कभी पैसे बचाने के लिए ये काम करते थे कुमार विश्वास

मशहूर हिंदी कवि कुमार विश्वास 10 फरवरी को 48 साल के हो गए हैं. जानें उनके बारे में ये खास बातें....

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कुमार विश्वास कुमार विश्वास

प्रियंका शर्मा

  • नई दिल्ली,
  • 10 फरवरी 2018,
  • अपडेटेड 12:20 PM IST

मशहूर हिंदी कवि कुमार विश्वास 10 फरवरी को 48 साल के हो गए हैं. उनकी लिखी हुई कविता 'कोई दीवाना कहता है, कोई पागल समझता है' आज भी हर किसी के जुबान पर है. एक कवि होने के साथ वह आम आदमी पार्टी के नेता भी हैं. आज वह कविता और उसे सुनाने की कला की बदौलत युवाओं के बीच काफी लोकप्रिय हैं.

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जानते हैं- कुमार विश्वास के जिंदगी के अहम पहलूओं के बारे में..

कुमार विश्वास ने साल 1994 में राजस्थान के एक कॉलेज में व्याख्याता (लेक्चरर) के रूप में अपने करियर की शुरुआत की थी. आज वह हिंदी कविता मंच के सबसे व्यस्ततम कवियों में से एक हैं. उन्होंने कई कवि सम्मेलनों की शोभा बढ़ाई है. साथ ही वहपत्रिकाओं के लिए वह भी लिखते हैं. मंचीय कवि होने के साथ-साथ विश्वास हिंदी सिनेमा के गीतकार भी हैं. कुमार विश्वास का जन्म 10 फरवरी, 1970 को उत्तर प्रदेश के गाजियाबाद जनपद के पिलखुआ में हुआ था. इनके पिता का नाम डॉ. चंद्रपाल शर्मा हैं, जो आरएसएस डिग्री कॉलेज में प्रध्यापक हैं और मां का नाम रमा शर्मा है. वह अपने चार भाइयों में सबसे छोटे हैं.

पिता चाहते थे इंजीनियरिंग करें कुमार

कुमार विश्वास की प्रारंभिक शिक्षा पिलखुआ के लाला गंगा सहाय विद्यालय में हुई. उन्होंने राजपुताना रेजिमेंट इंटर कॉलेज से 12वीं पास की है. आईएएनएस की रिपोर्ट के मुताबिक उनके पिता चाहते थे कि कुमार इंजीनियर बनें. लेकिन उनका इंजीनियरिंग की पढ़ाई में मन नहीं लगता था. वह कुछ अलग करना चाहते थे, इसलिए उन्होंने बीच में ही पढ़ाई छोड़ दी और हिंदी साहित्य में 'स्वर्ण पदक' के साथ ग्रेजुएशन की डिग्री हासिल की. एमए करने के बाद उन्होंने 'कौरवी लोकगीतों में लोकचेतना' विषय पर पीएचडी हासिल की. उनके इस शोधकार्य को वर्ष 2001 में पुरस्कृत भी किया गया था.

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पैसे बचाने को करते थे ट्रक में सफर

शुरुआती दिनों में जब कुमार विश्वास कवि सम्मेलनों से देर से लौटते थे, तो पैसे बचाने के लिए ट्रक में लिफ्ट लिया करते थे. बता दें, अगस्त, 2011 में कुमार 'जनलोकपाल आंदोलन' के लिए गठित टीम अन्ना के लिए सक्रिय सदस्य रहे हैं. कुमार 26 जनवरी, 2012 को गठित टीम 'आम आदमी पार्टी' के राष्ट्रीय कार्यकारिणी सदस्य हैं.

कुमार की लोकप्रिय कविताएं हैं- 'कोई दीवाना कहता है', 'तुम्हें मैं प्यार नहीं दे पाऊंगा', 'ये इतने लोग कहां जाते हैं सुबह-सुबह', 'होठों पर गंगा है' और 'सफाई मत देना' है.

साल 1994 में कुमार विश्वास को 'काव्य कुमार' 2004 में 'डॉ सुमन अलंकरण' अवार्ड, 2006 में 'श्री साहित्य' अवार्ड और 2010 में 'गीत श्री' अवार्ड से सम्मानित हो चुके हैं.

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