Beat Report: मतगणना में ऐसे होती है अफसरों की नियुक्ति, जानें 'काउंटिंग टेबल' का पूरा सिस्टम

काउंटिंग टेबल पर कौन बैठता है और उसकी नियुक्ति कैसे होती है, यह सवाल कई बार विवादों में रहा है. इस बार मामला सुप्रीम कोर्ट तक पहुंच चुका है. निर्वाचन आयोग के मैन्युअल में इसके लिए सख्त नियम तय हैं. हर टेबल पर तय टीम, पहचान की पुख्ता व्यवस्था और सुरक्षा के कई स्तर लागू किए जाते हैं.

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चुनाव के बाद मतगणना में अफसरों की न्युक्ति को लेकर कई बार विवाद सामने आया है. (Photo: ITG) चुनाव के बाद मतगणना में अफसरों की न्युक्ति को लेकर कई बार विवाद सामने आया है. (Photo: ITG)

संजय शर्मा

  • नई दिल्ली,
  • 02 मई 2026,
  • अपडेटेड 8:58 PM IST

मतगणना के दौरान काउंटिंग टेबल पर बैठने वाले अधिकारियों को लेकर अक्सर सवाल उठते रहे हैं. यह मुद्दा इतना संवेदनशील रहा है कि इसका विवाद सुप्रीम कोर्ट तक पहुंच चुका है. ऐसे में यह जानना जरूरी हो जाता है कि निर्वाचन आयोग के मैन्युअल और हैंडबुक में काउंटिंग टेबल की व्यवस्था को लेकर क्या नियम तय किए गए हैं.

जिन ईवीएम में वोटों की गिनती होनी होती है, उनके लिए प्रत्येक विधानसभा क्षेत्र में एक रिटर्निंग ऑफिसर की नियुक्ति की जाती है. काउंटिंग टेबल पर एक टीम के रूप में कुल चार लोग तैनात होते हैं. इसमें एक मतगणना ऑब्जर्वर और एक अतिरिक्त ऑब्जर्वर शामिल होता है. इनमें से कम से कम एक केंद्र सरकार का कर्मचारी होता है.

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इसके अलावा टीम में एक माइक्रो ऑब्जर्वर होता है और चौथा सदस्य चतुर्थ श्रेणी का कर्मचारी यानी मल्टी टास्किंग स्टाफ (MTS) होता है. इस कर्मचारी का काम मशीनों, दस्तावेजों को उठाना-रखना और अधिकारियों के निर्देशों के अनुसार सहयोग करना होता है. काउंटिंग टेबल के साथ सुरक्षा घेरे वाली जाली बनी हुई होती है.

उनके बाहर सभी उम्मीदवारों के अधिकृत एजेंट मौजूद रहते हैं, जो पूरी प्रक्रिया पर नजर रखते हैं. टीम में एक मतगणना पर्यवेक्षक होता है, जो राजपत्रित श्रेणी का अधिकारी या उसके समकक्ष होता है. इसके साथ एक अतिरिक्त पर्यवेक्षक यानी गणना सहायक होता है, जिसकी योग्यता समूह बी अधिकारी के बराबर होनी चाहिए. 

इन अधिकारियों का चयन पोलिंग अधिकारियों के पूल से औचक यानी रैंडम आधार पर किया जाता है. यह पहले से तय नहीं होता कि किसे किस विधानसभा के किस काउंटिंग टेबल पर ड्यूटी मिलेगी. इन सभी अधिकारियों के फोटो और QR कोड युक्त पहचान पत्र बनाए जाते हैं. काउंटिंग सेंटर में तीन स्तरीय सुरक्षा व्यवस्था लागू होती है. 

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हर सुरक्षा चक्र पर QR कोड की स्कैनिंग के साथ-साथ मैन्युअल जांच और तलाशी भी की जाती है. मतगणना कर्मचारियों की नियुक्ति निर्धारित प्रपत्र यानी अनुलग्नक-35 के अनुसार की जाती है. मतगणना पर्यवेक्षक आमतौर पर समूह बी या उससे ऊपर के राजपत्रित अधिकारी होते हैं. वहीं गणना सहायक समूह बी या सी अधिकारी के होते हैं.

कई बार सरकारी उपक्रमों के समकक्ष स्तर के अधिकारी को भी तैनात कर दिया जाता है. काउंटिंग सेंटर के भीतर मोबाइल फोन ले जाने पर पूरी तरह रोक होती है. रिटर्निंग ऑफिसर की यह पूरी तरह से जिम्मेदारी होती है कि मतगणना टेबल तक कोई भी व्यक्ति अधिकृत अधिकारियों के अलावा मोबाइल फोन लेकर न पहुंच पाए. 

मतगणना शुरू होने से पहले टीम के सभी सदस्यों की पहचान ऐप में मौजूद डाटाबेस और उनके पहचान पत्र के आधार पर सत्यापित की जाती है. इसकी लिखित पुष्टि भी जरूरी होती है. मतगणना के दौरान तैनात अधिकारी, कर्मचारी और उम्मीदवारों के एजेंट काउंटिंग स्थल को नहीं छोड़ सकते. केवल इमरजेंसी में ही जाने की अनुमति होती है.

कुल मिलाकर, मतगणना की प्रक्रिया को पूरी तरह पारदर्शी और सुरक्षित बनाने के लिए निर्वाचन आयोग ने काउंटिंग टेबल से लेकर काउंटिंग सेंटर तक सख्त और बहुस्तरीय व्यवस्था लागू की है.

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