बिहार: 4 साल के मासूम की दी थी बलि, सास-बहू को कोर्ट ने दी फांसी की सजा

तीन साल पहले पड़ोसी के 4 साल के मासूम की सास-बहू ने मिलकर बलि चढ़ा दी थी. अब जाकर कोर्ट ने उन्हें फांसी की सजा सुना दी है. न्याय की आस जगाने वाला यह मामला बिहार के गोपालगंज जिले का है.

Advertisement
मानव बलि की दोषी महिलाएं (Photo:aajtak) मानव बलि की दोषी महिलाएं (Photo:aajtak)

सुनील कुमार तिवारी

  • गोपालगंज,
  • 18 अगस्त 2020,
  • अपडेटेड 12:32 PM IST

बिहार के गोपालगंज में न्याय की आस जगाने वाला एक मामला सामने आया है. यहां कोर्ट ने दो महिलाओं को फांसी की सजा सुना दी है जिन्होंने 3 साल पहले 4 साल के मासूम की बलि चढ़ाई थी.

गोपालगंज के विजयीपुर थाना के छितौना गांव के विनोद साह का चार साल का बेटा देव कुमार 5 सितंबर 2017 को दिन के करीब दो बजे अपने घर के दरवाजे के समीप खेल रहा था.

Advertisement

इस मासूम बच्चे की दी गई थी बलि

इसी बीच छितौना गांव की ही एक महिला, मासूम के पास पहुंची तथा उसे आइसक्रीम देने के बहाने उसके दरवाजे से बुलाकर साथ लेकर चली गई. काफी देर तक जब मासूम घर लौटकर नहीं आया तो परिवार के सदस्यों ने उसकी खोजबीन शुरू की. घंटों तलाश के बाद भी देव कुमार का कहीं भी सुराग नहीं मिला.

घटना के अगले दिन मासूम बच्चे का शव विनोद साह के घर के पिछले हिस्से में बरामद किया गया. घटना की सूचना मिलने के बाद मौके पर पहुंची पुलिस ने मासूम के शव के पास से ही खून लगा एक चाकू भी बरामद किया जिससे बच्चे की गला रेतकर हत्या की गई थी.

एफआईआर में सास-बहू बनीं आरोपी

इस घटना को लेकर विनोद साह के बयान पर विजयीपुर थाने में एफआईआर दर्ज की गई जिसमें इसी गांव के सरजू साह की पत्नी दुर्गावती देवी और उनकी बहू सनकेशा देवी को नामजद आरोपित बनाया गया.

Advertisement

एफआईआर दर्ज होने के बाद पुलिस ने तेजी से कार्रवाई करते हुए दोनों आरोपियों को गिरफ्तार कर जेल भेज दिया. इस आपराधिक मामले में आरोप पत्र आने के बाद सत्र न्यायालय में सुनवाई शुरू हुई.

साक्ष्यों के आधार पर सुनाई फांसी की सजा

सुनवाई के दौरान प्रस्तुत साक्ष्यों के आधार पर चतुर्थ अपर जिला एवं सत्र न्यायाधीश लवकुश कुमार के न्यायालय ने दोनों आरोपी महिलाओं को घटना के लिए दोषी करार देते हुए सोमवार को दुर्गावती देवी और सनकेशा देवी को फांसी की सजा सुनाई.

सुजा सुनाए जाने के बाद मृत बच्चे के पिता विनोद साह ने संतोष व्यक्त करते हुए कहा कि शुरू से ही मुझे न्याय मिलने की उम्मीद थी. आज साबित हो गया कि ईश्वर के घर में देर भले हो पर अंधेर नहीं.

Read more!
Advertisement

RECOMMENDED

Advertisement