महाराष्ट्र: उल्हासनगर में महिलाओं को अर्धनग्न कर पहनाई चप्पलों की माला, 2 किमी तक सड़क पर घुमाया

उल्हासनगर की इस घटना ने सामाजिक बहिष्कार, भीड़ हिंसा और महिलाओं की सुरक्षा को लेकर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं. वायरल वीडियो के बाद प्रशासन पर सख्त कार्रवाई का दबाव बढ़ गया है. पीड़ित परिवार दहशत में हैं, जबकि पुलिस फरार आरोपियों की तलाश में लगातार छापेमारी कर रही है.

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महिलाओं के साथ हो रही मारपीट के दौरान लोग तमाशबीन बने रहे (Photo-Screengrab) महिलाओं के साथ हो रही मारपीट के दौरान लोग तमाशबीन बने रहे (Photo-Screengrab)

मिथिलेश गुप्ता

  • उल्हासनगर,
  • 17 मई 2026,
  • अपडेटेड 3:48 AM IST

महाराष्ट्र के ठाणे जिले के उल्हासनगर से इंसानियत को तार-तार और कानून-व्यवस्था को ठेंगा दिखाने वाली एक बेहद सनसनीखेज व अमानवीय घटना सामने आई है. उल्हासनगर कैंप-3 इलाके में पुलिस में शिकायत दर्ज कराने की रंजिश को लेकर दबंगों ने एक ही परिवार की महिलाओं के साथ हैवानियत की. 

पीड़ित महिलाओं के सरेराह बाल काटे गए, उनके कपड़े फाड़कर उन्हें अर्धनग्न किया गया और गले में जूतों-चप्पलों की माला डालकर करीब दो किलोमीटर तक सड़क पर उनका जुलूस निकाला गया. इस पूरी घटना का वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल होने के बाद इलाके में भारी आक्रोश है.

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स्थानीय सूत्रों और पुलिस में दर्ज शिकायत के अनुसार, यह पूरा विवाद उल्हासनगर के वाघरी नगर इलाके का है. कुछ समय पहले स्थानीय जात पंचायत ने एक तुगलकी फरमान सुनाते हुए एक पीड़ित परिवार के लोगों का सामाजिक बहिष्कार कर दिया था और उनके मंदिर प्रवेश पर पाबंदी लगा दी थी. लेकिन यह परिवार इस सामाजिक अन्याय के आगे झुकने को तैयार नहीं था.

घटना वाले दिन परिसर के मंदिर में एक धार्मिक कार्यक्रम और भंडारे का आयोजन था. पीड़ित परिवार के एक युवक ने इस पाबंदी का विरोध करते हुए कहा, "हमारा क्या कसूर है, हम मंदिर क्यों नहीं आ सकते?" और वह मंदिर परिसर में पहुंच गया. युवक का मंदिर जाना वहां मौजूद वाघरी समुदाय के कुछ रसूखदार लोगों को नागवार गुजरा.

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घर में घुसकर लाठी-डंडों से हमला
युवक के कदम से भड़के आरोपियों ने लाठी-डंडों के साथ पीड़ित परिवार के घर पर धावा बोल दिया. घर के पुरुषों को बेरहमी से पीटने के बाद आरोपियों ने परिवार की महिलाओं को भी निशाना बनाया. आरोपियों ने जाते-जाते धमकी दी कि अगर पुलिस के पास गए तो अंजाम और भी बुरा होगा.

शुक्रवार सुबह करीब 10 बजे, फरियादी कांता प्रेम राजपूत (50), अपनी बहन गीता राजपूत और बेटी अंजलि के साथ इस हमले की शिकायत दर्ज कराने 'मध्यवर्ती पुलिस थाने' जा रही थीं. तभी रास्ते में हडकमाता चौक के पास आरोपियों ने उन्हें घेर लिया. इसके बाद आरोपियों ने महिलाओं को बीच सड़क पर घसीटा, उनके कपड़े फाड़कर उन्हें अर्धनग्न कर दिया और कैंची से उनके बाल काट दिए.

तमाशबीन बने रहे लोग, बनाते रहे वीडियो
इतने से भी जब मन नहीं भरा, तो पीड़ितों के गले में जूतों-चप्पलों की माला डाल दी गई और करीब दो किलोमीटर दूर विठ्ठलवाड़ी स्टेशन परिसर तक सड़क पर उनका अपमानजनक जुलूस निकाला गया. इस दौरान आरोपियों ने पीड़ितों को कई लोगों के पैर छूने के लिए भी मजबूर किया.

इस पूरी बर्बरता के दौरान सड़क पर भारी भीड़ मौजूद थी, लेकिन कोई भी एक इंसान उन बेबस महिलाओं की मदद के लिए आगे नहीं आया. लोग मूकदर्शक बने रहे और मोबाइल से वीडियो बनाते रहे. अपमान और दर्द से कराहता हुआ पीड़ित परिवार जब विठ्ठलवाड़ी पुलिस स्टेशन पहुंचा, तो आरोप है कि पुलिस ने शुरुआत में मामले को गंभीरता से नहीं लिया और हल्की धाराएं लगाईं. हालांकि, वीडियो वायरल होने और तनाव बढ़ने के बाद मध्यवर्ती पुलिस ने मुख्य आरोपियों- ज्युली वाघरी, विणू वाघरी, पप्पी वाघरी, नितिन थोरात, रोहित वाघरी, सोनू उर्फ बालू वाघरी, महेश वाघरी और अन्य के खिलाफ भारतीय न्याय संहिता (BNS) 2023 की गंभीर धाराओं के तहत मामला दर्ज किया है.

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उल्हासनगर के एसीपी (ACP) शैलेश काले के मुताबिक, मामले में दो महिला आरोपियों को गिरफ्तार कर लिया गया है, जबकि मुख्य आरोपी और अन्य पुरुष आरोपी अभी भी फरार हैं जिनकी तलाश में पुलिस टीमें छापेमारी कर रही हैं. इलाके में तनाव को देखते हुए अतिरिक्त पुलिस बल तैनात किया गया है.

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