ऐसी शख्सियत जो नहीं आना चाहते थे राजनीति में, बने देश के सबसे युवा PM

राजीव गांधी देश के सबसे नौजवान प्रधानमंत्री थे. मजबूरी और हालात के चलते वो राजनीति में आए, उन्हें राजनीति आती नहीं थी. लेकिन उन्होंने हिंदुस्तान को दिखाई थी तरक्की की राह. जानें उनके बारे में.

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Rajiv Gandhi Rajiv Gandhi

वंदना भारती

  • नई दिल्ली,
  • 20 अगस्त 2017,
  • अपडेटेड 9:43 AM IST

राजीव गांधी देश के सबसे नौजवान प्रधानमंत्री थे. मजबूरी और हालात के चलते वो राजनीति में आए, उन्हें राजनीति आती नहीं थी. लेकिन उन्होंने हिंदुस्तान को दिखाई थी तरक्की की राह. देश के सातवें और भारतीय इतिहास में सबसे कम उम्र के प्रधानमंत्री रहे राजीव गांधी का जन्म 20 अगस्त 1944 को हुआ था. साल 1984 में इंदिरा गांधी की हत्या के बाद वह भारी बहुमत के साथ प्रधानमंत्री बने.

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जानें उनकी जिंदगी से जुड़ी बातें

राजीव गांधी का जन्म 20 अगस्त 1944 को मुंबई में हुआ था. उन्होंने कैम्ब्रिज के ट्रिनिटी कॉलेज और लंदन के इम्पीरियल कॉलेज से उच्च शिक्षा हासिल की थी.

राजीव गांधी की राजनीति में कोई रूचि नहीं थी और वो एक एयरलाइन पाइलट की नौकरी करते थे और उसी में खुश थे. लेकिन आपातकाल के उपरान्त जब इन्दिरा गांधी को सत्ता छोड़नी पड़ी थी. वहीं साल 1980 में छोटे भाई संजय गांधी की हवाई जहाज दुर्घटना में मृत्यु हो जाने के बाद माता इंदिरा का सहयोग देने के लिए उन्होंने राजनीति में प्रवेश कर लिया.

वह अमेठी से लोकसभा का चुनाव जीत कर सांसद बने और 31 अक्टूबर1984 को सिख आतंकवादियों द्वारा प्रधानमंत्री इन्दिरा गांधी की हत्या किए जाने के बाद भारत के प्रधानमंत्री बने और अगले आम चुनावों में सबसे अधिक बहुमत पाकर प्रधानमंत्री बने रहे.

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आपको बतादें साल 1966 में ब्रिटेन से प्रोफेशनल पायलट बनकर लौटे. वे दिल्ली-जयपुर-आगरा रूट पर विमान उड़ाते थे. जब वे प्रधानमंत्री बने तब उनकी उम्र 40 साल 72 दिन थी.

MTNL, VSNL और PCO उनके कार्यकाल की ही देन हैं. देश ने टेलीकॉम क्रांति भी उनके दौर में ही देखी.

राजीव गांधी की शादी सोनिया गांधी से हुई. कहा जाता है कि राजीव गांधी से उनकी मुलाकात तब हुई जब राजीव कैम्ब्रिज में पढने गये थे.

साल 1968 में राजीव गांधी और सोनिया ने शादी कर ली है. उनके दो बच्चे हैं पुत्र राहुल गांधी और पुत्री प्रियंका गांधी.

राजीव गांधी खेल रत्न भारत में दिया जाने वाला सबसे बड़ा खेल पुरस्कार है.

राजीव गांधी साल 1991 में चुनाव प्रचार के दौरान श्रीपेरुमबुदुर में लिट्टे के आत्मघाती हमले का शिकार हुए थे. धानु नाम की महिला हमलावर ने राजीव गांधी के पैर छूने के बाद खुद को बम से उड़ा लिया था. इस हमले में राजीव गांधी के अलावा 14 और लोगों की जान चली गई थी.

 

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