जनवरी 2026 में लद्दाख और द्रास (भारत का सबसे ठंडा बसा हुआ इलाका) में तापमान -20°C से -50°C तक गिर जाता है. भारी बर्फबारी से सड़कें बंद हो जाती हैं. दूर-दराज के पोस्ट महीनों तक अलग-थलग पड़ जाते हैं. द्रास में अभी हाल ही में सीजन की पहली बर्फबारी हुई है, जिससे इलाका बर्फ की चादर से ढक गया है.
एलओसी (पाकिस्तान के साथ नियंत्रण रेखा) और एलएसी (चीन के साथ वास्तविक नियंत्रण रेखा) पर जवान 14 से 18 हजार फीट की ऊंचाई पर तैनात रहते हैं, जहां हवा में ऑक्सीजन कम होती है. ठंड से सांस लेना भी मुश्किल हो जाता है.
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जवानों की चुनौतियां
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सेना कैसे तैयार रहती है?
भारतीय सेना ने सालों के अनुभव (सियाचिन, कारगिल) से मजबूत तैयारी की है...
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द्रास विंटर कार्निवल 'जश्न-ए-फतेह 2026'
हाल ही में भारतीय सेना ने द्रास में 'जश्न-ए-फतेह 2026' कार्निवल शुरू किया, जिसमें आइस हॉकी, तीरंदाजी और कल्चरल प्रोग्राम हैं. यह लोकल युवाओं को जोड़ने और सिविल-मिलिट्री रिश्ते मजबूत करने के लिए है. यह दिखाता है कि जवान सिर्फ ड्यूटी नहीं, बल्कि इलाके के विकास में भी योगदान देते हैं.
लद्दाख में भारतीय जवान प्रकृति की सबसे कठिन चुनौतियों से लड़ते हुए देश की सीमाओं की रक्षा कर रहे हैं. उनकी बहादुरी, अनुशासन और तैयारी से वे ठंड, बर्फ और दुश्मन दोनों से लड़ते हैं.
अशरफ वानी