Tech Job Crisis: क्या वाकई खत्म हो रहा है सॉफ्टवेयर इंजीनियर्स का दबदबा? 4 साल में 70% नीचे हुआ ग्राफ

कोरोना महामारी के दौरान टेक कंपनियों ने अंधाधुंध भर्तियां की थीं, जिसे अब ओवर हायर‍िंग करेक्शन कहकर उनके जॉब को खतरे में डाला जा रहा है. कंपनियों ने तब जरूरत से ज्यादा इंजीनियर्स रख लिए थे, और अब वे अपनी लागत घटाने के लिए लगातार छंटनी (Layoffs) कर रही हैं. लेकिन इस संकट का दूसरा और सबसे खतरनाक विलेन AI कोड‍िंग टूल्स (जैसे GitHub Copilot और अन्य जनरेटिव एआई टूल्स) है. 

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2022 के मुकाबले 70% नीचे गिरा सॉफ्टवेयर डेवलपर्स का मार्केट 2022 के मुकाबले 70% नीचे गिरा सॉफ्टवेयर डेवलपर्स का मार्केट

आजतक एजुकेशन डेस्क

  • नई दिल्ली ,
  • 15 जून 2026,
  • अपडेटेड 11:30 AM IST

अब तक यही माना जाता था कि कुछ नहीं तो कंप्यूटर साइंस से बीटेक (B.Tech) करा दो, कोडिंग सीख लेगा तो लाइफ और करियर दोनों सेफ हो जाएंगे. लेकिन साल 2026 में पूरा ट्रेंड ही बिगड़ता द‍िख रहा है. अब सॉफ्टवेयर इंजीनियर्स के 'सेफ करियर' का यह सबसे बड़ा मिथक अब पूरी तरह टूट चुका है. जो कोडर्स कभी टेक कंपनियों के MVP (मोस्ट वैलयूएबल प्लेयर्स) हुआ करते थे, जिनके नखरे और भारी-भरकम पैकेज की कहानियां वायरल होती थीं, आज वे सिर्फ इस रेस में बने रहने के लिए संघर्ष कर रहे हैं. 

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'द वॉल स्ट्रीट जर्नल' की एक रिपोर्ट ने इस संकट पर अपनी र‍िपोर्ट में जॉब पोर्टल Indeed के ट्रैकर डेटा से बदलते ट्रेंड का सच बताया है. रिपोर्ट के मुताबिक सॉफ्टवेयर डेवलपमेंट के क्षेत्र में जॉब पोस्टिंग्स साल 2022 के अपने ऐतिहासिक उच्चतम स्तर (पीक) की तुलना में करीब 70% तक नीचे आ चुकी हैं. ये मंदी केवल अनुभवी लोगों के लिए नहीं है. यूनिवर्सिटी और कॉलेजों से कंप्यूटर साइंस की डिग्री लेकर निकलने वाले फ्रेशर्स के लिए जॉब मार्केट अब तक के सबसे बुरे दौर से गुजर रहा है. एंट्री-लेवल कोडिंग जॉब्स लगभग गायब सी हो गई हैं. 

क्यों बदले हालात? 
बता दें कि कोरोना महामारी के दौरान टेक कंपनियों ने अंधाधुंध भर्तियां की थीं, जिसे अब ओवर हायर‍िंग करेक्शन कहकर उनके जॉब को खतरे में डाला जा रहा है. कंपनियों ने तब जरूरत से ज्यादा इंजीनियर्स रख लिए थे, और अब वे अपनी लागत घटाने के लिए लगातार छंटनी (Layoffs) कर रही हैं. लेकिन इस संकट का दूसरा और सबसे खतरनाक विलेन AI कोड‍िंग टूल्स (जैसे GitHub Copilot और अन्य जनरेटिव एआई टूल्स) है. 

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इस रिपोर्ट में एक्सपर्ट्स के हवाले से साफ किया गया है कि जो काम पहले 5 जूनियर कोडर्स मिलकर कई दिनों में करते थे, वह काम अब एआई कोडिंग टूल्स की मदद से एक सीनियर इंजीनियर कुछ ही घंटों में कर लेता है. नतीजतन, कंपनियों को अब कोडर्स की उस 'फौज' की जरूरत ही नहीं रह गई है. रिपोर्ट में कई ऐसे सॉफ्टवेयर इंजीनियर्स की आपबीती साझा की गई है जो सैकड़ों कंपनियों में अप्लाई करने के बाद भी एक अदद इंटरव्यू कॉल के लिए तरस रहे हैं. यही सच्चाई है कि जॉब मार्केट का संतुलन पूरी तरह बदल चुका है. अब कंपनियां सिर्फ 'कोड लिखने वाले' नहीं ढूंढ रही हैं, बल्कि वे ऐसे 'प्रॉब्लम सॉल्वर्स' की तलाश में हैं जो एआई को मैनेज कर सकें. 

इस मंदी के कारण अब इंजीनियर्स हाई-सैलरी और वर्क फ्रॉम होम (WFH) जैसी शर्तों को छोड़कर, जैसी भी नौकरी मिल रही है, उसे पकड़कर गेम में बने रहने की कोशिश कर रहे हैं. 

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