क्या होता है आर्थिक सर्वेक्षण, जानें- इससे जुड़ी हर बात

आम बजट से पहले केंद्रीय वित्त मंत्री अरूण जेटली ने इकॉनोमिक सर्वे पेश किया. आर्थिक सर्वेक्षण के अनुसार अगले वित्तीय वर्ष में जीडीपी 7 से 7.54 फीसदी तक रह सकती है. हर साल बजट से पहले ये सर्वे पेश किया जाता है.

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वित्त मंत्री अरुण जेटली वित्त मंत्री अरुण जेटली

मोहित पारीक

  • नई दिल्ली,
  • 29 जनवरी 2018,
  • अपडेटेड 4:29 PM IST

आम बजट से पहले केंद्रीय वित्त मंत्री अरुण जेटली ने इकॉनोमिक सर्वे पेश किया. आर्थिक सर्वेक्षण के अनुसार अगले वित्तीय वर्ष में जीडीपी 7 से 7.54 फीसदी तक रह सकती है. हर साल बजट से पहले ये सर्वे पेश किया जाता है. देश में पहली बार यह सर्वे 1950-51 में जारी किया गया था और वित्त मंत्रालय की वेबसाइट पर 1957-58 से आगे के दस्तावेज भी मौजूद हैं. आइए जानते हैं ये क्या है और इससे जुड़ी अहम बातें...

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क्या है आर्थिक सर्वेक्षण?

आर्थिक सर्वेक्षण हर साल आम बजट से पहले पेश किया जाता है. यह वित्त मंत्रालय की ओर से पेश की जाने वाली आधिकारिक रिपोर्ट होती है. इस रिपोर्ट में बताया जाता है कि साल भर देश के विकास की हालत कैसी रही और देश की अर्थव्यवस्था पर आधारित होती है. इस सर्वेक्षण में देश की अर्थव्यवस्था, पूर्वानुमान और नीति चुनौतियों की विस्तृत जानकारी होती है.

कौन करता है तैयार?

आर्थिक सर्वेक्षण मुख्य आर्थिक सलाहकार और उनकी टीम तैयार करती है. इस बार मुख्य आर्थिक सलाहकार अरविंद सुब्रहमण्यम हैं. सरकार की आर्थिक सलाहकार परिषद नीतियों में बदलाव लाने के लिए आर्थिक सर्वेक्षण का इस्तेमाल करती है. कई बार ये उपाय बहुत व्यापक भी होते हैं.

विकास के लिए मिलते हैं सुझाव

ये सर्वेक्षण भविष्य में बनाई जाने वाली नीतियों के लिए एक आधार का काम करता है. इस लगाए गए अनुमान और दिए गए सुझावों से यह पता चल जाता है कि किन-किन सेक्टर्स में क्या क्या करना है और किस क्षेत्र में कितना काम करने की जरूरत है. हालांकि, एक बात जानना बेहद जरूरी है, सर्वे सिर्फ सिफारिशें हाती हैं और इन पर कोई कानूनी बाध्यता नहीं होती.

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इस बार आर्थिक रिपोर्ट में क्या रहा खास

आर्थिक सर्वेक्षण के मुताबिक जीएसटी के तहत इनडायरेक्ट टैक्स पेयर की संख्या पूर्व जीएसटी व्यवस्था से 50 फीसदी अधिक है. इसके साथ ही नवंबर 2016 के बाद 1.8 मिलियन अधिक लोगों ने इनकम टैक्स रिटर्न दाखिल किया है. साथ ही सोशल सिक्योरिटी आंकड़ों (ईपीएफओ, ईएसआईसी) के आधार पर गैर-कृषि क्षेत्र (फॉर्मल सेक्टर) में रोजगार में 30 फीसदी की बढ़त है. वहीं जीएसटी के अंतर्गत रोजगार के आंकड़ों में 50 फीसदी की बढ़त है.

केन्द्र सरकार द्वारा दिए जारी आंकड़ों के आधार पर राज्यों की कमाई पर उनके द्वारा किए जा रहे ग्लोबल ट्रेड और इंटरस्टेट ट्रेड पर निर्भर रही. इन क्षेत्रों में जिन राज्यों का जितना ट्रेड रहा है. सर्वेक्षण के आंकड़ों के मुताबिक देश की टॉप 1 फीसदी कंपनियां देश का कुल 38 फीसदी एक्सपोर्ट करती है. वहीं अन्य देशों में ये आंकड़ा भारत से खराब है. ब्राजील में टॉप एक फीसदी कंपनियां 72 फीसदी एक्सपोर्ट, जर्मनी में 68 फीसदी, मेक्सिको में 67 फीसदी और अमेरिका में 55 फीसदी एक्सपोर्ट करती हैं.

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