साइकिल पर मुख्तार का बेटा सवार, 4 साल बाद मऊ में इस अंदाज में आए नजर

उत्तर प्रदेश में विधानसभा चुनाव की तपिश बढ़ गई है. मुख्तार अंसारी के बेटे अब्बास अंसारी भले ही सुभासपा के विधायक हों, लेकिन सपा की साइकिल पर सवार होकर चार साल बाद अपने विधानसभा क्षेत्र पहुंचे. इस दौरान वो अलग ही अंदाज में नजर आए.

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मुख्तार अंसारी के बेटे अब्बास अंसारी मऊ में सक्रिय (Photo-Facebook) मुख्तार अंसारी के बेटे अब्बास अंसारी मऊ में सक्रिय (Photo-Facebook)

कुबूल अहमद

  • नई दिल्ली,
  • 22 मई 2026,
  • अपडेटेड 12:23 PM IST

पूर्वांचल के बाहुबली रहे मुख्तार अंसारी के बेटे अब्बास अंसारी सुभासपा से विधायक हैं. जेल से रिहा होने और करीब चार साल के बाद अब्बास अंसारी अपने मऊ विधानसभा क्षेत्र में नजर आए. उन्होंने मऊ के इटौरा ग्राम सभा में 25 लाख रुपये की लागत से बनने वाली इंटरलॉकिंग सड़क का उद्घाटन किया और कई सार्वजनिक कार्यक्रम में शामिल हुए. इस दौरान अब्बास अंसारी अलग ही अंदाज और रंग में नजर आए. 

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अब्बास अंसारी भले ही सुभासपा से विधायक हैं, लेकिन वो ओम प्रकाश राजभर के बजाय अखिलेश यादव को अपने नेता बता रहे हैं. इस अब्बास अंसारी ने औपचारिक रुप से साइकिल पर सवारी करने से होने से पहले ही सपा का झंडा उठा लिया है और मिशन-2027 में जुट गए हैं. 

मुख्तार अंसारी के बेटे अब्बास अंसारी 2022 में अपने पिता की कर्मभूमि मऊ सीट से विधायक बने. इसके बाद उन पर कानूनी शिकंजा कसा और कई एफआईआर दर्ज हो गईं, जिसमें वो लंबे समय तक जेल में बंद रहे. इस दौरान उनकी सदस्यता रद्द कर दी गई थी, लेकिन सुप्रीम कोर्ट से राहत मिलने के बाद विधायकी बची. कानूनी प्रक्रियाओं के कारण वो अपने क्षेत्र में सक्रिय नहीं थे, लेकिन अब अदालत से राहत मिलने के बाद फिर से एक्टिव हुए हैं. 

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चार साल बाद अब्बास अंसारी मऊ में एक्टिव
जेल से रिहा होने और कानूनी राहत मिलने के बाद अब्बास अंसारी करीब चार साल के बाद राजनीतिक रूप से एक एक्टिव हुए हैं. बुधवार को अब्बास अंसारी अपने काफिले के साथ मऊ क्षेत्र के इटौरा ग्राम सभा में पहुंचे, जहां पर तकरीबन 25 लाख रुपये की लागत से बनने वाली इंटरलॉकिंग सड़क का उद्घाटन किया. जेल से रिहा होने के बाद पहली बार एक सार्वजनिक कार्यक्रम में हिस्सा लिया. इस दौरान युवा और महिलाओं के साथ संवाद करते नजर आए.

2022 के विधानसभा चुनाव में जीत हासिल करने के सवा चार साल बाद अब्बास अंसारी मऊ में किसी सार्वजनिक कार्यक्रम में शिरकत किए हैं. इस दौरान उन्होंने लोगों को संबोधित करते हुए अपने राजनीतिक सफर और विधानसभा क्षेत्र से दूर रहने की वजह भी बताई. अब्बास अंसारी ने कहा कि वह एक इंटरनेशनल खिलाड़ी थे, लेकिन परिस्थितियों और अपने पिता के जेल जाने के बाद उन्होंने राजनीति में कदम रखा.

अब्बास अंसारी ने आरोप लगाया कि उनके ऊपर लगातार मुकदमे लगाए गए और उन्हें वर्षों तक जेल में रहना पड़ा था. उन्होंने कहा कि न्यायपालिका पर विश्वास और जनता के आशीर्वाद से वह बाहर आए हैं, लेकिन अब अपनी जनता से दूर रहना बर्दाश्त नहीं है. इस दौरान उन्होंने जिला प्रशासन को भी यह संदेश दे दिया है कि अब जनता और उनके बीच दूरी न बनाई जाए. वो लंबे समय तक क्षेत्र से दूर रहने के बाद, उनकी यह वापसी मऊ की सियासत में हलचल पैदा कर दी है. 

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साइकिल पर सवारी से पहले उठा सपा का झंडा
मुख्तार अंसारी के बेटे अब्बास अंसारी सुभासपा से विधायक हैं, लेकिन अब सपा की साइकिल पर सवारी करने की तैयारी कर ली है.  मऊ दौरे पर अब्बास अंसारी बार-बार अखिलेश यादव को हमारे अध्यक्ष कह कर पुकार रहे थे. कार्यक्रम के दौरान मंच पर जो पोस्टर लगे थे,  वो समाजवादी पार्टी के थे. सपा के नेता और कार्यकर्ता भी उनके साथ खड़े नजर आए. 

अब्बास अंसारी की बाते से ऐसा लगा रहा था कि वो सुभासपा के नहीं बल्कि सपा के विधायक हैं और उनके नेता ओम प्रकाश राजभर नहीं बल्कि अखिलेश यादव हैं. अब्बास अंसारी के साथ  सपा के मऊ जिला अध्यक्ष दूधनाथ यादव भी साथ में थे. मऊ में सपा के कार्यलय भी अब्बास अंसारी पहुंचे. इस तरह सपा के रंग में पूरी तरह से रचे बसे नजर आए. 

सपा के टिकट पर क्या लड़ेंगे 2027 का चुनाव
अब्बास अंसारी पिछले कुछ दिनों से लगातार समाजवादी पार्टी के दफ्तर और सपा नेताओं के साथ नजर आ रहे हैं. 2027 में सपा के सिंबल पर चुनाव लड़ने के सवाल पर अब्बास अंसारी ने कहा कि अभी तो फिलहाल 2027 का चुनाव बहुत दूर है. अभी मेरी सिर्फ एक ही कार्ययोजना है कि अपनी विकास निधि से जनता के छोटे-मोटे रुके हुए काम पूरे करा सकूं. 

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उन्होंने कहा कि अगर 2027 के चुनाव में  सपा मुझे उम्मीदवार बनाती है या टिकट देती है, तो इस बारे में सिर्फ सपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष अखिलेश यादव ही बता सकते हैं. मैं इस पर उत्तर देने के लिए अधिकृत नहीं हूं. इस तरह से उन्होंने भले ही पत्ते न खोले हों,  लेकिन सियासी संकेत जरूर दे दिए हैं. 

सपा में क्यों नहीं हो रहे अब्बास अंसारी शामिल
सुभासपा विधायक अब्बास अंसारी भले ही सपा का दामन न थामा हो, लेकिन ओम प्रकाश राजभर से किनारा कर लिया है. सपा का दामन थामते हैं तो अब्बास अंसारी की विधायकी रद्द हो सकती है, क्योंकि 2022 में सुभासपा से जीते हैं. सुभासपा ने अब्बास अंसारी को न ही निष्कासित किया गया है, जिसके चलते अगर सपा में शामिल होते हैं तो दलबदल कानून के तहत विधायकी पर संकट गहरा सकता है. इसीलिए सपा भले ही सपा का झंडा उठा रखा हो, लेकिन अधिकारिक रूप से साइकिल की सवारी नहीं कर रहे हैं. 

अब्बास अंसारी बहुत की रणनीति के साथ अपने कदम बढ़ा रहे हैं. विधायक रहते हुए अपने क्षेत्र में अपनी विधायकनिधि से वो विकास कार्य कर सियासी माहौल बनाए रखना चेहते हैं. अब्बास अंसारी ने विकास कार्यों को जनता की जरूरत बताया. उन्होंने कहा कि क्षेत्र में सड़क और मूलभूत सुविधाओं को प्राथमिकता दी जाएगी.

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मऊ से अंसारी परिवार का नाता जोड़ते दिखे
अब्बास अंसारी ने आगे कहा कि उनके परिवार ने अपनी जमीन पर 18 गांव बसाए हैं और आज तक कोई यह नहीं बता सकता कि किसी और ने अपनी निजी जमीन देकर लोगों को बसाया हो. उन्होंने यह भी कहा कि उनके परिवार ने देश के लिए कुर्बानी दी है, स्वतंत्रता सेनानी दिए हैं और खून की आहुति दी है।

इसी दौरान उन्होंने ब्रिगेडियर मोहम्मद उस्मान और मुख्तार अहमद अंसारी का जिक्र करते हुए कहा कि डॉ. मुख्तार अहमद अंसारी विदेश में डॉक्टर होने के बावजूद देश की आजादी की लड़ाई में शामिल हुए थे. इस तरह अब्बास अंसारी ने बताया कि मऊ के साथ कैसे उनके सिर्फ राजनीतिक रिश्ते नहीं है बल्कि परिवारिक नाता है. 

अब्बास अंसारी ने कहा कि  जब तक उनके शरीर में  खून की एक भी बूंद है और जब तक उनकी सांसें चल रही हैं, वो मऊ की  आवाम और लोगों के सुख-दुख में साथ खड़ा रहूंगें और उनकी इज्जत, आबरू और मान-सम्मान की हिफाजत करते रहेंगे. इस तरह से मऊ में सियासी माहौल बनाना शुरू कर दिया है, क्योंकि अलग साल विधानसभा चुनाव होने हैं. 
 
 

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