बस्तर में 1.61 करोड़ के इनामी 51 नक्सलियों का सरेंडर, हथियारों का बड़ा जखीरा बरामद

बस्तर डिवीजन में नक्सल मोर्चे पर बड़ी सफलता मिली है. बीजापुर और सुकमा जिलों में कुल 51 नक्सलियों ने पुलिस के सामने आत्मसमर्पण कर दिया है, जिन पर 1.61 करोड़ रुपए का इनाम घोषित था. वहीं गरियाबंद में नक्सली ठिकानों से भारी मात्रा में हथियार और विस्फोटक भी बरामद किए गए हैं.

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राष्ट्रपति और गृहमंत्री के दौरे के बीच बस्तर डिविजन में नक्सल मोर्चे पर बड़ी कामयाबी. (Photo: ITG) राष्ट्रपति और गृहमंत्री के दौरे के बीच बस्तर डिविजन में नक्सल मोर्चे पर बड़ी कामयाबी. (Photo: ITG)

aajtak.in

  • रायपुर,
  • 07 फरवरी 2026,
  • अपडेटेड 7:39 PM IST

छत्तीसगढ़ के बस्तर डिवीजन में नक्सल विरोधी अभियान के दौरान सुरक्षा बलों को बड़ी कामयाबी हासिल हुई है. शनिवार को बस्तर के दो जिलों में कुल 51 नक्सलियों ने सरेंडर कर दिया. इन सभी पर कुल मिलाकर 1.61 करोड़ रुपए का इनाम घोषित था. सरेंडर करने वालों में बड़ी संख्या में महिलाएं शामिल हैं.

बस्तर रेंज के पुलिस महानिरीक्षक सुंदरराज पट्टिलिंगम ने बताया कि यह आत्मसमर्पण ऐसे समय पर हुआ है, जब राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू बस्तर जिले के मुख्यालय जगदलपुर में बस्तर पंडुम 2026 फेस्टिवल का उद्घाटन कर रही थीं. इसके साथ ही केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह तीन दिन के दौरे पर रायपुर पहुंचे हुए हैं.

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बीजापुर जिले में 20 महिलाओं समेत 30 नक्सलियों ने हथियार छोड़कर मुख्यधारा में लौटने का फैसला किया. वहीं सुकमा जिले में 14 महिला सदस्यों सहित 21 अन्य नक्सलियों ने बस्तर पुलिस की पूना मार्गेम पुनर्वास पहल के तहत सरेंडर किया. नक्सलियों ने बताया कि वे राज्य सरकार की आत्मसमर्पण और पुनर्वास नीति से प्रभावित थे. 

उन्होंने मुख्यधारा में लौटकर सामान्य जीवन जीने की इच्छा जताई है. इसी बीच छत्तीसगढ़ के गरियाबंद जिले से भी नक्सल मोर्चे पर बड़ी कार्रवाई सामने आई है. पुलिस ने पहाड़ी इलाकों में छह अलग-अलग जगहों से नक्सलियों द्वारा छिपाए गए हथियार, गोला-बारूद, विस्फोटक और हथियार बनाने का सामान बरामद किया है.

पुलिस के अनुसार, ओडिशा से सटे मैनपुर थाना क्षेत्र के भालुडिग्गी और मेटल पहाड़ी श्रृंखलाओं में नक्सली ठिकानों की सूचना मिली थी. इसके बाद जिला पुलिस बल की विशेष E-30 यूनिट ने 36 घंटे तक चला सर्च ऑपरेशन चलाया, जो शनिवार को पूरा हुआ. यह ऑपरेशन उन माओवादियों से मिली जानकारी के आधार पर शुरू किया गया था.

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उन्होंने बताया था कि प्रतिबंधित CPI (माओवादी) की ओडिशा राज्य समिति के शीर्ष नेतृत्व ने छत्तीसगढ़-ओडिशा सीमा पर पहाड़ियों में ऑटोमैटिक हथियार और उपकरण छिपा रखे हैं. सर्च ऑपरेशन के दौरान पुलिस ने दो INSAS राइफलें, एक .303 राइफल, एक देसी पिस्तौल, एक सुरका, दो 12-बोर बंदूकें, दो सिंगल-शॉट हथियार, 127 जिंदा कारतूस, आठ मैगजीन, 22 BGL गोले, बिजली के तारों का बंडल और हथियार बनाने में इस्तेमाल होने वाले कई औजार बरामद किए.

ये हथियार वर्कशॉप CPI (माओवादी) के तीन केंद्रीय समिति सदस्यों की निगरानी में चलाई जा रही थी, जो पिछले साल अलग-अलग मुठभेड़ों में मारे गए थे. यहां माओवादी टेक्निकल टीम IED, देसी हथियार बनाती थी. ऑटोमैटिक हथियारों की मरम्मत भी करती थी. यह कार्रवाई पुलिस द्वारा पिछले डेढ़ साल से चलाए जा रहे नक्सल विरोधी ऑपरेशन विराट का हिस्सा है. 

पुलिस का दावा है कि हथियारों के जखीरे मिलने के बाद इस इलाके में माओवादी हिंसा के दोबारा उभरने की संभावना लगभग खत्म हो गई है. जनवरी 2025 से अब तक जिले में 28 ग्रेडेड ऑटोमैटिक हथियार, 29 अन्य हथियार, 240 इलेक्ट्रिक डेटोनेटर, 17 नॉन-इलेक्ट्रिक डेटोनेटर, सात IED और करीब 100 मीटर कॉर्डेक्स तार जब्त किए जा चुके हैं.

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