अविमुक्तेश्वरानंद पर लगे यौन शोषण मामले में आजतक की एक्सक्लूसिव जांच में एक अहम सच सामने आया है. मामला उन पीड़ित बच्चों से जुड़ा है, जिनको लेकर लगातार सवाल उठाए जा रहे थे. खास तौर पर स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद की ओर से यह दावा किया जा रहा था कि बच्चों को बाल कल्याण समिति के सामने पेश नहीं किया गया. आरोप यह भी था कि बच्चों को कोई “लेकर घूम रहा है.” इन दावों ने पूरे मामले को संवेदनशील बना दिया था. लेकिन जब आधिकारिक रिकॉर्ड की पड़ताल की गई तो तस्वीर कुछ और ही निकली.
क्या था स्वामी का दावा?
स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद लगातार सार्वजनिक मंचों पर यह कहते रहे कि पीड़ित बच्चों को कानूनी प्रक्रिया से नहीं गुजारा गया. उनका आरोप था कि बच्चों का बयान बाल कल्याण समिति के सामने दर्ज नहीं हुआ. उन्होंने यह भी कहा कि बच्चों की स्थिति स्पष्ट नहीं है. इन बयानों से यह संकेत देने की कोशिश हुई कि प्रशासन ने नियमों का पालन नहीं किया. यही दावा चर्चा और विवाद का कारण बना. लेकिन सवाल यह था कि असल में रिकॉर्ड क्या कहता है.
CWC के रिकॉर्ड ने बताई पूरी सच्चाई
जब आधिकारिक दस्तावेजों और प्रक्रिया की जांच की गई तो स्पष्ट हुआ कि बच्चों को विधिवत रूप से बाल कल्याण समिति (CWC) के समक्ष पेश किया गया था. समिति के सामने बच्चों के बयान दर्ज किए गए. पूरी प्रक्रिया कानूनी प्रावधानों के तहत पूरी की गई. दस्तावेजों में यह दर्ज है कि पुलिस ने नियमानुसार बच्चों को CWC के सामने प्रस्तुत किया. यानी रिकॉर्ड में कहीं भी लापरवाही या नियम तोड़ने का संकेत नहीं मिला.
पुलिस ने निभाई कानूनी जिम्मेदारी
जांच में यह भी सामने आया कि पुलिस ने तय प्रक्रिया का पालन किया. बच्चों को संरक्षण में लेकर उन्हें बाल कल्याण समिति के सामने पेश किया गया. समिति की निगरानी में बयान दर्ज हुए. इसके बाद समिति के निर्देशों के अनुसार आगे की कार्रवाई की गई. यह पूरा कदम बाल संरक्षण कानूनों के अनुरूप था. आधिकारिक रिकॉर्ड इस बात की पुष्टि करता है कि प्रक्रिया पारदर्शी और नियमों के तहत पूरी हुई.
माता-पिता को सौंपे गए बच्चे
कानूनी प्रक्रिया पूरी होने के बाद बच्चों को उनके माता-पिता के सुपुर्द कर दिया गया. यह भी दस्तावेजों में दर्ज है कि बच्चों की सुरक्षा को प्राथमिकता दी गई. वर्तमान में बच्चे अपने परिवार के साथ सुरक्षित रह रहे हैं. किसी भी तरह की अवैध हिरासत या गायब होने की बात रिकॉर्ड में नहीं पाई गई. इससे यह साफ होता है कि प्रशासनिक स्तर पर बच्चों की सुरक्षा सुनिश्चित की गई.
सुरक्षित हैं बच्चे, दे रहे हैं परीक्षाएं
सबसे अहम तथ्य यह है कि बच्चे सामान्य जीवन की ओर लौट चुके हैं. वे अपने परिवार के साथ रह रहे हैं और नियमित रूप से अपनी परीक्षाएं भी दे रहे हैं. यह जानकारी इस बात का संकेत है कि बच्चों की स्थिति स्थिर और सुरक्षित है. ऐसे में CWC के रिकॉर्ड और आधिकारिक दस्तावेज स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद के दावों से अलग कहानी बयां करते हैं. आजतक की इस एक्सक्लूसिव पड़ताल ने पूरे मामले की सच्चाई को दस्तावेजी आधार पर सामने रख दिया है.
आशीष श्रीवास्तव