राजस्थान स्पेशल ऑपरेशन ग्रुप ने नीट पेपर लीक मामले में ऐसी ताबड़तोड़ कार्रवाई की कि कुछ ही घंटों में पेपर लीक का पूरा नेटवर्क बेनकाब हो गया. 8 मई की रात शुरू हुई जांच ने सीकर, झुंझुनूं, जयपुर, गुरुग्राम, देहरादून, नासिक और यहां तक कि केरल तक जुड़े तारों को सामने ला दिया. लगातार पूछताछ, डिजिटल ट्रैकिंग और रातभर चली पड़ताल के बाद आखिरकार पूरे खेल का पर्दाफाश हुआ.
SOG ने ऐसे किया पेपर लीक मामले का खुलासा
8 मई की रात करीब 8 बजे इंटेलिजेंस ब्यूरो से SOG को नीट पेपर लीक की आशंका से जुड़ा इनपुट मिला. सूचना मिलते ही एडीजी विशाल बंसल, आईजी अजयपाल लांबा और एसपी कुंदन कंवरिया सहित SOG के वरिष्ठ अधिकारी सक्रिय हो गए. रात 9 बजे एडीजी बंसल वापस ऑफिस पहुंचे और तुरंत हाईलेवल बैठक शुरू हुई. रात 9 बजे से लेकर करीब 12 बजे तक एसओजी अधिकारियों ने ओरिजिनल नीट पेपर डाउनलोड कर सोशल मीडिया पर वायरल हो रहे सवालों से उसका मिलान किया.
जांच में बायोलॉजी और केमिस्ट्री के कई सवाल हूबहू मैच मिले. इसके बाद शक और गहरा गया. SOG ने करीब 80 स्टूडेंट्स समेत 150 से ज्यादा लोगों से बातचीत कर पेपर लीक की कड़ियां जोड़नी शुरू कीं. जब 135 सवाल और उनके ऑप्शन तक मेल खाते मिले तो मामला लगभग साफ हो गया. रात 12 बजे के बाद SOG ने सीकर पुलिस की मदद से संदिग्ध लोगों से पूछताछ शुरू करवाई.
फोटोकॉपी की दुकान से खुल गया पूरा नेटवर्क
जांच में सीकर, झुंझुनूं और केरल तक के लिंक सामने आने लगे. इसके बाद एडीजी विशाल बंसल और आईजी अजयपाल लांबा 100 से ज्यादा अधिकारियों की टीम के साथ सीकर रवाना हो गए. रात करीब 3 बजे तक SOG सीकर पहुंच चुकी थी. यहां एक दर्जन से ज्यादा स्टूडेंट्स और उनके पैरेंट्स से पूछताछ की गई. जांच में सामने आया कि पेपर सीकर में संचालित आरके कंसल्टेंसी से वायरल हुआ था. जब संचालक की लोकेशन ट्रेस की गई तो वह देहरादून में मिला. SOG ने तुरंत देहरादून पुलिस से संपर्क कर पूछताछ करवाई. वीडियो कॉल और फोन पर हुई पूछताछ में उसने 3-4 छात्रों के नाम बताए, जिनसे SOG ने तुरंत पूछताछ शुरू कर दी.
अगले दिन जांच के दौरान सीकर के एक ई-मित्र संचालक का नाम सामने आया. उसे हिरासत में लेकर पूछताछ की गई तो उसने खुलासा किया कि 1 मई को कुछ बच्चे फोटोकॉपी करवाकर ले गए थे. यहीं से SOG पेपर सप्लाई करने वालों तक पहुंच गई. जांच करते-करते टीम जयपुर के जमवारामगढ़ पहुंची, जहां से मांगीलाल और दिनेश को पकड़ा गया. दोनों ने पूछताछ में बताया कि उन्होंने 29 अप्रैल को गुरुग्राम निवासी यश यादव से पेपर खरीदा था. उनका एक बच्चा सीकर में परीक्षा दे रहा था, इसलिए अगले दिन वे खुद पेपर लेकर सीकर पहुंचे और उसके दोस्तों को भी पेपर उपलब्ध करवाया.
शुभम खैरनार ने गुरुग्राम के डॉक्टर को दिया था पेपर
एसओजी ने भिवाड़ी पुलिस के सहयोग से गुरुग्राम में दबिश देकर यश यादव को गिरफ्तार किया. पूछताछ में उसने नासिक निवासी शुभम खैरनार से पेपर लेने की बात कबूल ली. उसने यह भी बताया कि राजस्थान समेत कई राज्यों में पेपर बेचा गया था. इसके बाद महाराष्ट्र पुलिस को सूचना देकर शुभम खैरनार को भी पकड़वा लिया गया. पूरे घटनाक्रम की जानकारी लगातार नेशनल टेस्टिंग एजेंसी को दी जाती रही. इसी के बाद मंगलवार को NTA ने परीक्षा रद्द करने का फैसला लिया.
मंगलवार को SOG ने जयपुर से विक्रम यादव, योगेश प्रजापत, संदीप हरितवाल, नीतेश अजमेरा, मांगीलाल, उसके बेटे विकास, भाई दिनेश, यश यादव और सत्यनारायण चौधरी समेत कई आरोपियों को CBI के सुपुर्द कर दिया. वहीं सीकर से विक्रम कुमार यादव, राकेश कुमार मंडावरिया, रजत कुमार, अमित मीणा और रोहित मावलिया को भी जांच एजेंसी के हवाले किया गया.
शरत कुमार