रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने बेंगलुरु स्थित DRDO के गैस टरबाइन रिसर्च इस्टैब्लिशमेंट (GTRE) का दौरा किया. इस दौरान उन्होंने भारत में स्वदेशी सैन्य गैस टरबाइन इंजन (लड़ाकू विमानों के लिए शक्तिशाली इंजन) बनाने की चल रहे प्रोजेक्ट की समीक्षा की. यह दौरा भारत की रक्षा क्षेत्र में आत्मनिर्भरता को मजबूत करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है.
दौरा में क्या-क्या हुआ?
रक्षा मंत्री को GTRE के वैज्ञानिकों ने चल रहे प्रोजेक्ट के बारे में विस्तृत ब्रिफिंग दी. इसमें शामिल थे...
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राजनाथ सिंह ने एक प्रदर्शनी भी देखी, जिसमें भारत में बने विभिन्न इंजन और उनके पुर्जे दिखाए गए. सबसे खास बात यह रही कि उन्होंने कावेरी इंजन का फुल आफ्टरबर्नर टेस्ट (पूर्ण शक्ति वाला परीक्षण) मौके पर ही देखा. कावेरी इंजन भारत का अपना लड़ाकू विमान इंजन है, जिसे कई सालों से विकसित किया जा रहा है.
रक्षा मंत्री ने क्या कहा?
वैज्ञानिकों और अधिकारियों से बातचीत में रक्षा मंत्री ने GTRE की जमकर तारीफ की. उन्होंने कहा कि DRDO भारत की रणनीतिक ताकत का आधार है. GTRE राष्ट्रीय सुरक्षा को आत्मनिर्भरता से मजबूत कर रहा है.
आत्मनिर्भरता जरूरी है: आज के बदलते भू-राजनीतिक माहौल में एयरो इंजन तकनीक में आत्मनिर्भर होना बहुत जरूरी है. सप्लाई चेन टूट रही हैं और नए गठबंधन बन रहे हैं. जिन देशों के पास अपनी क्रिटिकल तकनीक होगी, वही सुरक्षित रहेंगे.
सरकार का पूरा समर्थन: प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व वाली सरकार हर क्षेत्र में आत्मनिर्भरता के लिए प्रतिबद्ध है. एयरो इंजन विकास को प्राथमिकता दी जा रही है.
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अगली पीढ़ी के इंजन पर फोकस: हम तेजी से एडवांस्ड मीडियम कॉम्बैट एयरक्राफ्ट (AMCA) यानी पांचवीं पीढ़ी के लड़ाकू विमान की ओर बढ़ रहे हैं. अब सिर्फ पांचवीं पीढ़ी तक सीमित नहीं रहना है – छठी पीढ़ी की तकनीक, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस, मशीन लर्निंग और नए मटेरियल पर अभी से काम शुरू करना होगा.
समय सीमा कम करें: एयरो इंजन बनाना बहुत जटिल काम है. इसमें थर्मोडायनामिक्स, मटेरियल साइंस, फ्लुइड मैकेनिक्स और एडवांस्ड इंजीनियरिंग शामिल होती है. विकसित देशों को भी नई पीढ़ी का इंजन बनाने में 25-30 साल लग जाते हैं. लेकिन भारत को समय कम करना होगा. मान लीजिए 20 साल पहले ही बीत चुके हैं, अब हमारे पास सिर्फ 5-7 साल बचे हैं.
ऑपरेशन सिंदूर का उदाहरण: हालिया ऑपरेशन सिंदूर में भारतीय सेना ने संचार व्यवस्था, निगरानी उपकरण और हमलावर हथियार – सब कुछ स्वदेशी – इस्तेमाल किया. इससे सैनिकों का मनोबल बढ़ा और देशवासियों को गर्व हुआ. अब और ज्यादा स्वदेशी विश्व स्तरीय सिस्टम बनाने पर जोर देना होगा.
अंतरराष्ट्रीय सहयोग
रक्षा मंत्री ने बताया कि ब्रिटेन के साथ एयरो इंजन पर संयुक्त अध्ययन चल रहा है. फ्रांस के साथ भी नेशनल एयरो इंजन मिशन के तहत सहयोग शुरू हो चुका है. ये सहयोग हमें नई तकनीक सीखने और दूसरों की पुरानी चुनौतियों को समझने में मदद करेंगे.
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नागरिक क्षेत्र में भी फायदा
GTRE जो हाई-टेम्परेचर कंपोजिट मटेरियल बना रहा है, उसका इस्तेमाल भविष्य में सिविल एविएशन, बिजली उत्पादन और अंतरिक्ष क्षेत्र में हो सकता है. भारत दुनिया का सबसे तेज बढ़ता सिविल एविएशन बाजार है. रक्षा क्षेत्र की तकनीक कल नागरिक उड्डयन और अर्थव्यवस्था को बदल सकती है.
भारत की बढ़ती ताकत
रक्षा मंत्री ने यूरोपीय संघ के साथ 18 साल से लंबित फ्री ट्रेड एग्रीमेंट के हालिया पूरा होने का जिक्र किया. यह भारत की बढ़ती आर्थिक और राजनीतिक ताकत का प्रमाण है. उन्होंने ग्रीस के रक्षा मंत्री से अपनी हालिया मुलाकात का भी उल्लेख किया, जिन्होंने भारत को उभरती शक्ति नहीं बल्कि महाशक्ति कहा.
रक्षा मंत्री का यह दौरा और उनका संदेश स्पष्ट है – भारत अब रक्षा तकनीक, खासकर एयरो इंजन, में विदेशी निर्भरता कम करके पूरी तरह आत्मनिर्भर बनेगा. GTRE जैसे संस्थान और वैज्ञानिकों की मेहनत से भारत जल्द ही विश्व स्तरीय इंजन बनाने में सक्षम हो जाएगा, जो न सिर्फ हमारी सेना को मजबूत करेगा बल्कि अर्थव्यवस्था को भी नई ऊंचाई देगा.
शिवानी शर्मा