क्या आपने कभी किसी अद्भुत डरावनी चीज़ को अपने करीब आते देखा है? शायद नहीं....
पूरे संसार में हजारों की संख्या में ज्वालामुखी हैं और इनमें से लगभग 500 ज्वालामुखी ऐसे हैं जो कभी भी फूट सकते हैं. धरती के अंदर पिघली हुई चट्टानों के कोष को मैग्मा कहा गया है. यही मैग्मा गैस से मिलने के बाद कमजोर भूमि पाकर ऊपर आने के लिए दौड़ पड़ता है. तेजी से आने के कारण जोर से विस्फोट होता है और धरती को कांप उठती है. वहाँ की चट्टानें टूट-टूट कर चारों ओर बिखर जाती है और जो पदार्थ फूट कर बाहर निकलता है उसे लावा कहा जाता है.
ज्वालामुखी से निकलने वाला गर्म लावा आस-पास के वातावरण को नुकसान पहुंचाता है. इसके साथ निकली जहरीली गैस,राख चट्टान, पहाड़, पेड़-पौधों के साथ-साथ वहां रहने वाले छोटे-छोटे जीवों की जिंदगी भी प्रभावित करता है. इससे निकला द्रवित लावा कृषि भूमि तक को श्मशान बना देता है. ज्वालामुखी का लावा एक सेकेंड में कई मीटर की तेजी से चलता है.
ज्वालामुखी विस्फोट होने पर तापमान 2200 डिग्री फॉरेनहाइट या 1200 सेल्सियस से भी ऊपर पहुंच जाता है. इन भौगोलिक संरचनाओं के आस-पास सभी जगहों पर जीवन बिल्कुल असंभव नजर आता है. हालांकि पुराने जमाने में लोगों के अलग-अलग विश्वास थे.
पहले लोग मानते थे कि इन खतरनाक ज्वालामुखियों के अंदर भगवान रहते हैं लेकिन बाद में वैज्ञानिकों ने इस रहस्य से पर्दा उठाने में कामयाबी पायी.
आखिर कौन हैं वे जिन्होंने धधकती हुई ज्वालामुखियों के तले अपना घर बनाया हुआ है और जिन्हें अघोषित मौत का भी कोई डर नहीं है...
वैज्ञानिक काफी रिसर्च के बाद यह जान पाए हैं कि इस धधकते ज्वालामुखी के रहस्यमयी निवासी कौन हैं. IFL साइंस की रिपोर्ट के मुताबिक , 1980 के आसपास वैज्ञानिकों ने ज्वालामुखी में रहने वाले बैक्टीरिया का पता लगाया जो जल के क्वथनांक (बॉयलिंग पाइंट) के ऊपर के तापमान पर भी रह सकते हैं. लेकिन वैज्ञानिकों की रिसर्च में और भी बहुत से चौंकाने वाले खुलासे हुए.
यह खोज काफी हैरान करने वाली थी क्योंकि इससे पहले डीएनए की संरचना के 176 डिग्री फॉरेनहाइट या 80 सेल्सियम से बहुत कम तापमान पर ही नष्ट हो जाने की बात कही गई थी.
लेकिन ये बैक्टीरिया ना केवल इस झुलसाने वाले तापमान के बीच अपना अस्तित्व बनाए हुए थे बल्कि आश्चर्यजनक तौर पर ठंडे पानी में ले जाए जाने पर इनकी मौत हो गई.
महासागरीय तल पर जल के भीतर मौजूद छोटे-छोटे ज्वालामुखी जैव-विविधता के मामले में भी समृद्ध साबित हुए. इन ज्वालामुखियों के आसपास का तापमान डीएनए को नष्ट करने लायक तापमान से बहुत ज्यादा है.
इसके अलावा गहरे समुद्री जल के भीतर दबाव भी बहुत ज्यादा होता और इस पानी में अनेक खतरनाक धातुएं, जहरीली हाइड्रोजन सल्फाइड और अन्य विषैली गैसें
घुली हुई हैं.
इन सबके बावजूद 400 अलग-अलग तरह की प्रजातियां इन इलाकों को अपना घर बनाए हुए हैं. इसमें केकड़े, सी स्नेक और अन्य तरह के जीव भी पाए गए. हैरान करने वाली बातें यहीं पर खत्म नहीं होती हैं.
प्रशांत महासागर के ज्वालामुखी की सतह से 45 मीटर गहराई तक वैज्ञानिकों ने रिसर्च की. नैशनल जियोग्रैफिक फील्ड रिसर्च ने जब
कवागी ज्वालामुखी के आस-पास के इलाकों का सर्वे किया तो वहां मछलियां और
जेलीफिश जैसे जीव भी पाए गए जिसने वैज्ञानिकों को भी हैरत में डाल दिया.
कैसे ये जीव इतनी जटिल और विषम परिस्थितियों में इतनी आसानी से खतरनाक अम्लीय पानी में तैरते हुए दिखाई दे सकते हैं?
यहां बैक्टीरिया का होना तो फिर भी उतना चौंकाने वाला नहीं है लेकिन शार्क जैसे जटिल संरचना वाले जीवों का अस्तित्व जरूर एक अनसुलझा रहस्य है.
इस सवाल का कोई जवाब नहीं है कि ये जीव अपने आवास के लिए ऐसी खतरनाक और अजीब जगह का चुनाव क्यों करते हैं. हो सकता है अब इन्होंने यहां रहने की आदत डाल ली हो और ये अपने निवास के अनुकूल खुद को ढाल चुके हो लेकिन..
सच यही है कि ज्वालामुखी का एक छोटा सा विस्फोट इनकी और आस-पास मौजूद सभी जिंदगियों को मिनटों में खत्म कर सकता है.
ऐसे ज्वालामुखी से सभी जीवों के जीवन को खतरा रहता है, फिर चाहे वो जैली फिश हों या शार्क.
पर इससे एक बात साफ है कि ये बहादुर छोटे जीव अपनी जिंदगी जीने का तरीका खुद तय करते हैं.
आप चाहे यकीन करें या नहीं लेकिन पृथ्वी पर ज्वालामुखी से बड़ी शायद कोई और त्रासदी नहीं है...