श्रीनगर एयरपोर्ट पर पकड़े गए दो अमेरिकी नागरिकों का मामला महज एक सुरक्षा नियमों के उल्लंघन का मामला नहीं है, बल्कि इसे बड़ी अंतरराष्ट्रीय साजिश के तौर पर देखा जा रहा है. विदेशी नागरिकों के पास से बरामद सैटेलाइट फोन ने सुरक्षा एजेंसियों की चिंता बढ़ा दी है. क्योंकि इससे पहले भी यूक्रेन लिंक में विदेशी नागरिकों की गिरफ्तारी हो चुकी है, जिससे यह पूरा घटनाक्रम और ज्यादा संवेदनशील हो गया है.
श्रीनगर एयरपोर्ट पर यह मामला उस समय सामने आया जब सुरक्षा जांच के दौरान दो अमेरिकी नागरिकों को हिरासत में लिया गया. एयरपोर्ट पर रूटीन स्कैनिंग के दौरान उनके सामान की जांच की जा रही थी. इसी दौरान एक बैग में संदिग्ध डिवाइस मिलने पर सुरक्षा कर्मियों ने तुरंत कार्रवाई की. पूछताछ के दौरान उनके जवाब स्पष्ट नहीं थे, जिससे शक और गहरा गया. इसके बाद एयरपोर्ट सुरक्षा टीम ने दोनों को आगे की जांच के लिए पुलिस के हवाले कर दिया। फिलहाल यह मामला स्थानीय पुलिस और सुरक्षा एजेंसियों के पास है.
जांच के दौरान जिस बैग से डिवाइस बरामद हुआ, उसमें गार्मिन कंपनी का सैटेलाइट फोन मिला. यह फोन आम मोबाइल फोन से अलग होता है और सीधे सैटेलाइट से कनेक्ट होकर काम करता है. भारत में बिना अनुमति ऐसे फोन रखना गैरकानूनी है. खासतौर पर कश्मीर जैसे संवेदनशील इलाके में इस तरह के उपकरण मिलने को गंभीर सुरक्षा खतरे के तौर पर देखा जाता है. इसी वजह से अधिकारियों ने मामले को हल्के में नहीं लिया और तुरंत कार्रवाई की.
जिस अमेरिकी नागरिक के बैग से सैटेलाइट फोन मिला, उसकी पहचान जेफरी स्कॉट के रूप में हुई है. वह अमेरिका के मोंटाना राज्य का रहने वाला बताया जा रहा है. मोंटाना एक पहाड़ी इलाका है, जहां अक्सर एडवेंचर और आउटडोर गतिविधियां होती हैं. हालांकि अभी तक यह साफ नहीं हो पाया है कि जेफरी स्कॉट और उसका साथी श्रीनगर किस मकसद से आए थे. उनके पास यह डिवाइस क्यों था, इस पर भी जांच चल रही है.
सुरक्षा एजेंसियों का कहना है कि यह पहली बार नहीं है जब किसी विदेशी नागरिक को भारत में सैटेलाइट फोन के साथ पकड़ा गया हो. कई बार विदेशी पर्यटक अनजाने में ऐसे उपकरण लेकर भारत आ जाते हैं, जबकि यहां इसके लिए विशेष अनुमति जरूरी होती है. लेकिन कश्मीर जैसे संवेदनशील क्षेत्र में इस तरह की लापरवाही को भी गंभीर खतरे के रूप में देखा जाता है, इसलिए हर मामले में विस्तृत जांच की जाती है.
पहले भी सामने आया था ऐसा मामला
इस घटना को हाल ही में सामने आए एक बड़े अंतरराष्ट्रीय केस से भी जोड़कर देखा जा रहा है. 13 मार्च 2026 को मिजोरम में छह यूक्रेनी नागरिकों को हिरासत में लिया गया था. उन पर आरोप था कि उन्होंने बिना अनुमति प्रतिबंधित क्षेत्र में प्रवेश किया था और भारत-म्यांमार सीमा को अवैध रूप से पार किया था. हालांकि यूक्रेन सरकार का कहना था कि इन नागरिकों के खिलाफ अभी तक कोई ठोस सबूत नहीं मिला है.
इसी मामले में एक अमेरिकी नागरिक मैथ्यू वैनडाइक का नाम भी सामने आया था. उसे भी भारतीय एजेंसियों ने हिरासत में लिया था. बताया गया कि वह एक इंटरनेशनल सिक्योरिटी एनालिस्ट और पूर्व फाइटर रह चुका है. उसने सन्स ऑफ़ लिबर्टी इंटरनेशनल नाम की संस्था भी बनाई थी, जो सुरक्षा प्रशिक्षण से जुड़ी बताई जाती है.
नेशनल इन्वेस्टिगेशन एजेंसी (NIA) ने इस केस में छह यूक्रेनी और एक अमेरिकी नागरिक को गिरफ्तार किया था. जांच में सामने आया कि यूक्रेनी नागरिक ड्रोन एक्सपर्ट थे और उनके पास अत्याधुनिक यूरोपीय ड्रोन और हथियार मिले थे. आरोप है कि ये लोग म्यांमार के रास्ते आतंकी संगठनों को ट्रेनिंग देने जा रहे थे. एजेंसियों का मानना है कि इसका असर भारत के पूर्वोत्तर राज्यों पर भी पड़ सकता था.
इस पूरे घटनाक्रम को अंतरराष्ट्रीय राजनीति के नजरिए से भी देखा जा रहा है. म्यांमार इस समय एशिया का बड़ा जियोपॉलिटिकल हॉटस्पॉट बना हुआ है. यहां अलग-अलग शक्तियां अपने प्रभाव को बढ़ाने की कोशिश कर रही हैं. माना जा रहा है कि कुछ विदेशी समूह यहां के हालात का फायदा उठाकर क्षेत्र को अस्थिर करने की योजना बना रहे हैं. भारत के लिए यह एक बड़ी सुरक्षा चुनौती बनता जा रहा है.
इस केस को खालिस्तानी आतंकी गुरपतवंत पन्नू से जुड़े विवाद से भी जोड़ा जा रहा है. अमेरिका में निखिल गुप्ता की गिरफ्तारी के बाद दोनों देशों के बीच संवेदनशील मुद्दे सामने आए थे. ऐसे में भारत में किसी अमेरिकी नागरिक की संदिग्ध गतिविधि को लेकर मामला और ज्यादा गंभीर हो जाता है. हालांकि इस पूरे मामले पर भारत स्थित अमेरिकी दूतावास ने कोई आधिकारिक टिप्पणी नहीं की है.
सैटेलाइट फोन के साथ पकड़ा गया था विदेशी डॉक्टर
इससे पहले भी पुडुचेरी एयरपोर्ट पर एक अमेरिकी डॉक्टर को सैटेलाइट फोन के साथ पकड़ा गया था. उसे फ्लाइट में बैठने से रोक दिया गया और जांच शुरू की गई. इसी तरह एक चीनी नागरिक और एक ब्रिटिश अधिकारी को भी बिना अनुमति सैटेलाइट उपकरण रखने के मामले में गिरफ्तार किया जा चुका है. इन घटनाओं से साफ है कि भारत में ऐसे उपकरणों को लेकर सख्त नियम लागू हैं और सुरक्षा एजेंसियां हर मामले को बेहद गंभीरता से लेती हैं.
परवेज़ सागर