Assembly Election Exit Poll 2026 LIVE News & Latest Updates: पश्चिम बंगाल, तमिलनाडु, असम, केरल और पुडुचेरी में विधानसभा चुनावों के एग्जिट पोल जारी होने वाले हैं. इन चुनावों में सभी इलाकों में भारी मतदान हुआ है, जिसके बाद ये एग्जिट पोल मतदाताओं के मूड का पहला बड़ा संकेत देंगे. असम में 85.96 फीसदी, पुडुचेरी में 89.87 फीसदी वोटिंग हुई. वहीं, तमिलनाडु में 82 फीसदी से ज़्यादा वोट पड़े. पश्चिम बंगाल में पहले चरण में 90 फीसदी से ज़्यादा लोगों ने हिस्सा लिया और दूसरे चरण में भी करीब 90 फीसदी वोटिंग हुई. कई राज्यों में महिला मतदाताओं की संख्या पुरुषों से ज़्यादा रही, जो एक अहम जनसांख्यिकीय रुझान को दिखाता है.
क्या बीजेपी बंगाल में तृणमूल को सत्ता से हटा पाएगी? क्या विजय DMK-AIADMK के वोट बैंक में सेंध लगा पाएंगे? केरल, पुडुचेरी और असम के लिए क्या नतीजे होंगे? हम सर्वे से जुड़े ऐसे आंकड़े पेश करने की कोशिश करेंगे, जिनसे यह संकेत मिल सके कि पांच राज्यों की 824 विधानसभा सीटों पर 17 करोड़ वोटरों की हफ़्तों तक चली वोटिंग प्रक्रिया से क्या उम्मीद की जा सकती है.
एग्जिट पोल के शुरुआती अनुमान 4 मई को होने वाली आधिकारिक गिनती से पहले ही इस बात का एक मोटा-मोटा अंदाज़ा दे देते हैं कि अलग-अलग पार्टियां कैसा प्रदर्शन कर सकती हैं.
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इस डेटा में सबसे खास बात कांग्रेस+ का ग्रामीण इलाकों में +7 का स्विंग है, जो इस गठबंधन के लिए किसी भी भौगोलिक क्षेत्र में सबसे बड़ी बढ़त है. हालांकि, NDA के मुक़ाबले अंतर को पाटने के लिए यह काफ़ी नहीं है. 'अन्य' पार्टियों के वोट ग्रामीण (-8) और शहरी (-7) दोनों ही इलाकों में कम हो रहे हैं, जिससे यह संकेत मिलता है कि 2021 की तुलना में उनका समर्थन अब दो मुख्य गठबंधनों की तरफ़ मज़बूत हो रहा है.
जाति के हिसाब से मिले डेटा से पता चलता है कि वोटर बहुत ज़्यादा बंटे हुए हैं. NDA जनरल (73%, +5), SC (71%, +3) और OBC (64%, +1) वोटरों में सबसे आगे है. वहीं, CONG+ मुस्लिम वोटरों में 78% वोटों के साथ सबसे आगे है - जो 2021 के मुकाबले +12 की ज़बरदस्त बढ़त है. ST वोटरों में, NDA 56% (+3) के साथ सबसे आगे है, जबकि CONG+ को 20% वोट मिले हैं. बाकी सभी पार्टियां करीब हर कैटेगरी में अपनी पकड़ खो रही हैं और उनके वोटों में -5 से -9 तक की गिरावट आई है.
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भौगोलिक आधार पर देखें तो NDA सभी वर्गों में आगे है; इसे ग्रामीण इलाकों में 47 प्रतिशत और शहरी क्षेत्रों में 52 प्रतिशत वोट मिले हैं. कांग्रेस+ गठबंधन ग्रामीण क्षेत्रों में 39 प्रतिशत और शहरी क्षेत्रों में 34 प्रतिशत वोटों के साथ पीछे है. एग्जिट पोल के आंकड़ों से सामने आ रहे रुझानों से पता चलता है कि NDA का दोनों ही तरह के मतदाताओं के बीच दबदबा कायम है.
Axis My India के असम के लिए एग्जिट पोल में NDA को 48 प्रतिशत वोट शेयर के साथ मज़बूत स्थिति में दिखाया गया है, जो कांग्रेस के नेतृत्व वाले गठबंधन (38 प्रतिशत) से काफ़ी आगे है, जबकि अन्य को 14 प्रतिशत वोट मिले हैं. ये आंकड़े राज्य में सत्ताधारी गठबंधन के लिए साफ़ बढ़त का संकेत देते हैं.
उम्र के हिसाब से किए गए विश्लेषण से पता चलता है कि युवा वोटरों में एक साफ़ रुझान देखने को मिल रहा है. 18–29 साल की उम्र के वर्ग में TVK+ सबसे आगे है, और पहली बार वोट डालने वालों में इसे 50 प्रतिशत से ज़्यादा वोट मिले हैं. वहीं दूसरी तरफ, जैसे-जैसे उम्र बढ़ती है, NDA का दबदबा भी बढ़ता जाता है; 40 साल और उससे ज़्यादा उम्र के वोटरों में NDA आराम से बढ़त बनाए हुए है. खासकर 60 साल से ज़्यादा उम्र के वर्ग में इसे 52 प्रतिशत का मज़बूत समर्थन मिला है, जो इस बात को दर्शाता है कि अलग-अलग उम्र के लोगों का जनादेश भी अलग-अलग है.
पुडुचेरी के लिए Axis My India के एग्जिट पोल के अनुमान के मुताबिक, NDA लगभग 40 प्रतिशत वोट शेयर के साथ सबसे आगे है, जिसके बाद कांग्रेस-DMK गठबंधन 30 प्रतिशत के साथ दूसरे स्थान पर है. TVK+ को 17 प्रतिशत वोट मिलने का अनुमान है, जबकि अन्य को 13 प्रतिशत वोट मिलने की संभावना है; ये आंकड़े दिखाते हैं कि कुल वोट शेयर में सत्ताधारी गठबंधन को स्पष्ट बढ़त हासिल है.
पुदुचेरी विधानसभा चुनाव 2026 एग्जिट पोल के आंकड़े यहां चेक करें
Axis My India के एग्जिट पोल में असम में BJP के नेतृत्व वाले गठबंधन की ज़बरदस्त जीत का अनुमान लगाया गया है. इसके मुताबिक, 126 सदस्यों वाली विधानसभा में गठबंधन को 88 से 100 सीटें मिल सकती हैं।. यह अनुमान NDA के लिए एक आरामदायक बहुमत का संकेत देता है, जिससे ज़्यादा मतदान वाले इस चुनाव के बाद राज्य में उसकी स्थिति और मज़बूत होती दिख रही है.
इसी अनुमान के अनुसार, कांग्रेस को 24 से 36 सीटें मिलने की उम्मीद है. यह उसे दूसरे स्थान पर काफी पीछे दिखाता है, क्योंकि शुरुआती रुझान सत्ताधारी गठबंधन के पक्ष में एक निर्णायक जनादेश की ओर इशारा कर रहे हैं.
तमिलनाडु में दांव पर बहुत कुछ लगा है. सत्ताधारी DMK लगातार दूसरी बार सत्ता में आने की कोशिश कर रही है, जबकि राज्य का राजनीतिक माहौल सत्ता-विरोधी दावों और भ्रष्टाचार के आरोपों से काफी गरमाया हुआ है. इस मुकाबले पर सबकी पैनी नज़र है, क्योंकि 234 सीटों पर हुए एक ही चरण के चुनाव में मतदाता पहले ही अपने वोट डाल चुके हैं.
पश्चिम बंगाल में मतदान खत्म होने के बाद आने वाले एग्जिट पोल के अनुमानों से, DMK, AIADMK और TVK के बीच चल रही इस ज़ोरदार चुनावी जंग के रुझानों का पहला संकेत मिलने की उम्मीद है. ये अनुमान वोटों की गिनती के दिन से पहले ही माहौल तय कर देंगे.
चुनाव आयोग के आंकड़ों के मुताबिक, पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनावों के दूसरे चरण में शाम 5 बजे तक 89.99 प्रतिशत का ज़ोरदार मतदान दर्ज किया गया. यह आंकड़ा शाम को आने वाले एग्जिट पोल के अनुमानों से पहले मतदाताओं की ज़बरदस्त भागीदारी का संकेत देता है. पहले चरण में रिकॉर्ड 91.78 प्रतिशत मतदान के बाद दूसरे चरण में भी इतना ज़्यादा मतदान हुआ है, जिससे सभी निर्वाचन क्षेत्रों में राजनीतिक दांव ऊंचे बने हुए हैं.
पूर्वी बर्दवान में सबसे ज़्यादा 92.46 फीसदी मतदान हुआ, जिसके बाद हुगली (90.34 प्रतिशत), नदिया (90.28 प्रतिशत) और हावड़ा (89.44 प्रतिशत) का नंबर रहा. वहीं, उत्तरी और दक्षिणी 24 परगना दोनों ज़िलों में भी ज़ोरदार मतदान देखने को मिला.
पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव 2026 एग्जिट पोल के आंकड़े यहां चेक करें
एग्जिट पोल उन सर्वे पर आधारित होते हैं, जो वोटरों के पोलिंग बूथ से बाहर निकलते ही तुरंत किए जाते हैं. इनका मकसद वोटरों की पसंद और उनके कुल मिजाज को जानना होता है. ये अनुमान अलग-अलग इलाकों और लोगों के समूहों (डेमोग्राफिक्स) में दिखे रुझानों का विश्लेषण करके चुनाव के संभावित नतीजों का शुरुआती संकेत देते हैं.
लेकिन, एग्जिट पोल हमेशा सही नहीं होते. सैंपलिंग, वोटरों के जवाब और सर्वे के तरीकों में अंतर की वजह से पूर्वानुमान गलत हो सकते हैं. इसलिए, आधिकारिक नतीजे आने से पहले इन्हें पक्के नतीजों के बजाय सिर्फ एक संकेत ही माना जाना चाहिए.
एग्जिट पोल, वोटिंग केंद्रों के बाहर व्यवस्थित फील्ड सर्वे के ज़रिए किए जाते हैं, जहां प्रशिक्षित टीमें तयशुदा सवालों की मदद से लोगों की राय इकट्ठा करती हैं. सैंपलिंग इस तरह से डिज़ाइन की जाती है कि इसमें शहरी और ग्रामीण, दोनों तरह के वोटर शामिल हों, जिससे सभी का सही प्रतिनिधित्व हो सके. इकट्ठा किए गए डेटा का फिर विश्लेषण किया जाता है, जिससे सीटों की संख्या और वोटिंग के रुझानों का अनुमान लगाया जा सके. यही हर एजेंसी के अनुमानों का आधार बनता है.
जैसे-जैसे कई एजेंसियां अपने नतीजे जारी कर रही हैं, इन सभी का मिला-जुला "पोल ऑफ़ पोल्स" (polls of polls) पश्चिम बंगाल, तमिलनाडु, केरल, असम और पुडुचेरी में संभावित नतीजों की एक मिली-जुली तस्वीर पेश करने में मदद करेगा. ये मिले-जुले अनुमान अक्सर अलग-अलग एजेंसियों के नतीजों में दिखने वाले अंतर को कम कर देते हैं, हालांकि अंतिम नतीजा 4 मई को वोटों की गिनती होने के बाद ही पक्का हो पाएगा.
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने बुधवार को पश्चिम बंगाल में चल रहे विधानसभा चुनावों के दूसरे चरण में भारी मतदान के लिए मतदाताओं का धन्यवाद किया और इसे एक सक्रिय और जागरूक मतदाता वर्ग का संकेत बताया. हरदोई में एक रैली को संबोधित करते हुए, उन्होंने लोगों से मतदान खत्म होने तक बड़ी संख्या में वोट डालते रहने की अपील की.
उन्होंने लंबी कतारों की रिपोर्टों और सोशल मीडिया पर दिख रहे दृश्यों का ज़िक्र करते हुए कहा कि लोगों की भागीदारी का यह स्तर पूरे राज्य में चल रहे "लोकतंत्र के उत्सव" को दर्शाता है.
जैसे-जैसे कई एग्जिट पोल जारी होंगे, इकट्ठा किया गया "पोल ऑफ़ पोल्स" डेटा पश्चिम बंगाल, तमिलनाडु, असम, केरल और पुडुचेरी में संभावित नतीजों का एक व्यापक नज़रिया देगा. हालांकि, एक्सपर्ट्स इस बात पर ज़ोर देते हैं कि ये अनुमान सिर्फ़ संकेत मात्र हैं और अक्सर अलग-अलग एजेंसियों के बीच इनमें फ़र्क होता है. आखिरी तस्वीर वोटों की गिनती के बाद ही सामने आएगी, इसलिए शुरुआती रुझानों की व्याख्या करते समय सावधानी बरतना ज़रूरी है.
पुडुचेरी में 89.87 फीसदी का शानदार मतदान दर्ज किया गया, जो 1964 के बाद से सबसे ज़्यादा है. यह चुनावी भागीदारी में एक बड़ी बढ़ोतरी को दिखाता है. मतदान के इस मज़बूत रुझान को केंद्र शासित प्रदेश में बढ़ी हुई राजनीतिक सक्रियता का एक अहम संकेत माना जा रहा है. अब एग्जिट पोल इस भागीदारी को सीटों के अनुमानित नतीजों में बदलने की कोशिश करेंगे. हालांकि, अंतिम नतीजे अभी आने बाकी हैं.
पुदुचेरी विधानसभा चुनाव 2026 एग्जिट पोल के आंकड़े यहां चेक करें
केरल में एक बार फिर मतदाताओं की ज़बरदस्त भागीदारी देखने को मिली, जिससे चुनावों में भारी संख्या में वोट डालने की उसकी पुरानी परंपरा बनी रही. 9 अप्रैल को हुई वोटिंग में सभी निर्वाचन क्षेत्रों में लोगों ने बढ़-चढ़कर हिस्सा लिया, जिससे पता चलता है कि चुनावी प्रक्रिया में लोगों की दिलचस्पी लगातार बनी हुई है. जहां एक तरफ़ अब एग्ज़िट पोल संभावित नतीजों का अनुमान लगाएंगे, वहीं विशेषज्ञ यह भी चेतावनी देते हैं कि केरल का जटिल राजनीतिक माहौल अक्सर ऐसे नतीजे देता है जो बेहद कड़े मुकाबले वाले और अप्रत्याशित होते हैं.
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तमिलनाडु की 234 सीटों पर करीब 82.24 फीसदी वोट पड़े और वोटिंग खत्म होने तक पोलिंग बूथों पर लोगों की लंबी कतारें लगी रहीं. एक ही चरण में हुए इस चुनाव में वोटरों ने लगातार उत्साह दिखाया और जानकारों का मानना है कि जिन सीटों पर मुकाबला कड़ा है, उनके नतीजे तय करने में यह बात अहम भूमिका निभा सकती है. एग्जिट पोल के अनुमानों से राज्य में चुनावी रुझानों का शुरुआती, लेकिन सावधानी भरा अंदाज़ा मिलने की उम्मीद है.
तमिलनाडु विधानसभा चुनाव 2026 एग्जिट पोल के आंकड़े यहां चेक करें
पश्चिम बंगाल में दोनों ही चरणों में मतदाताओं की ज़बरदस्त भागीदारी देखने को मिली है. पहले चरण में 90 फीसदी से ज़्यादा वोट पड़े, जबकि दूसरे चरण में दोपहर तक 60 प्रतिशत से ज़्यादा मतदान हो चुका था।. मतदान के इस ऊंचे रुझान को एक अहम कारक माना जा रहा है, जो कई कड़े मुकाबले वाली सीटों के नतीजों को प्रभावित कर सकता है. अब एग्जिट पोल के ज़रिए मतदाताओं के मिज़ाज का पहला सामूहिक संकेत मिलेगा.
पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव 2026 एग्जिट पोल के आंकड़े यहां चेक करें
असम में 2.5 करोड़ मतदाताओं में से 85.96 प्रतिशत ने मतदान किया, जो सभी निर्वाचन क्षेत्रों में मतदाताओं की मज़बूत भागीदारी को दर्शाता है. राजनीतिक विश्लेषक मतदाताओं की इस भारी भागीदारी पर बारीकी से नज़र रख रहे हैं, क्योंकि एक कड़े चुनावी मुकाबले में यह सीटों के नतीजों को प्रभावित कर सकती है. हालांकि, एग्जिट पोल के अनुमान अभी केवल अटकलें ही हैं, और अंतिम नतीजों की पुष्टि केवल मतगणना के दिन ही होगी.
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पश्चिम बंगाल, तमिलनाडु, असम, केरल और पुडुचेरी में विधानसभा चुनावों के लिए लंबे समय से इंतज़ार किए जा रहे एग्जिट पोल, अलग-अलग इलाकों में भारी मतदान के बाद मतदाताओं के मूड की पहली बड़ी तस्वीर पेश करने के लिए तैयार हैं. इन सूबों में वोटिंग के रुझान मतदाताओं की ज़बरदस्त भागीदारी का संकेत दे रहे हैं. वहीं एक्सपर्ट्स का ज़ोर देकर कहना है कि एग्जिट पोल सिर्फ़ एक संकेत होते हैं, अंतिम नतीजे नहीं और अब मतगणना के दिन ही इन सभी राज्यों में स्थिति पूरी तरह साफ़ हो पाएगी, जिन पर सबकी नज़रें टिकी हुई हैं.