हिंदुस्तान एयरोनॉटिक्स लिमिटेड (HAL) ने अमेरिकी कंपनी GE एयरोस्पेस पर सख्त रुख अपनाते हुए तेजस Mk1A लड़ाकू विमान के इंजन सप्लाई में देरी के लिए पेनाल्टी लगाने का फैसला किया है. HAL के चेयरमैन और मैनेजिंग डायरेक्टर ने स्पष्ट रूप से कहा है कि अमेरिकी कंपनी को F404-IN20 इंजन समय पर नहीं देने के कारण लिक्विडेटेड डैमेजेस यानी जुर्माना लगाया जाएगा.
यह फैसला इसलिए लिया गया है क्योंकि तेजस Mk1A प्रोजेक्ट इंजन की कमी से दो साल से ज्यादा समय से अटका है. भारतीय वायुसेना नए विमानों का इंतजार कर रही है, लेकिन इंजन न मिलने से डिलीवरी रुकी हुई है. GE एयरोस्पेस के साथ 99 F404 इंजनों का कॉन्ट्रैक्ट साइन हुआ था.
यह भी पढ़ें: ईरान का ट्रंप कार्ड: चोक पॉइंट जंग का ऐसे बना बादशाह, रोकी दुनिया की राह
इन इंजनों को तेजस Mk1A के लिए इस्तेमाल किया जाना है. कंपनी को 2024 से डिलीवरी शुरू करनी थी. हर साल 20 से ज्यादा इंजन देने थे. लेकिन अब तक सिर्फ 6 इंजन ही सप्लाई हुए हैं. बाकी इंजनों की डिलीवरी में भारी देरी हो रही है.
कंपनी सप्लाई चेन में दिक्कतों का हवाला दे रही है, लेकिन HAL ने इसे मानने से इनकार कर दिया है. भारत की ओर से कई बार बातचीत की गई कि डिलीवरी तेज की जाए, लेकिन GE एयरोस्पेस इस पर अमल नहीं कर पाई. अब HAL हर देरी वाले इंजन पर पेनाल्टी लगाएगा.
HAL के CMD ने बताया कि कॉन्ट्रैक्ट में देरी के लिए लिक्विडेटेड डैमेजेस का साफ क्लॉज है. इस क्लॉज को हर देरी वाले इंजन पर लागू किया जाएगा. पेनाल्टी की राशि प्रति इंजन तय की जाएगी. वो भी बेहद जल्द.
यह भी पढ़ें: तेजस फाइटर जेट अगले बुधवार से फिर उड़ान भरने को तैयार, दो महीने से ग्राउंडेड था बेड़ा
पिछले साल GE के साथ 113 और F404 इंजनों का $1 बिलियन का अलग से ऑर्डर भी साइन किया गया था, जो Mk1A के दूसरे बैच के लिए है. HAL अब दोनों ऑर्डरों पर पेनाल्टी लागू करने की तैयारी कर रहा है.
तेजस Mk1A प्रोजेक्ट पर क्या असर पड़ा
तेजस Mk1A भारतीय वायुसेना के लिए बहुत महत्वपूर्ण प्रोजेक्ट है. वायुसेना ने कुल 180 Mk1A विमानों का ऑर्डर दिया है. लेकिन इंजन न मिलने की वजह से पूरा प्रोजेक्ट दो साल से ज्यादा देरी से चल रहा है. HAL का दावा है कि उसके पास अभी 18 विमान तैयार हैं, जिनमें से 5 को जल्द ही वायुसेना को सौंपा जाएगा, लेकिन इसके लिए IAF की ओर से आकलन और मंजूरी जरूरी है.
इंजन की कमी के कारण बाकी विमानों की असेंबली रुकी हुई है. अगर इंजन समय पर मिल जाते तो तेजस Mk1A पहले ही वायुसेना में शामिल हो चुके होते. यह मामला सिर्फ एक कंपनी और HAL के बीच का नहीं है. यह भारत की स्वदेशी रक्षा उत्पादन और आत्मनिर्भरता से जुड़ा है। तेजस Mk1A पूरी तरह स्वदेशी लड़ाकू विमान है.
अगर विदेशी कंपनियां इंजन जैसी महत्वपूर्ण चीजों में देरी करती रहेंगी तो भारत की डिफेंस तैयारियां प्रभावित होंगी. HAL अब सख्ती दिखाकर साफ संदेश दे रहा है कि देरी बर्दाश्त नहीं की जाएगी. पेनाल्टी लगाने से GE एयरोस्पेस पर दबाव बढ़ेगा और उम्मीद है कि भविष्य में डिलीवरी तेज होगी.
शिवानी शर्मा