सीमा सुरक्षा बल (बीएसएफ) भारत का पहला ड्रोन युद्ध स्कूल चला रहा है. यह स्कूल ड्रोन योद्धाओं और कमांडो को ट्रेनिंग दे रहा है. ऑपरेशन सिंदूर के बाद यह नई उम्र के युद्ध से निपटने के लिए जरूरी है. पहला बैच पूरा हो चुका है. अब बीएसएफ हवाई खतरों से लड़ने की ताकत बढ़ा रहा है.
स्कूल का पहला बैच पूरा हो गया. इसमें 42 ड्रोन योद्धा हैं. ये अधिकारी हैं, जो आगे अपने अधीनस्थों को ट्रेनिंग देंगे. एक और बैच आठ हफ्ते की ट्रेनिंग कर रहा है. ये योद्धा हवाई हमलों से देश की रक्षा करेंगे.
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बीएसएफ ने यह स्कूल हवाई खतरों से निपटने के लिए बनाया. खासकर के बाद. यह भारत की रणनीतिक और तकनीकी ताकत बढ़ाएगा. ट्रेनिंग में सिखाया जाता है...
ये ट्रेनिंग मिशन मोड में चल रही है. योद्धा असली जंग में इस्तेमाल के लिए तैयार हो रहे हैं. स्कूल का उद्घाटन 2 सितंबर को बीएसएफ के महानिदेशक दलजीत चौधरी ने किया. यह मध्य प्रदेश के ग्वालियर के पास टेकनपुर में ऑफिसर्स अकादमी में है. साल में कम से कम 500 ड्रोन कमांडो और योद्धा तैयार करने का लक्ष्य है. इसके लिए 10-12 बैच चलेंगे. स्कूल को शुरुआती फंडिंग 20 करोड़ रुपये मिली. इसमें सुविधाएं हैं...
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ऑपरेशन सिंदूर में भारत ने पाकिस्तान को सख्त जवाब दिया. पहलगाम हमले के बाद यह कार्रवाई हुई. अब ड्रोन स्कूल से बीएसएफ हवाई युद्ध में माहिर बनेगा. इससे सीमा पर सुरक्षा मजबूत होगी. विशेषज्ञ कहते हैं कि ड्रोन नई जंग का हथियार हैं. भारत अब इसमें आगे बढ़ रहा है.यह स्कूल बीएसएफ की नई ताकत है. ड्रोन कमांडो देश की रक्षा में अहम भूमिका निभाएंगे. जल्द ही और बैच तैयार होंगे.
शिवानी शर्मा