पुलिस एंड इंटेलिजेंस

उत्तराखंड के कोटद्वार में बनाए जा रहे थे नकली रेमडेसिविर इंजेक्शन, दिल्ली पुलिस ने ऐसे किया पर्दाफाश

हिमांशु मिश्रा
  • नई दिल्ली,
  • 30 अप्रैल 2021,
  • अपडेटेड 7:55 PM IST
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कोरोना महामारी के दौरान रेमडेसिविर इंजेक्शन की बढ़ती मांग ने कालाबाजारी करने वाले के लिए आपदा को अवसर में बदल दिया है. देशभर से इस इंजेक्शन की ब्लैकमार्केटिंग, तस्करी और नकली बनाए जाने की खबरें आ रही हैं. पुलिस ने देश के अलग-अलग हिस्सों से ऐसे लोगों को गिरफ्तार किया है, जो रेमडेसिविर की कालाबाजारी कर रहे हैं. यहां तक कि अब नकली इंजेक्शन बनाने वाले भी पुलिस के हाथ लग गए हैं.  

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दिल्ली पुलिस की क्राइम ब्रांच ने उत्तराखंड के कोटद्वार में छापा मारकर एक नकली रेमडेसिविर बनाने वाली एक फैक्ट्री का भंडाफोड़ किया है. पुलिस ने फैक्ट्री से 198 पूरी तरह से पैक रेमडेसिविर की 3 हजार शीशियां, पैकिंग का सामान और दवाएं बनाने का सामान, कंप्यूटर, रेमडेसिविर के रैपर आदि भारी मात्रा में बरामद किए हैं.  

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क्राइम ब्रांच ने 23 अप्रैल को रेमडेसिविर की कालाबाजारी में जुटे मनोज झा और शोएब को गिरफ्तार किया था. इन दोनों से पूछताछ में पता चला कि उन्होंने जलगांव के रहने वाले पुष्कर नामक शख्स से रेमडेसिविर लिए थे. इसके बाद पुलिस ने पुष्कर को भी गिरफ्तार कर लिया. पुलिस के हाथ पुष्कर का एक साथी मनीष गोयल भी लग गया, जो इस कालाबाजारी में लिप्त था.

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पुष्कर और मनीष ने पुलिस को बताया कि उन्हें ये इंजेक्शन दिल्ली की रहने वाली एक महिला साधना शर्मा ने दिए थे. अब पुलिस उस जगह नहीं पहुंच पा रही थी, जहां से रेमडेसिविर की सप्लाई की जा रही थी. फिर 26 अप्रैल को साधना शर्मा भी गिरफ्तार हो गई. साधना शर्मा ने पुलिस को बताया कि उसे हरिद्वार के रहने वाले वतन सैनी नाम के एक शख्स ने रेमडेसिविर दिए थे. पुलिस की टीम हरिद्वार पहुंची और वहां छापा मारकर वतन सैनी को गिरफ्तार कर लिया.

वतन ने पुलिस को बताया कि पूरे गोरखधंधे का मास्टरमाइंड आदित्य गौतम नाम का शख्स है. वो कोटद्वार इलाके में एक फैक्ट्री चलाता है. वहीं नकली रेमडेसिविर इंजेक्शन बन रहे हैं. और वहां से सप्लाई होते हैं. 

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वतन सैनी की निशानदेही पर पुलिस ने कोटद्वार में दबिश दी और वहां से आदित्य गौतम को गिरफ्तार कर लिया. आदित्य गौतम बी फार्मा है. वो एमबीए भी कर चुका है. उसकी अपनी एक फैक्ट्री थी. जहां वो रेमडेसिविर इंजेक्शन बना रहा था. पुलिस का कहना है कि वो कुछ एंटीबायोटिक दवाइयों को मिला कर रेमडेसिविर इंजेक्शन बना रहे थे. अब नकली इंजेक्शन के सैंपल को फॉरेंसिक जांच के लिए भेजा गया है. जांच के बाद ही साफ हो पाएगा की शीशियों  के अंदर क्या भरा था. वह लोगों के लिए कितना खतरनाक था.

जानकारी के मुताबिक ये गिरोह अब तक दो हजार के करीब रेमडेसिविर इंजेक्शन बाजार में बेच चुका है. हालांकि पुलिस का कहना है कि आंकड़ा और भी ज्यादा हो सकता है. क्राइम ब्रांच की डीसीपी मोनिका भारद्वाज ने बताया कि आरोपियों से पूछताछ जारी है. कई इलाकों में अभी भी छापेमारी चल रही है.

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