ट्रंप डिएगो गार्सिया पर यू-टर्न क्यों चाहते हैं? भारत से सिर्फ 1100 मील दूर यह सैन्य अड्डा रणनीतिक रूप से कितना महत्वपूर्ण है

ट्रंप अब डिएगो गार्सिया पर यू-टर्न लेना चाहते हैं. पहले के समझौते को महान मूर्खता बताते हुए उन्होंने कहा कि अमेरिका को इसे स्थायी रूप से नियंत्रित रखना चाहिए. भारत से मात्र 1700 km दूर यह अड्डा इंडो-पैसिफिक में अमेरिकी ताकत का केंद्र है. भारत के लिए यह बड़ा खतरा हो सकता है, क्योंकि मॉरीशस के साथ समझौता टूटने से क्षेत्रीय स्थिरता प्रभावित होगी.

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डिएगो गार्सिया द्वीप पर बना हुआ अमेरिकी मिलिट्री एयरबेस. (Photo: AFP) डिएगो गार्सिया द्वीप पर बना हुआ अमेरिकी मिलिट्री एयरबेस. (Photo: AFP)

ऋचीक मिश्रा

  • नई दिल्ली,
  • 22 जनवरी 2026,
  • अपडेटेड 12:32 PM IST

ग्रीनलैंड के बाद अब ट्रंप की नजर हिंद महासागर के एक द्वीप पर है, जो भारत के लिए बड़ा चिंता का विषय है. अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने हाल ही में ब्रिटेन के एक फैसले की आलोचना की है, जिसमें चागोस द्वीपसमूह (जिसमें डिएगो गार्सिया शामिल है) को मॉरीशस को सौंपने का समझौता है.

ट्रंप इसे महान मूर्खता बता रहे हैं और कह रहे हैं कि इससे अमेरिका को ग्रीनलैंड पर कब्जा करने का और वजह मिलती है. लेकिन ट्रंप की अपनी सरकार ने पहले इस समझौते का समर्थन किया था. आइए समझते हैं कि ट्रंप अब यू-टर्न क्यों लेना चाहते हैं. यह सैन्य अड्डा भारत के लिए क्यों महत्वपूर्ण है.

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डिएगो गार्सिया क्या है?

डिएगो गार्सिया हिंद महासागर में स्थित एक छोटा सा द्वीप है, जो ब्रिटिश इंडियन ओशन टेरिटरी का हिस्सा है. यह भारत से करीब 1770 किलोमीटर दूर है. यहां अमेरिका का एक महत्वपूर्ण सैन्य अड्डा है, जहां बी-52 बॉम्बर विमान, लंबी दूरी के हमले के हथियार और संभवतः परमाणु क्षमताएं भी मौजूद हैं.

इस अड्डे से अमेरिका पश्चिम एशिया, अफ्रीका और पूरे इंडो-पैसिफिक क्षेत्र में अपनी ताकत दिखा सकता है. ईरान, चीन, भारत और समुद्री मार्ग सभी इसकी पहुंच में हैं. तकनीकी रूप से यह द्वीप मॉरीशस का है, जो भारत का करीबी देश है.

1960 के दशक में ब्रिटेन और अमेरिका ने यहां के मूल निवासियों (चागोसियन) को जबरन हटा दिया था, ताकि सैन्य अड्डा बनाया जा सके. हाल के सालों में अंतरराष्ट्रीय अदालतों ने ब्रिटेन के कब्जे को गैरकानूनी बताया है.

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ट्रंप का यू-टर्न: पहले समर्थन, अब विरोध

पिछले साल (2025 में) ट्रंप की सरकार ने ब्रिटेन और मॉरीशस के बीच हुए समझौते का स्वागत किया था. इस समझौते के तहत ब्रिटेन चागोस द्वीपसमूह की संप्रभुता मॉरीशस को सौंप देगा, लेकिन अमेरिकी सैन्य अड्डा 99 साल की लीज पर बना रहेगा. ट्रंप ने इसे ऐतिहासिक उपलब्धि कहा था.

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लेकिन जनवरी 2026 में ट्रंप ने ट्रुथ सोशल पर पोस्ट करके ब्रिटेन की आलोचना की. उन्होंने कहा कि हमारा NATO सहयोगी ब्रिटेन डिएगो गार्सिया को मॉरीशस को बिना वजह सौंप रहा है. यह कमजोरी की निशानी है, जिसे चीन और रूस देख रहे हैं. यह महान मूर्खता है. इसी वजह से अमेरिका को ग्रीनलैंड पर कब्जा करना चाहिए. ट्रंप का कहना है कि यह फैसला राष्ट्रीय सुरक्षा के लिए खतरा है.

ट्रंप क्यों यू-टर्न ले रहे हैं? 

विशेषज्ञों का मानना है कि ट्रंप अपनी अमेरिका फर्स्ट नीति के तहत अमेरिकी हितों को मजबूत दिखाना चाहते हैं. वे मानते हैं कि मॉरीशस के साथ समझौता अमेरिका को कमजोर दिखाता है, जबकि स्थायी कब्जा ज्यादा मजबूत स्थिति देगा. ग्रीनलैंड की तरह, ट्रंप डिएगो गार्सिया को भी अमेरिकी नियंत्रण में रखना चाहते हैं, ताकि चीन और रूस जैसे प्रतिद्वंद्वियों पर दबाव बनाया जा सके.

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डिएगो गार्सिया का रणनीतिक महत्व

डिएगो गार्सिया दुनिया के सबसे महत्वपूर्ण सैन्य अड्डों में से एक है. यहां से... 

इंडो-पैसिफिक में ताकत: अमेरिका चीन के बढ़ते प्रभाव को रोक सकता है. यह अड्डा मलक्का जलडमरूमध्य और अन्य समुद्री मार्गों के करीब है, जहां से विश्व व्यापार का बड़ा हिस्सा गुजरता है.

मध्य पूर्व और अफ्रीका: ईरान, इराक, अफगानिस्तान जैसे क्षेत्रों में हमले के लिए इस्तेमाल होता है. 9/11 के बाद और इराक युद्ध में इसका बड़ा रोल था.

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भारत के लिए निकटता: भारत से सिर्फ 1770 किमी दूर होने से यह भारत की सुरक्षा के लिए संवेदनशील है. अगर अमेरिका यहां से कोई कार्रवाई करता है, तो भारत के हिंद महासागर क्षेत्र में प्रभाव पड़ सकता है.

परमाणु और खुफिया क्षमताएं: यहां सैटेलाइट ट्रैकिंग, सबमरीन सपोर्ट और लंबी दूरी के बॉम्बर हैं, जो वैश्विक स्तर पर अमेरिका की सैन्य श्रेष्ठता बनाए रखते हैं.

यह अड्डा कानूनी चुनौतियों से बचाने के लिए समझौता जरूरी था, लेकिन ट्रंप इसे कमजोरी मानते हैं.

भारत के लिए क्यों बड़ा खतरा?

भारत ने हमेशा मॉरीशस के दावे का समर्थन किया है. भारत ने मॉरीशस को 80 मिलियन डॉलर की आर्थिक मदद, पोर्ट लुई में बंदरगाह विकास और चागोस मरीन प्रोटेक्टेड एरिया में निवेश किया है. भारत और मॉरीशस के बीच ऐतिहासिक संबंध हैं. भारत नहीं चाहता कि हिंद महासागर में अमेरिका या ब्रिटेन का एकतरफा कब्जा हो.

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अगर ट्रंप यू-टर्न करवाते हैं और समझौता रद्द होता है, तो... 

समझौतों पर अविश्वास: यह दिखाएगा कि वाशिंगटन में राजनीतिक बदलाव से कोई भी समझौता रद्द हो सकता है. आज ट्रंप, कल कोई और.

भारत की रणनीति पर असर: भारत हिंद महासागर को शांत क्षेत्र रखना चाहता है. अमेरिकी स्थायी कब्जा चीन को उकसा सकता है, जिससे क्षेत्र में तनाव बढ़ेगा.

क्षेत्रीय संतुलन: भारत QUAD (अमेरिका, जापान, ऑस्ट्रेलिया के साथ) में है, लेकिन एकतरफा अमेरिकी कदम भारत की स्वतंत्र विदेश नीति को चुनौती दे सकता है.

ट्रंप के दावोस और ट्रुथ सोशल बयानों से साफ है कि वे ग्रीनलैंड के बाद डिएगो गार्सिया को अमेरिकी संपत्ति की तरह देख रहे हैं. ट्रंप का यू-टर्न राष्ट्रीय सुरक्षा की राजनीति से प्रेरित है, लेकिन यह अंतरराष्ट्रीय समझौतों को कमजोर कर सकता है.

डिएगो गार्सिया का रणनीतिक महत्व इतना बड़ा है कि यह पूरे इंडो-पैसिफिक की शक्ति संतुलन को प्रभावित करता है. भारत के लिए यह चिंता की बात है, क्योंकि इससे क्षेत्रीय स्थिरता खतरे में पड़ सकती है. वैश्विक नेता अब देख रहे हैं कि ट्रंप की यह नीति कितनी दूर तक जाती है.

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