बाओखुंगरी एक नया बना सामान्य (अनारक्षित) विधानसभा क्षेत्र है, जो असम के बोडोलैंड टेरिटोरियल काउंसिल (BTC) क्षेत्र के कोकराझार जिले में स्थित है. यह कोकराझार लोकसभा क्षेत्र के नौ हिस्सों में से एक है. यह सीट 2023 के परिसीमन आयोग के काम के दौरान बनाई गई थी, जब पहले के कोकराझार पूर्व, कोकराझार पश्चिम और गोसाईगांव विधानसभा क्षेत्रों को पांच नई
सीटों में बांटा गया था. बाओखुंगरी मुख्य रूप से बाओखुंगरी पहाड़ी इलाके और आस-पास के आदिवासी गांवों को कवर करता है, जो पहले कोकराझार पूर्व और पश्चिम विधानसभा क्षेत्रों के बीच बँटे हुए थे.
एक बिल्कुल नए विधानसभा क्षेत्र के तौर पर, बाओखुंगरी का विधानसभा चुनावों का कोई पिछला इतिहास नहीं है. अब तक मतदाताओं की पसंद का एकमात्र संकेत 2024 के लोकसभा चुनावों से मिलता है. बाओखुंगरी क्षेत्र में, यूनाइटेड पीपुल्स पार्टी लिबरल (UPPL), जो उस समय BJP के नेतृत्व वाले NDA का हिस्सा थी, ने बोडोलैंड पीपुल्स फ्रंट (BPF) पर 6,355 वोटों की बढ़त बनाई. UPPL के जॉयंता बासुमतारी को 55,015 वोट मिले, जबकि BPF के काम्पा बोरगोयारी को 48,660 वोट मिले. वहीं कांग्रेस के गरजन मुशाहारी 12,665 वोटों के साथ तीसरे स्थान पर रहे. मतदान प्रतिशत काफी ज़्यादा, यानी 85.96 प्रतिशत रहा.
2026 के विधानसभा चुनावों के लिए बाओखुंगरी की अंतिम मतदाता सूची में 164,314 योग्य मतदाता थे, जो 2024 में 161,007 मतदाताओं से ज्यादा थे.
उपलब्ध आंकड़ों के आधार पर जनसांख्यिकी, जो मुख्य रूप से 2011 की जनगणना के अनुपात पर आधारित है और जिसे क्षेत्र तथा 2023 के परिसीमन परिवर्तनों के हिसाब से समायोजित किया गया है, यह दर्शाती है कि यहाँ अनुसूचित जनजातियों (मुख्य रूप से बोडो समुदाय) की मजबूत उपस्थिति है, साथ ही अन्य मूल निवासी समूह और छोटी गैर-आदिवासी आबादी भी यहां रहती है. इस विधानसभा क्षेत्र में बोडो आदिवासी गांवों और कृषि-प्रधान समुदायों का मिश्रण देखने को मिलता है, जो बोडोलैंड क्षेत्र की एक विशिष्ट पहचान है.
बाओखुंगरी विधानसभा क्षेत्र निचले असम के कोकराझार जिले के कुछ हिस्सों को कवर करता है. इस क्षेत्र में ऊबड़-खाबड़ पहाड़ी इलाके, निचले पठार और संकरी घाटियां हैं, जो कारबी-बोडोलैंड के भू-भाग का हिस्सा हैं. यहां का इलाका झूम खेती, घाटियों में धान की स्थिर खेती, बागवानी और जंगल से जुड़ी गतिविधियों के लिए अनुकूल है, लेकिन यहां कभी-कभी भूस्खलन और गौरंग, चंपावती और सरलभंगा जैसी नदियों से मौसमी बाढ़ का खतरा बना रहता है. बाओखुंगरी में लोगों की आजीविका मुख्य रूप से खेती (धान, सब्जियां और एरी रेशम), जंगल से मिलने वाले छोटे-मोटे उत्पादों को इकट्ठा करने, छोटे-मोटे व्यापार और BTC क्षेत्र में सरकारी नौकरी पर निर्भर है. घाटियों की उपजाऊ मिट्टी और भरपूर बारिश इन गतिविधियों को बनाए रखने में मदद करती है. बुनियादी सुविधाओं में राज्य राजमार्गों और जिला सड़कों के जरिए आस-पास के इलाकों से सड़क संपर्क शामिल है, लेकिन इस इलाके में रेल संपर्क उपलब्ध नहीं है. सबसे नजदीकी रेलवे स्टेशन कोकराझार में है, जो गांव के हिसाब से लगभग 30-40 km दूर है. गांवों में बुनियादी सुविधाएं उपलब्ध हैं, और बोडोलैंड टेरिटोरियल काउंसिल के तहत ग्रामीण सड़कों, सिंचाई और आदिवासी कल्याण योजनाओं में लगातार सुधार हो रहा है.
सबसे नजदीकी बड़ा शहर कोकराझार है, जो जिले और BTC का मुख्यालय है और लगभग 30-40 km दूर है. आस-पास के अन्य शहरों में पश्चिम में गोसाईगांव (लगभग 25-35 km दूर) और पूर्व में बोंगाईगांव (लगभग 50-60 km दूर) शामिल हैं. राज्य की राजधानी, दिसपुर, लगभग 200-220 km पूर्व में स्थित है. यह निर्वाचन क्षेत्र उत्तर में भूटान के साथ अंतर्राष्ट्रीय सीमा के करीब स्थित है. कुछ हिस्सों में तलहटी की दूरी लगभग 20 से 40 km है, जिसका असर कभी-कभी होने वाले व्यापार और आपसी मेलजोल पर पड़ता है.
2024 के बाद से बाओखुंगरी का चुनावी परिदृश्य बदल गया है, जिसका मुख्य कारण UPPL का BJP के नेतृत्व वाले 'नॉर्थ-ईस्ट डेमोक्रेटिक अलायंस' से बाहर निकलने का फैसला और BPF का इस गठबंधन में शामिल होना है. इसका मतलब है कि BJP और AGP का समर्थन, जो 2024 में UPPL के साथ था, अब BPF के साथ होगा.
बाओखुंगरी निर्वाचन क्षेत्र में एक बहुकोणीय मुकाबला होने की उम्मीद है, जिसमें 11 उम्मीदवार मैदान में हैं. जहां UPPL ने प्रतिभा ब्रह्मा को अपना उम्मीदवार बनाया है, वहीं उनका मुकाबला BPF के रूपम चंद्र रॉय से होगा, जो सत्ताधारी गठबंधन के उम्मीदवार के तौर पर चुनाव लड़ रहे हैं. कांग्रेस पार्टी की सपाली मारक भी विपक्ष के कांग्रेस-नीत 'असम सोनमिलितो मोर्चा' की उम्मीदवार के तौर पर चुनावी मैदान में हैं. उदंगश्री नजरे तृणमूल कांग्रेस की ओर से, राजकर बेक गोंडवाना गणतंत्र पार्टी (GPP) की ओर से, और शिबम चक्रवर्ती भारतीय गण परिषद (BGP) के उम्मीदवार के तौर पर चुनाव लड़ रहे हैं. इनके अलावा, छह निर्दलीय उम्मीदवार भी मैदान में हैं. हालांकि, मुख्य मुकाबला दो स्थानीय पार्टियों, UPPL और BPF के बीच होने की उम्मीद है. यह एक बेहद कड़ा और करीबी मुकाबला होने का वादा करता है, जिसका नतीजा किसी भी तरफ जा सकता है.
(अजय झा)