अबू सलेम को सुप्रीम कोर्ट से बड़ा झटका, अंडरवर्ल्ड डॉन के इस 'अरमान' पर फिरा पानी!

गैंगस्टर अबू सलेम को सुप्रीम कोर्ट से राहत नहीं मिली है. कोर्ट ने सोमवार को उसकी उस याचिका पर सुनवाई से इनकार कर दिया, जिसमें उसने दावा किया था कि वह 25 साल की सजा पूरी कर चुका है. 10 महीने से अधिक समय से गैर-कानूनी कस्टडी में है.

Advertisement
अबू सलेम ने कहा कि वो 25 साल की सजा पूरी कर चुका है, उसकी हिरासत कानून के खिलाफ है. (File Photo: ITG) अबू सलेम ने कहा कि वो 25 साल की सजा पूरी कर चुका है, उसकी हिरासत कानून के खिलाफ है. (File Photo: ITG)

aajtak.in

  • नई दिल्ली,
  • 16 फरवरी 2026,
  • अपडेटेड 5:14 PM IST

साल 1993 के मुंबई सीरियल ब्लास्ट केस में दोषी अबू सलेम ने सुप्रीम कोर्ट में दावा किया कि वो 25 साल की सजा पूरी कर चुका है. पिछले 10 महीने से गैर-कानूनी हिरासत में है. सुप्रीम कोर्ट ने फिलहाल राहत देने से इनकार करते हुए उसे बॉम्बे हाई कोर्ट में अंतिम बहस करने को कहा है.

अबु सलेम ने बॉम्बे हाई कोर्ट के जुलाई 2025 के आदेश को चुनौती दी थी. हाई कोर्ट ने कहा था कि पहली नजर में ऐसा प्रतीत नहीं होता कि 25 साल की सजा पूरी हो चुकी है. सलेम को मुंबई सीरियल ब्लास्ट मामले में दोषी ठहराया गया था. इसके बाद उसे सजा सुनाई गई थी.

Advertisement

11 नवंबर 2005 को लंबी कानूनी प्रक्रिया के बाद उसे पुर्तगाल से भारत प्रत्यर्पित किया गया था. भारत और पुर्तगाल के बीच हुई प्रत्यर्पण संधि के तहत यह शर्त तय हुई थी कि उसे मौत की सजा नहीं दी जाएगी. इसके साथ ही जेल में रहने की सजा 25 साल से अधिक नहीं होगी.

जस्टिस विक्रम नाथ और जस्टिस संदीप मेहता की बेंच के सामने अबु सलेम के वकील ने दलील दी कि महाराष्ट्र प्रिजन्स रिमिशन सिस्टम रूल्स, 1962 के तहत अच्छे बर्ताव की छूट जोड़कर देखा जाए तो वह 25 साल की सजा काट चुका है. 10 महीने से गैर-कानूनी हिरासत में है.

सुप्रीम कोर्ट ने साफ किया कि हाई कोर्ट ने केवल अंतरिम राहत देने से इनकार किया है और अंतिम निर्णय अभी बाकी है. कोर्ट ने यह भी कहा कि एफिडेविट पर विचार करने के बाद हाई कोर्ट फैसला करेगा. सुनवाई के दौरान सलेम के वकील ने अंक गणित की गलती का जिक्र किया.

Advertisement

पिछले साल जेल इंस्पेक्टर जनरल द्वारा दायर एफिडेविट में गलती हुई थी. लेकिन सुप्रीम कोर्ट ने रिकॉर्ड पर मौजूद एफिडेविट का हवाला देते हुए कहा कि उसमें अबु सलेम द्वारा करीब 19 साल की सजा काटने का उल्लेख है. वकील ने दोहराया कि उनका मुवक्किल 25 साल की सजा पूरी कर चुका है.

इस पर जस्टिस विक्रम नाथ ने कहा कि अबु सलेम को TADA के तहत दोषी ठहराया गया था और 25 साल की सजा दी गई थी. अंततः बेंच ने याचिका को वापस लेते हुए खारिज कर दिया और सलेम को हाई कोर्ट में लंबित मामले की शीघ्र सुनवाई के लिए आवेदन करने की छूट दी.

गौरतलब है कि 12 जनवरी को इसी मामले की सुनवाई के दौरान सुप्रीम कोर्ट ने अबु सलेम से अपने दावे को सही ठहराने को कहा था कि उसने 25 साल जेल में बिताए हैं. कोर्ट ने तब संकेत दिया था कि यदि यह साबित हो जाता है तो रिहाई पर विचार किया जा सकता है.

साल 2022 में एक अलग याचिका पर सुप्रीम कोर्ट ने कहा था कि केंद्र सरकार पुर्तगाल को दिए गए आश्वासन का सम्मान करने और 25 साल की सजा पूरी होने पर सलेम की रिहाई के लिए बाध्य है. इस बीच, साल 2015 में TADA कोर्ट ने प्रदीप जैन हत्याकांड में भी उम्रकैद की सजा दी थी.

---- समाप्त ----

Read more!
Advertisement

RECOMMENDED

Advertisement
Latest News in Hindi »