केरल: सबरीमाला में महिलाओं के प्रवेश पर फिर सियासत तेज, कांग्रेस-BJP ने सरकार को घेरा

केरल में सबरीमाला मंदिर में महिलाओं के प्रवेश पर फिर सियासत शुरू हो गई है. चुनाव से पहले कांग्रेस और बीजेपी सरकार पर अपना रुख स्पष्ट करने का दबाव बना रहे हैं. वहीं, सरकार ने इस मामले पर संवैधानिक जटिलताओं का हवाला देते हुए जल्दबाजी से बचने की बात कही है.

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सबरीमाला मंदिर में महिलाओं के प्रवेश का ये विवाद 2018 का है.  (File Photo: ITG) सबरीमाला मंदिर में महिलाओं के प्रवेश का ये विवाद 2018 का है. (File Photo: ITG)

aajtak.in

  • तिरुवनंतपुरम,
  • 16 फरवरी 2026,
  • अपडेटेड 11:06 PM IST

केरल में विधानसभा चुनाव से पहले सबरीमाला मंदिर में महिलाओं के प्रवेश का विवादित मुद्दा एक बार फिर राजनीतिक गलियारों में चर्चा में है. कांग्रेस और बीजेपी सत्ताधारी वामपंथी सरकार पर इस संवेदनशील मुद्दे पर अपना रुख साफ करने के लिए दबाव बना रहे हैं.

2018 में राज्य की वामपंथी सरकार ने महिलाओं के प्रवेश का समर्थन किया था. इसे लेकर पूरे राज्य में हिंसक प्रदर्शन हुए थे. अब सोमवार को सुप्रीम कोर्ट ने पूजा स्थलों में महिलाओं के साथ होने वाले भेदभाव से जुड़ी याचिकाओं पर सुनवाई के लिए नौ जजों की बेंच गठित की. जिसके बाद सबरीमाला मंदिर में महिलाओं के प्रवेश का मुद्दा भी चर्चा में आ गया है.

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विपक्ष पिनाराई विजयन सरकार से मांग कर रहा है कि वो सुप्रीम कोर्ट में तुरंत एक 'संशोधित हलफनामा' पेश करे. इस मामले पर राज्य के कानून मंत्री पी. राजीव ने कहा कि ये इतना आसान नहीं है और इसमें कई संवैधानिक पेचीदगियां शामिल हैं. सरकार का कहना है कि वो बारीकी से जांच के बाद ही कोर्ट के सामने अपना नया स्टैंड रखेगी.

केरल सरकार ने संवैधानिक जटिलताओं का हवाला दिया

कानून मंत्री ने पत्रकारों से कहा, 'ये ऐसी स्थिति नहीं है जहां सिर्फ हां या ना कहा जा सके. इसमें कई संवैधानिक जटिलताएं शामिल हैं.' सभी पहलुओं पर विचार करने की जरूरत है. पी. राजीव ने भरोसा दिलाया कि सरकार आस्थावानों के साथ खड़ी है और इस मामले पर अपना पक्ष रखने के लिए उसके पास काफी समय है.

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सुप्रीम कोर्ट के फैसले का जिक्र

सरकार ने तर्क दिया कि उसने हमेशा अदालती आदेशों का पालन किया है. कानून मंत्री ने बताया कि पहले भी सरकार ने विद्वानों का एक आयोग बनाने का सुझाव दिया था. ये आयोग हिंदू मान्यताओं और सामाजिक सुधारों का अध्ययन करती. उन्होंने कहा, 'ये कोई सरकारी आदेश नहीं बल्कि सुप्रीम कोर्ट का फैसला था. शीर्ष अदालत का फैसला स्वाभाविक रूप से बाध्यकारी होता है. उसी सुप्रीम कोर्ट ने बाद में इस पर पुनर्विचार करने का फैसला किया. तब भी, पिछले फैसले पर रोक नहीं लगाई गई है.'

कांग्रेस ने केरल सरकार को घेरा

वहीं, सबरीमाला मामले को लेकर कांग्रेस और बीजेपी ने सरकार को आड़े हाथों लिया है और इसे सरकार की दोहरी नीति बताया है. वरिष्ठ कांग्रेस नेता और विधानसभा में विपक्ष के नेता वी.डी. सतीशन ने आरोप लगाया कि सरकार भक्तों को गुमराह कर रही है. उन्होंने कहा, 'ये बताने के लिए कितने घंटों की चर्चा की जरूरत है कि बदली हुई सामाजिक परिस्थितियों को देखते हुए पिछला रुख बदला जा रहा है? एक एफिडेविट फाइल करने के लिए सिर्फ 10 मिनट की जरूरत है.'

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वहीं बीजेपी के प्रदेश अध्यक्ष राजीव चंद्रशेखर ने भी सरकार पर तंज कसते हुए कहा कि चुनाव को देखते हुए सरकार कभी भी यू-टर्न ले सकती है.

सदियों पुरानी परंपराओं के साथ कई हिंदू संगठन

केरल के प्रभावशाली हिंदू संगठनों, जैसे नायर सर्विस सोसाइटी (NSS) और SNDP योगम ने भी बताया है कि वो मंदिर की सदियों पुरानी परंपराओं के साथ कोई समझौता नहीं चाहते. उन्होंने साफ किया है कि वो रजस्वला आयु की महिलाओं के प्रवेश के खिलाफ हैं. SNDP के महासचिव वेल्लापल्ली नटेशन ने कहा कि जो प्रथा पहले नहीं थी उसे जबरन लागू करना ठीक नहीं है.

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उन्होंने कहा, 'हमें ये भी याद रखना चाहिए कि जो लोग पहले इस फैसले का समर्थन कर रहे थे, वो अब इसके खिलाफ हैं.अदालत ने अब सरकार को अपनी राय जाहिर करने का मौका दिया है. अदालत को फैसला करने दीजिए.'

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