आगरा: 25 साल से फरार लुटेरा AI की मदद से गिरफ्तार, पुरानी तस्वीर ने खोला आरोपी का राज

आगरा में 2002 की लूट के मामले में 25 साल से फरार चल रहे आरोपी सैमुअल को पुलिस ने AI तकनीक की मदद से दिल्ली से गिरफ्तार कर लिया. पुरानी तस्वीर और सोशल मीडिया ट्रैकिंग ने आरोपी तक पहुंचने में अहम भूमिका निभाई. पढ़ें ये दिलचस्प कहानी.

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यह गिरफ्तारी आगरा पुलिस के लिए बड़ी कामयाबी है (फोटो-ITG) यह गिरफ्तारी आगरा पुलिस के लिए बड़ी कामयाबी है (फोटो-ITG)

aajtak.in

  • आगरा,
  • 03 जून 2026,
  • अपडेटेड 8:02 PM IST

आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) अब अपराधियों को पकड़ने में भी पुलिस का बड़ा हथियार बनता जा रहा है. आगरा पुलिस ने 25 साल से फरार चल रहे एक लूट के आरोपी को AI तकनीक की मदद से गिरफ्तार कर लिया. आरोपी की पहचान सैमुअल के रूप में हुई है, जो वर्ष 2002 में हुई एक बड़ी लूट के मामले में वांछित था और लंबे समय से पुलिस की गिरफ्त से बाहर था.

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पुलिस के मुताबिक, 8 नवंबर 2002 को आगरा के लोहामंडी इलाके में 1.75 लाख रुपये की लूट की वारदात हुई थी. इस मामले में सैमुअल और उसके दो साथी शामिल थे. बाद में उसके दोनों साथियों को गिरफ्तार कर लिया गया, लेकिन सैमुअल लगातार पुलिस को चकमा देता रहा और उसका कोई सुराग नहीं मिल पाया.

डीसीपी सिटी अली अब्बास ने बताया कि सैमुअल की गिरफ्तारी पर 50 हजार रुपये का इनाम घोषित था. घटना के बाद वह अचानक गायब हो गया था. वर्षों तक पुलिस ने उसकी तलाश की, लेकिन उसके ठिकाने के बारे में कोई जानकारी नहीं मिल सकी. जांचकर्ताओं के पास केवल उसकी करीब 25 साल पुरानी एक तस्वीर मौजूद थी.

पुलिस ने इसी पुरानी तस्वीर को AI तकनीक की मदद से प्रोसेस किया. आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस के जरिए आरोपी के संभावित नए चेहरे की तस्वीरें तैयार की गईं और फिर सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स पर उसकी तलाश शुरू की गई. इस दौरान पुलिस को एक ऐसी तस्वीर मिली, जो काफी हद तक सैमुअल से मेल खाती थी.

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इसके बाद पुलिस ने उससे जुड़े कई सोशल मीडिया अकाउंट्स और डिजिटल गतिविधियों की जांच की. जांच के दौरान एक अहम सुराग हाथ लगा, जब दिल्ली में सैमुअल की पत्नी के नाम पर रजिस्टर्ड एक कार का ट्रैफिक चालान मिला. इसी चालान से पुलिस को आरोपी तक पहुंचने का रास्ता मिला.

चालान से मिली जानकारी के आधार पर पुलिस की एक टीम दिल्ली पहुंची और करीब एक महीने तक निगरानी करती रही. लगातार सर्विलांस के बाद पुलिस ने आरोपी की गतिविधियों का पता लगाया. आखिरकार 1 जून को उसे दिल्ली के नांगलोई इलाके से गिरफ्तार कर लिया गया.

पुलिस अधिकारियों के अनुसार गिरफ्तारी से बचने के लिए सैमुअल लगातार अपनी पहचान, नाम और ठिकाने बदलता रहा. वह वर्षों तक अलग-अलग जगहों पर छिपकर रहता रहा और पिछले कुछ सालों से दिल्ली में बदली हुई पहचान के साथ रह रहा था. अब AI तकनीक की मदद से पुलिस ने उसके 25 साल पुराने फरारी के सफर का अंत कर दिया.

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