चंडीगढ़ केस: गिरफ्तार तो हुआ, पर इन खामियों से बच सकता है विकास बराला

चंडीगढ़ में एक IAS अफसर की बेटी वर्णिका कुंडू के साथ हुए छेड़छाड़ के मामले में भारी दबाव के बाद पुलिसिया जांच तेज हो गई. इस केस के मुख्य आरोपी विकास बराला और उसके दोस्त को समन जारी करने के बाद पुलिस ने उन्हें गिरफ्तार कर लिया है. लेकिन सबसे बड़ा सवाल कि क्या आरोपियों को सजा हो पाएगी या फिर पहले की तरह वे जमानत पर रिहा हो जाएंगे. पुलिस ने उन्हें भले ही गिरफ्तार कर लिया, लेकिन क्या कोर्ट में आरोप साबित हो पाएंगे.

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पीड़िता वर्णिका कुंडू और आरोपी विकास बराला पीड़िता वर्णिका कुंडू और आरोपी विकास बराला

मुकेश कुमार

  • चंडीगढ़,
  • 09 अगस्त 2017,
  • अपडेटेड 3:18 PM IST

चंडीगढ़ में एक IAS अफसर की बेटी वर्णिका कुंडू के साथ हुए छेड़छाड़ के मामले में भारी दबाव के बाद पुलिसिया जांच तेज हो गई. इस केस के मुख्य आरोपी विकास बराला और उसके दोस्त को समन जारी करने के बाद पुलिस ने उन्हें गिरफ्तार कर लिया है. लेकिन सबसे बड़ा सवाल कि क्या आरोपियों को सजा हो पाएगी या फिर पहले की तरह वे जमानत पर रिहा हो जाएंगे. पुलिस ने उन्हें भले ही गिरफ्तार कर लिया, लेकिन क्या कोर्ट में आरोप साबित हो पाएंगे.

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कोर्ट में सबूत और तथ्यों के आधार पर ही कार्रवाही चलती है और आरोपी को सजा दी जाती है. वर्णिका केस में पुलिस ने शुरू से ही जिस तरह से लापरवाही दिखाई है, उसे देखकर तो लगता है कि आरोपी आसानी से बच निकल सकते हैं. पुलिस से सबसे पहली गलती मेडिकल जांच में हुई है. इस दौरान आरोपियों ने ब्लड और यूरिन सैंपल देने से इंकार कर दिया. यदि ब्लड और यूरिन सैंपल की जांच होती, तो नए तथ्य सामने आते. सीसीटीवी फुटेज मामले में भी लापरवाही हुई.

मेडिकल जांच: वर्णिका कुंडू की शिकायत पर पहुंची पुलिस ने आरोपी विकास बराला और उसके दोस्त आशीष को गिरफ्तार करके थाने ले आई. इसके बाद नियम के अनुसार उनका मेडिकल जांच करना था. पुलिस ने उन्हें मेडिकल के लिए भेजा, जहां आरोपियों ने ब्लड और यूरिन सैंपल देने से इंकार कर दिया. इसके बाद डॉक्टर ने उन्हें सूंघ कर और कुछ दूसरे तरीकों से ये पता किया कि वे शराब के नशे में भयंकर धुत हैं. मेडिकल जांच में भी ये बात सामने आई है, लेकिन क्या ये जांच कोर्ट में स्टैंड कर पाएगी, ये बड़ा सवाल है.

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गैर-जमानती धाराओं को हटना और जोड़ना: पुलिस ने वर्णिका की शिकायत पर पहले विकास  और उसके दोस्त के खिलाफ आईपीसी की धारा 354-डी, 341, 365, 511 और मोटर व्हिकल एक्ट की धारा 185 के तहत केस दर्ज किया था. लेकिन रात को 3 बजे धारा 365 और 511 को हटा दिया गया. इसे आज फिर जोड़ दिया गया. धारा 365 और 511 गैर-जमानती धाराएं हैं. अब पुलिस को कोर्ट में इस बात का जवाब देना होगा कि बार-बार धाराएं क्यों हटाई और जोड़ी गईं.

वास्तविक सीसीटीवी फुटेज का नहीं मिलना: इस वारदात में सबसे अहम सबूत सीसीटीवी फुटेज साबित हो सकता था, लेकिन पुलिस ने पहले बताया कि जिन इलाकों से पीड़ित और आरोपियों की कार गुजरी वहां के सीसीटीवी कैमरे खराब थे. हालांकि, बाद में पुलिस ने दावा कि पांच जगहों से उन्हें फुटेज मिल चुके हैं. लेकिन बरामद फुटेज न तो कार साफ नजर आ रही है, न ही उसका नंबर दिखाई दे रहा है. ऐसे में कोर्ट में साबित कर पाना मुश्किल होगा कि पीछा करने वाली कार विकास बराला की ही थी.

 

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