उत्तर प्रदेश की सियासत और 'कैसरगंज के दबंग' कहे जाने वाले बीजेपी के पूर्व सांसद बृजभूषण शरण सिंह क्या राजनीतिक पाला बदलने जा रहे हैं. यह बात ऐसी ही नहीं उठी बल्कि बृजभूषण सिंह ने खुद ही कहा है कि अगर हम बोझ लगते हैं तो एक बार कह दो कि हमारी जरूरत नहीं है. बृजभूषण के इस बयान के बाद ही सवाल खड़े हो रहे हैं क्या बीजेपी में खुद को असहज कर रहे हैं, जिसके चलते ही सख्त रुख अपनाया?
सपा प्रमुख अखिलेश यादव के सियासी तेवर जिस तरह बृजभूषण सिंह को लेकर नरम हैं तो दूसरी तरफ बृजभूषण भी अखिलेश पर मेहरबान नजर आते हैं. बीजेपी में खुद को असहज मान रहे बृजभूषण सिंह सिंह क्या सपा की साइकिल पर सवार होने की तैयारी में तो नहीं है?
बृजभूषण शरण सिंह के सपा में आने के सवाल पर अखिलेश यादव ने बहुत सधे हुए अंदाज में जवाब दिया. बृजभूषण सिंह को अखिलेश यादव ने 'अपना नेता' और 'गोंडा का नेता' कहकर संबोधित किया. इसके बाद भी कयास लगाए जाने लगे, लेकिन बृजभूषण सिंह के लिए सियासी पाला बदलने का फैसला लेना आसान नहीं है?
बृजभूषण शरण सिंह ने दिखाया सियासी तेवर
बीजेपी के पूर्व सांसद बृजभूषण सिंह चार दिन पहले बिहार के भागलपुर में बाबू वीर कुंवर सिंह के विजय उत्सव कार्यक्रम में शामिल हुए थे. इस दौरान उन्होंने राजपूत समाज को राजनीति में नजरअंदाज करने का मुद्दा उठाया. किसी का नाम लिए बगैर बृजभूषण शरण सिंह ने कहा कि आज भले ही सरकार की नजरों में हमारा कोई अस्तित्व नहीं है और हम अनुपयोगी लगते हैं तो हमें बता दीजिए.
बृजभूषण सिंह ने कहा किअगर किसी को ऐसा लगता है कि हम भार बन चुके हैं तो बस एक बार कह दो कि हमारी जरूरत नहीं. 2027 में कह दो या 2029 में कह दो. जब भी मन करे आकर कह दो, हम दिखा देंगे कि हमारी उपयोगिता है या नहीं. उन्होंने कहा अब समय ज्यादा समझाने का नहीं रह गया है. ये समय अपनी ताकत पहचानने का है.
बीजेपी के पूर्व सांसद बृजभूषण सिंह ने कहा कि ये हमारी गलती है कि जब-जब हमें दबाया गया, हम मौन रहे, यही वजह है कि हमें तवज्जो नहीं दी जाती. ये हमारी कमी है कि हम अपने महापुरुषों को उचित स्थान नहीं दिलवा सके. बृजभूषण के इसी बयान को लेकर सियासी मायने निकाले जा रहे हैं?
बीजेपी में क्या बृजभूषण सिंह असहज हो रहे?
बृजभूषण शरण सिंह का बीजेपी के साथ सियासी रिश्ता दशकों पुराना है, लेकिन हाल के कुछ वर्षों में इस रिश्ते में दरारें साफ देखी गई हैं. महिला पहलवानों द्वारा लगाए गए यौन उत्पीड़न के आरोपों और उसके बाद हुए लंबे विवाद ने बीजेपी को डिफेंसिव मोड में ला खड़ा किया था. इसका नतीजा यह हुआ कि 2024 के लोकसभा चुनाव में भाजपा ने बृजभूषण शरण सिंह का टिकट काटकर उनके बेटे करण भूषण सिंह को चुनावी मैदान में उतारा था.
हालांकि,बृजभूषण सिंह बेटे ने जीत दर्ज सांसद बने, लेकिन बृजभूषण का खुद चुनाव न लड़ पाना और पार्टी के शीर्ष नेतृत्व की उनसे बनाई गई 'दूरी' ने उनके समर्थकों के बीच एक असंतोष पैदा कर दिया. बृजभूषण सिंह जैसे नेता, जो अपनी शर्तों पर राजनीति करने के लिए जाने जाते हैं, उनके लिए हाशिए पर रहना कभी भी सहज नहीं रहा है.
पिछले कुछ समय से बीजेपी में अपनी स्थिति को लेकर असहज नजर आ रहे हैं, क्योंकि उनका अपनी राजनीति करने का अपना तौर तरीका है. इसके अलावा उन्होंने 2029 के लोकसभा चुनाव लड़ने का ऐलान कर रखा, लेकिन बीजेपी उन्हें बहुत ज्यादा सियासी तवज्जे नहीं दे रही है. बीजेपी के कार्यक्रम में भी बृजभूषण नजर नहीं आ रहे, जिसके चलते इन दिनों क्षत्रीय समाज के कार्यक्रम में शामिल हो रहे हैं.
अखिलेश यादव पर मेहरबान बृजभूषण सिंह
बृजभूषण सिंह हाल ही में अखिलेश यादव की राजनीति की जमकर सराहना की. अखिलेश यादव दो दिन पहले बीजेपी विधायक अनुपमा जायसवाल के झुलसने पर उनसे मुलाकात करने अस्पताल पहुंचे थे, जिसे बृजभूषण ने बड़प्पन का परिचय बताया और अखिलेश को साधुवाद दिया. उन्होंने यहां तक कह दिया कि राजनीति में एक-दूसरे के सुख-दुख में शामिल होना एक अच्छी परंपरा है.
बृजभूषण शरण सिंह का सपा के राजनीतिक रिश्ते रहे हैं. बीजेपी में जब असहज थे तो उन्होंने पार्टी छोड़कर सपा में शामिल हो गए थे. 2009 से 2014 तक सपा के सांसद रहे हैं. 2014 के चुनाव में सपा छोड़कर बीजेपी में जरूर शामिल हो गए, लेकिन मुलायम परिवार के साथ अपने रिश्ते को बनाए रखा. अखिलेश यादव की आए दिन तारीफ करते रहते हैं.
अखिलेश यादव भी कभी बृजभूषण की सियासी अलोचना नहीं की है, जिसके चलते बृजभूषण सिंह भी सियासी केंमिस्ट्री सपा प्रमुख से साथ बनाए हुए हैं. बृजभूषण ने बिहार में कह दिया है कि अगर हम बोझ हैं तो बता दिया जाए. एक तरह से उन्होंने बीजेपी को इशारों-इशारों में संदेश दे दिया है कि उन्हें नजर अंदाज करने की गलती न करे, नहीं महंगा पड़ जाएगा?
बृजभूषण सिंह पर अखिलेश यादव मेहरबान
बृजभूषण शरण सिंह के भाजपा छोड़ समाजवादी पार्टी में शामिल होने की खबरें चर्चा है. अखिलेश यादव गुरुवार को हरदोई में थे. इस दौरान पत्रकारों ने उनसे सवाल किया कि क्या बृजभूषण सिंह सपा में आ रहे हैं? इसका जवाब सपा प्रमुख ने बहुत ही सधे अंदाज में दिया. बीजेपी में पीडीए नेता (पिछड़ा, दलित, अल्पसंख्यक) के लोग पार्टी छोड़ना चाहते हैं, वो पीड़ित हैं, दुखी हैं, अपमानित महसूस कर रहे हैं. वहां से निकलना चाहते हैं. जहां तक पूर्व सांसद और हमारे साथ रहे गोंडा के नेता का सवाल है तो राजनीति में क्या मोड़ आता है, यह वही बेहतर बता सकेंगे.
अखिलेश यादव ने बृजभूषण का जिक्र करते हुए उन्हें 'हमारे साथ रहे गोंडा के नेता' बताया और कहा कि राजनीति में क्या मोड़ आता है यह वही बेहतर बता सकेंगे. इसके साथ ही उन्होंने बड़ा सियासी दांव चला है. राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि अखिलेश यादव जानते हैं कि बृजभूषण का दबदबा सिर्फ एक सीट तक सीमित नहीं है, बल्कि गोंडा, बहराइच, श्रावस्ती और अयोध्या के कुछ हिस्सों में उनकी जबरदस्त पकड़ है.
बृजभूषण सिंह का बीजेपी छोड़ना आसान नहीं?
बृजभूषण सिंह भले ही बीजेपी में असहज हों, लेकिन बीजेपी छोड़ने फैसला लेना आसान नहीं है. राजनीतिक दबाव और पारिवारिक महत्वाकांक्षाएं इस स्थिति को जटिल बना रही हैं. उनके दोनों बेटे भाजपा के विधायक और सांसद हैं, और बेटी भी राजनीति में सक्रिय हैं. बेटी बीजेपी से चुनाव लड़ने की तैयारी में है. वहीं, भाजपा इतनी आसानी से अपने एक कद्दावर नेता को विपक्षी खेमे में नहीं जाने देगी, क्योंकि शीर्ष नेतृत्व के साथ उनके रिश्ते भी अच्छे हैं.
क्या बृजभूषण सिंह भाजपा के 'अनुशासन' में बंधे रहेंगे या अपने स्वाभिमान और राजनीतिक भविष्य के लिए 'साइकिल' पर सवार होंगे? इसका फैसला आने वाले समय में विधानसभा के 2027 चुनाव में पता चलेगा. लेकिन इतना तय है कि यदि ऐसा होता है, तो यह उत्तर प्रदेश की राजनीति का सबसे बड़ा उलटफेर साबित होगा. सियासी हलकों में एक बात मशहूर है कि बृजभूषण जिधर चलते हैं, उधर एक बड़ा काफिला चलता है.ट अब यह काफिला भगवा झंडे के नीचे रहेगा या लाल टोपी पहनेगा, यह वक्त की गर्त में है.
कुमार अभिषेक / कुबूल अहमद