लद्दाख में LoC-LAC पर माइनस 50 डिग्री में कैसे रहते हैं भारतीय जवान

लद्दाख के LoC और LAC पर भारतीय सेना के जवान चरम ठंड (-50°C तक), भारी बर्फबारी और ऊंचाई से जूझते हुए देश की रक्षा कर रहे हैं. विशेष ठंडे कपड़े, हीटेड शेल्टर, हेलिकॉप्टर सपोर्ट और लगातार ट्रेनिंग से वे अलर्ट रहते हैं. द्रास में 'जश्न-ए-फतेह' जैसे कार्यक्रमों से भी लोकल लोगों से जुड़ते हैं. उनकी बहादुरी और समर्पण से सीमाएं सुरक्षित हैं.

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द्रास और लद्दाख में LOC और LAC पर ऐसी बर्फ में जवानों को सीमा की सुरक्षा करनी पड़ती है. (Photo: Indian Army) द्रास और लद्दाख में LOC और LAC पर ऐसी बर्फ में जवानों को सीमा की सुरक्षा करनी पड़ती है. (Photo: Indian Army)

अशरफ वानी

  • नई दिल्ली,
  • 15 जनवरी 2026,
  • अपडेटेड 5:47 PM IST

जनवरी 2026 में लद्दाख और द्रास (भारत का सबसे ठंडा बसा हुआ इलाका) में तापमान -20°C से -50°C तक गिर जाता है. भारी बर्फबारी से सड़कें बंद हो जाती हैं. दूर-दराज के पोस्ट महीनों तक अलग-थलग पड़ जाते हैं. द्रास में अभी हाल ही में सीजन की पहली बर्फबारी हुई है, जिससे इलाका बर्फ की चादर से ढक गया है.

एलओसी (पाकिस्तान के साथ नियंत्रण रेखा) और एलएसी (चीन के साथ वास्तविक नियंत्रण रेखा) पर जवान 14 से 18 हजार फीट की ऊंचाई पर तैनात रहते हैं, जहां हवा में ऑक्सीजन कम होती है. ठंड से सांस लेना भी मुश्किल हो जाता है.

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जवानों की चुनौतियां  

  • चरम ठंड: तापमान -35°C से -50°C तक, सांस की भाप जम जाती है. शरीर के हिस्से जम सकते हैं.
  • ऊंचाई की समस्या: एल्टीट्यूड सिकनेस, कम ऑक्सीजन से सिरदर्द, थकान.  
  • बर्फबारी-एवलांच: सड़कें बंद, पोस्ट तक पहुंचना मुश्किल, एवलांच का खतरा.  
  • पानी और राशन: नदियां जम जाती हैं, पीने का पानी कम लेकिन सेना पहले से स्टॉक करती है.  
  • मानसिक दबाव: महीनों तक अलग-थलग, परिवार से दूर लेकिन जवान हौसला बनाए रखते हैं.

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सेना कैसे तैयार रहती है?

भारतीय सेना ने सालों के अनुभव (सियाचिन, कारगिल) से मजबूत तैयारी की है...  

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  • विशेष ठंडे कपड़े: इम्पोर्टेड एक्सट्रीम कोल्ड वेदर क्लोदिंग (60000+ सेट स्टॉक), कई लेयर वाली जैकेट, ग्लव्स, बूट्स, थर्मल अंडरगारमेंट्स.  
  • आश्रय और टेंट: हीटेड टेंट (बैरल टाइप, फाइबरग्लास हट्स), अंदर 20-22°C तापमान रहता है जबकि बाहर -20°C. ग्रीन शेल्टर्स और मॉड्यूलर शेल्टर्स.  
  • लॉजिस्टिक सपोर्ट: हेलिकॉप्टर और ट्रक से राशन, केरोसिन, दवाइयां पहुंचाई जाती हैं. स्पेशल फ्यूल और बैटरी जो ठंड में काम करें.  
  • मॉनिटरिंग: ड्रोन, थर्मल इमेजिंग, सैटेलाइट से नजर रखना. मेडिकल टीम हमेशा तैयार, हेल्थ चेकअप नियमित.  
  • ट्रेनिंग और मोटिवेशन: जवान सर्दियों में भी पैट्रोलिंग, सर्विलांस करते हैं. 14 कोर (लेह) जैसे यूनिट्स भारी हथियार (1200 किलो एयर डिफेंस गन) भी ऊंचाई पर ले जाते हैं.

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द्रास विंटर कार्निवल 'जश्न-ए-फतेह 2026'

हाल ही में भारतीय सेना ने द्रास में 'जश्न-ए-फतेह 2026' कार्निवल शुरू किया, जिसमें आइस हॉकी, तीरंदाजी और कल्चरल प्रोग्राम हैं. यह लोकल युवाओं को जोड़ने और सिविल-मिलिट्री रिश्ते मजबूत करने के लिए है. यह दिखाता है कि जवान सिर्फ ड्यूटी नहीं, बल्कि इलाके के विकास में भी योगदान देते हैं.  

लद्दाख में भारतीय जवान प्रकृति की सबसे कठिन चुनौतियों से लड़ते हुए देश की सीमाओं की रक्षा कर रहे हैं. उनकी बहादुरी, अनुशासन और तैयारी से वे ठंड, बर्फ और दुश्मन दोनों से लड़ते हैं.  

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