चौरीचौरा, उत्तर प्रदेश में गोरखपुर के पास का एक कस्बा है जहां 4 फरवरी 1922 को भारतीयों ने ब्रिटिश सरकार की एक पुलिस स्टेशन में आग लगा दी थी जिससे उसमें छुपे हुए 22 पुलिस कर्मचारी जिन्दा जल के मर गए थे. इस घटना को चौरीचौरा कांड से के नाम से जाना जाता है. इस कांड का भारतीय स्वतत्रंता आंदोलन पर बड़ा असर पड़ा. बता दें, इस कांड के बाद महात्मा गांधी काफी परेशान हो गए थे.
4 फरवरी, 1922 को हुआ था चौरीचौरा कांड के कारण उन्होंने अपना असहयोग आंदोलन वापस लेने का फैसला किया. चौरी-चौरा के सपूतों ने ब्रिटिश हुकूमत को हिलाकर रख दिया था.
जानें- चौरीचौरा कांड के बारे में विस्तार से चौरीचौरा कांड में क्रांतिकारियों ने इस दिन गौरखपुर के चौरीचौरा थाने में आग लगा दी थी. जिसमें थानाध्यक्ष समेत 22 पुलिसकर्मी जिंदा जल गए. आपको बता दें, इस घटना में 222 लोगों को आरोपी बनाया गया, जिसमें से 19 लोगों को 2 जुलाई, 1923 को फांसी की सजा हुई थी.
क्यों हुआ था चौरीचौरा कांड
अंग्रेजी शासन के विरोध में गांधी जी ने असहयोग आंदोलन की शुरुआत की थी. उस समय यूपी का चौरीचौरा ब्रिटिश कपड़ों और अन्य वस्तुओं की बड़ी मंडी हुआ करता था. आंदोलन के तहत देशवासी ब्रिटिश उपाधियों, सरकारी स्कूलों और अन्य वस्तुओं का त्याग कर रहे थे.
इसी के तहत स्थानीय बाजार में भी विरोध जारी था. 2 फरवरी, 1922 को पुलिस ने आंदोलनकारियों के दो नेताओं को गिरफ्तार कर लिया. इसके विरोध में 4 फरवरी को करीब तीन हजार आंदोलनकारियों ने थाने के सामने प्रदर्शन कर ब्रिटिश हुकूमत के खिलाफ नारेबाजी की.
इसे रोकने के लिए पुलिस ने हवाई फायरिंग की, लेकिन सत्याग्रहियों पर इसका असर नहीं हुआ. फिर पुलिस ने सीधे फायरिंग कर दी, इसमें तीन लोगों की मौत हो गई जबकि कई लोग घायल हुए. इसी बीच पुलिसकर्मियों की गोलियां खत्म हो गईं और वह थाने में छिप गए.
जिसके बाद साथियों की मौत से भड़के आक्रोशित क्रांतिकारियों ने पूरे पुलिस स्टेशन में आग लगा दी. इस घटना में तत्कालीन दरोगा गुप्तेश्वर सिंह समेत कुल 22 पुलिसकर्मी जलकर मारे गए. वहीं जैसे ही इस घटना को जानाकारी गांधी को मिली उन्होंने अपना असहयोग आंदोलन स्थगित कर दिया. आपको बता दें, चौरीचौरा कांड के अभियुक्तों का मुकदमा पंडित मदन मोहन मालवीय ने लड़ा था. जिसमें उन्हें बड़ी सफलता हासिल हुई थी.
चौराचौरी कांड के बाद बने 2 दल
चौराचौरी
कांड के बाद से स्वतंत्रता आंदोलन में शामिल क्रांतिकारियों के दो दल बन गए
थे. एक था नरम दल और दूसरा गरम दल. शहीद-ए-आजम भगत सिंह, सुखदेव, राजगुरु,
राम प्रसाद बिस्मिल और चंद्रशेखर आजाद जैसे कई क्रांतिकारी गरम दल के नायक
बने थे.
पूर्व प्रधानमंत्री स्व. इंदिरा गांधी ने चौरीचौरा की घटना के 60 साल बाद शहीद स्मारक भवन का 6 फरवरी, 1982 को शिलान्यास किया था. जबकि पूर्व प्रधानमंत्री स्व. नरसिम्हा राव ने 19 जुलाई, 1993 को इसका लोकार्पण किया.