दाऊद इब्राहिम के करीबी सलीम डोला पर कसा ED का शिकंजा, मुंबई-गुजरात में 20 ठिकानों पर छापेमारी

दाऊद इब्राहिम के करीबी और ड्रग तस्कर सलीम डोला के नेटवर्क पर ED ने बड़ी कार्रवाई करते हुए मुंबई, सूरत, अंकलेश्वर और राजकोट में 20 ठिकानों पर छापेमारी की है. ईडी की जांच में हवाला, मनी लॉन्ड्रिंग और बेनामी संपत्तियों के बड़े नेटवर्क का खुलासा हुआ है. पढ़ें पूरी कहानी.

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ड्रग तस्कर सलीम डोला को तुर्की से भारत लाया गया था (फोटो-ITG) ड्रग तस्कर सलीम डोला को तुर्की से भारत लाया गया था (फोटो-ITG)

दिव्येश सिंह

  • मुंबई,
  • 02 जून 2026,
  • अपडेटेड 2:26 PM IST

प्रवर्तन निदेशालय (ED) ने अंडरवर्ल्ड डॉन दाऊद इब्राहिम के करीबी और अंतरराष्ट्रीय ड्रग तस्कर सलीम इस्माइल डोला के नेटवर्क पर बड़ी कार्रवाई शुरू की है. मुंबई जोनल ऑफिस की टीम ने मुंबई, सूरत, अंकलेश्वर और राजकोट समेत 20 ठिकानों पर एक साथ छापेमारी की है. यह कार्रवाई मनी लॉन्ड्रिंग और अंतरराष्ट्रीय ड्रग तस्करी से जुड़े मामले में की जा रही है.

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ED की यह कार्रवाई मादक पदार्थों की तस्करी से जुड़े उस अंतरराष्ट्रीय सिंडिकेट के खिलाफ है, जिसका संचालन सलीम इस्माइल डोला और उसके सहयोगी करते थे. जांच एजेंसी के मुताबिक यह नेटवर्क कई देशों तक फैला हुआ था और हजारों करोड़ रुपये के ड्रग कारोबार से जुड़ा हुआ है. हाल ही में भारत सरकार ने सलीम डोला को तुर्किये (तुर्की) से प्रत्यर्पित कर भारत लाया था.

सलीम डोला को भगोड़े आतंक वित्तपोषक दाऊद इब्राहिम का करीबी सहयोगी माना जाता है. जांच एजेंसियों का दावा है कि वह लंबे समय से अंतरराष्ट्रीय स्तर पर ड्रग तस्करी का नेटवर्क चला रहा था. उसके नेटवर्क के जरिए बड़े पैमाने पर प्रतिबंधित मादक पदार्थों की तस्करी की जाती थी, जिससे भारी अवैध कमाई होती थी.

ED की छापेमारी उन लोगों और संस्थानों पर केंद्रित है, जो इस पूरे नेटवर्क का हिस्सा रहे हैं. इनमें ड्रग्स बनाने में इस्तेमाल होने वाले प्रीकर्सर केमिकल्स के सप्लायर, केमिकल कारोबार से जुड़े बिचौलिए, सिंथेटिक ड्रग मेफेड्रोन (MD) के निर्माता और वितरक शामिल हैं. इसके अलावा हवाला ऑपरेटरों और बेनामी संपत्तियों के मालिकों को भी जांच के दायरे में लिया गया है.

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यह मनी लॉन्ड्रिंग जांच प्रिवेंशन ऑफ मनी लॉन्ड्रिंग एक्ट (PMLA), 2002 के तहत शुरू की गई है. इसकी शुरुआत मुंबई में सलीम डोला और अन्य आरोपियों के खिलाफ दर्ज कई FIR के आधार पर हुई थी. इन मामलों में नारकोटिक ड्रग्स और साइकोट्रॉपिक पदार्थों की अवैध तस्करी के आरोप लगाए गए हैं.

जांच के दौरान ED को एक बेहद संगठित और अंतरराष्ट्रीय आपराधिक नेटवर्क के सबूत मिले हैं. एजेंसी के अनुसार यह गिरोह प्रीकर्सर केमिकल्स की खरीद, गुप्त रूप से मेफेड्रोन (MD) का निर्माण, राज्यों के बीच ड्रग्स की सप्लाई और विदेशों में तस्करी जैसे कामों में शामिल था. इसके जरिए बड़ी मात्रा में अवैध धन अर्जित किया जाता था.

जांच में यह भी सामने आया है कि अपराध से अर्जित धन को हवाला चैनलों के जरिए इधर-उधर भेजा जाता था ताकि उसकी असली पहचान छिपाई जा सके. इस धन को विभिन्न लोगों और सहयोगियों के नाम पर चल-अचल संपत्तियां खरीदने में लगाया गया. कई निवेश बेनामी नामों से किए जाने के भी संकेत मिले हैं.

ED की टीम फिलहाल पूरे नेटवर्क की वित्तीय गतिविधियों की गहन जांच कर रही है. जांच का दायरा केमिकल फैक्ट्रियों से लेकर वित्तीय लेन-देन कराने वाले लोगों तक फैला हुआ है. इसमें अकाउंटेंट, चार्टर्ड अकाउंटेंट (CA) और अन्य वित्तीय सलाहकारों की भूमिका भी खंगाली जा रही है.

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एजेंसी यह भी पता लगाने में जुटी है कि हवाला के जरिए भेजी गई रकम का इस्तेमाल भारत और विदेशों में संपत्तियां खरीदने में कैसे किया गया. छापेमारी के दौरान दस्तावेज, वित्तीय रिकॉर्ड और अन्य डिजिटल सबूत जुटाए जा रहे हैं. माना जा रहा है कि इस कार्रवाई से ड्रग तस्करी और मनी लॉन्ड्रिंग के बड़े अंतरराष्ट्रीय नेटवर्क का पर्दाफाश हो सकता है.

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