीय जनता पार्टी के महासचिव तरुण चुग ने कहा कि चुनाव लोकतंत्र का महापर्व होते हैं, जो जनता की भागीदारी को मजबूत करते हैं और विकास तथा जनकल्याण के नए रास्ते खोलते हैं. उन्होंने कहा कि उन्हें विश्वास है कि इन राज्यों के जागरूक मतदाता लोकतांत्रिक मूल्यों को कायम रखते हुए विकास और स्थिरता के पक्ष में स्पष्ट जनादेश देंगे. भाजपा प्रवक्ता प्रवक्ता प्रदीप भंडारी ने कहा कि चुनाव कार्यक्रम घोषित होने के साथ ही पश्चिम बंगाल में सत्तारूढ़ टीएमसी के लिए रिवर्स काउंटडाउन शुरू हो गया है. उन्होंने कहा कि बंगाल की जनता बदलाव और विकास के लिए मतदान करेगी और नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में भाजपा को समर्थन देगी.
केरल में भाजपा के चुनाव प्रभारी विनोद तावड़े ने पार्टी कार्यकर्ताओं से प्रधानमंत्री मोदी के 'विकसित भारत, विकसित केरलम' के विजन को घर-घर तक पहुंचाने की अपील की. उन्होंने कहा कि कार्यकर्ता कड़ी मेहनत करें और तब तक न रुकें जब तक केरल में भाजपा सत्ता में नहीं आ जाती.
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कांग्रेस ने स्वतंत्र मतदान को लेकर जताई चिंता
दूसरी ओर, कांग्रेस ने पश्चिम बंगाल में दो चरणों में चुनाव कराने के फैसले का स्वागत किया, लेकिन मतदाताओं की सुरक्षा और स्वतंत्र मतदान को लेकर चिंता जताई. कांग्रेस के वरिष्ठ नेता प्रदीप भट्टाचार्य ने कहा कि उनकी चिंता यह है कि मतदाता बिना किसी डर या दबाव के अपने मताधिकार का प्रयोग कर सकें.
असम विधानसभा में विपक्ष के नेता देवब्रत सैकिया ने चुनाव की घोषणा का स्वागत करते हुए कहा कि एक ही चरण में चुनाव कराने से तैयारी से जुड़ी कई चुनौतियां सामने आती हैं. केरल में सीपीएम के राज्य सचिव एम. वी. गोविंदन ने बताया कि पार्टी 86 सीटों पर चुनाव लड़ेगी और 56 मौजूदा विधायकों को फिर से टिकट दिया गया है. उन्होंने कहा कि मुख्यमंत्री पिनाराई विजयन भी चुनाव मैदान में उतरेंगे और उम्मीदवारों का चयन पूरी तरह लोकतांत्रिक प्रक्रिया के तहत किया गया है.
तमिलनाडु कांग्रेस ने आयोग पर उठाए सवाल
कांग्रेस के वरिष्ठ नेता पी. चिदंबरम ने भी चुनाव कार्यक्रम का स्वागत करते हुए कहा कि उन्हें खुशी है कि चुनाव चरणों की संख्या कम रखी गई है. हालांकि तमिलनाडु में कुछ नेताओं ने चुनाव तारीख को लेकर सवाल भी उठाए. कांग्रेस सांसद एस. जोतिमणि ने आरोप लगाया कि तमिलनाडु में चुनाव की तारीख अलग रखने से चुनाव आयोग की निष्पक्षता पर सवाल उठते हैं. वहीं डीएमके के आईटी विंग ने इसे तमिलनाडु के अधिकारों की रक्षा की लड़ाई बताया. दूसरी ओर भाजपा नेता विनोद पी. सेल्वम ने विपक्ष पर चुनाव की घोषणा के तुरंत बाद ही हार की बात करने का आरोप लगाया. असम, केरल और पुडुचेरी में 9 अप्रैल को, तमिलनाडु में 23 अप्रैल को और पश्चिम बंगाल में 23 और 29 अप्रैल को मतदान होगा, जबकि सभी राज्यों के नतीजे 4 मई को घोषित किए जाएंगे.
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