खौफ, धमकियां और जंग के मुहाने पर दुनिया... वैश्विक टकराव की वजह तो नहीं बन जाएगी ईरान की बगावत!

ईरान में सरकार विरोधी प्रदर्शनों में अब तक हजारों लोगों की मौत हो चुकी है. अयातुल्ला अली खामेनेई की हुकूमत ने प्रदर्शनकारियों को कुचलने के लिए फांसी जैसे खौफनाक कदम उठाने का फैसला किया तो अमेरिका ने सीधे एक्शन की चेतावनी दे डाली. हालांकि बाद में ईरान और ट्रंप के ताजा बयानों ने दुनिया को थोड़ी राहत दी. मगर ईरान संकट अब सिर्फ एक देश का नहीं, बल्कि वैश्विक टकराव का संकेत बनता जा रहा है.

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ईरान में अशांति के लिए अमेरिका और इजरायल पर सवाल उठ रहे हैं (फोटो-ITG) ईरान में अशांति के लिए अमेरिका और इजरायल पर सवाल उठ रहे हैं (फोटो-ITG)

aajtak.in

  • नई दिल्ली,
  • 17 जनवरी 2026,
  • अपडेटेड 8:15 AM IST

Iran Protests 2026: ईरान की ताजा तस्वीरें सिहरन पैदा करती हैं. हर तरफ सिर्फ आग ही आग है. शहर-शहर सड़कों पर लोगों का हुजूम हुक्मरानों के खिलाफ आवाज बुलंद कर रहा है और आवाम के गुस्से से घबराई हुकूमत अपने ही लोगों का नरसंहार कर रही है. लाशों के ढेर, रोते बिलखते लोग. गम और गुस्से का इजहार. नए साल पर ये पहला मौका है, जब लोगों ने एक साथ बहुत सी लाशें देखी हैं. और इन तस्वीरों ने सिर्फ ईरान ही नहीं पूरी दुनिया को सकते में डाल दिया है. ये वो बदनसीब ईरानी शहरी हैं, जिन्हें शासन के खिलाफ आवाज उठाने की कीमत अपनी जान गंवा कर चुकानी पड़ी. और अगर ईरान से आए ताज़ा आंकड़ों पर यकीन करें, तो महज पखवाड़े भर के इस विरोध प्रदर्शन में मरने वालों की तादाद अब 2500 को पार कर चुकी है. 

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साफ है इस आंदोलन को कुचलने के लिए अयातुल्ला अली खामनेई किसी भी हद से गुजरने को तैयार दिखते हैं. जुल्मो-सितम वाले इस्लामिक राज और खस्ताहाल माली हालत से आजिज ईरान के लोगों की इस आवाज को दबाने के लिए वहां की हुकूमत ने अब खौफ से भरी चाल चली है. अब तक ईरानी फौज सड़कों पर प्रदर्शन कर रहे लोगों को अपनी गोलियों का निशाना बना रही थी, और अब खामेनेई ने कुछ प्रदर्शनकारियों को बीच चौराहे में फांसी पर लटका देने का फैसला किया है. 

समझा जाता है कि ऐसा करने के पीछे उनका इरादा लोगों में डर पैदा करना है. लेकिन अमेरिका ने साफ कर दिया है कि अगर ईरान अपने प्रदर्शनकारियों को फांसी देता है तो वो ईरान पर सीधी कार्रवाई करेगा. जाहिर है ईरान के हालात लगातार बिगड़ रहे हैं. केस कितना खतरनाक है, इसका अंदाजा आप बस इसी बात से लगाएं कि अब तो भारत के विदेश मंत्रालय ने भी तेहरान में रह रहे भारतीयों से जल्द से जल्द तेहरान छोड़ देने की एडवाजरी जारी कर दी है.

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अमेरिका की तैयारी ये इशारा करती है कि शायद इस बार अमेरिका ईरान को सबक सिखाने का ये मौका हाथ से जाने नहीं देना चाहता. ईरान पर हमले की तैयारी के तौर पर अब अमेरिका ने करीब 50 टार्गेट का चुनाव किया है, जहां अमेरिका एरियल अटैक कर सकता है. यूनाइटेड अगेंस्ट न्यूक्लियर ईरान नाम के एक अमेरिकी एनजीओ ने ऐसे 50 टार्गेट की हिट लिस्ट व्हाइट हाउस के हवाले की है. 

जिसमें ईरान के हाई प्रोफाइल इस्लामिक रेवोल्यूशनरी गार्ड्स कॉर्प्स के थरल्लाह हेडक्वार्टर का नाम भी शामिल है. इसके अलावा अमेरिका के टार्गेट लिस्ट में उत्तरी और उत्तर पश्चिमी तेहरान में मोर्चा संभालने वाले कुद्स सब हेडक्वार्ट्स, दक्षिण पश्चिम के फतेह सब हेडक्वार्ट्स, उत्तर पूर्व के नसर सब हेडक्वार्टर्स और उत्तर पूर्व, दक्षिण पूर्व और सेंट्रल तेहरान में सुरक्षा की जिम्मेदारी लेने वाले ग़द्र सब हेडक्वार्टर्स का नाम शामिल है. एक तरह से देखा जाए तो अमेरिका ने ईरान को घुटनों पर लाने की पूरी तैयारी कर ली है. 

अब बात आंदोलन को कुचलने के फैसले की. 26 साल का एक नौजवान धधकते ईरान की बेबसी का सबसे ताजा चेहरा है- नाम है इरफान सुल्तानी. ईरान की सरकार ने सुल्तानी को बीच चौराहे पर फांसी पर लटकाने का फैसला किया है. और जानते हैं, उसका जुर्म क्या है? तो सुनिए, उसका जुर्म है ईरानी हुकूमत के खिलाफ सड़कों पर विरोध प्रदर्शन करने वाले हजारों लोगों में उसका भी शामिल होना. सुल्तानी को सरकार विरोधी प्रदर्शन के जुर्म में 8 जनवरी को गिरफ्तार किया गया था और उसकी गिरफ्तारी के सिर्फ 5 दिन बाद उसके घर वालों को उसे दी जाने वाली सजा-ए-मौत की जानकारी दी गई. हालांकि बाद में ये फैसला टाल दिए जाने की खबर आई.

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अब जानिए कि ईरान में भड़कते इन शोलों की आंच अब दुनिया में कहां-कहां पहुंच रही है और इन्हें भड़काने में किन-किन चेहरों का हाथ है. तो इस सिलसिले को समझने के लिए सबसे पहले एक्स पर किया गया, अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की ये पोस्ट देखिए और फिर उनके इन अल्फाजों को खुद उन्हीं की जुबान से सुनिए. अपने सोशल मीडिया हैंडल पर ट्रंप ईरान को लेकर लिखते हैं, 'ईरानी देशभक्त, प्रदर्शन जारी रखिए और संस्थानों को अपने क़ब्ज़े में ले लीजिए. कातिलों और दुर्व्यवहार करने वालों के नाम याद रखिए. उन्हें इसकी भारी कीमत चुकानी होगी. मैंने ईरानी अधिकारियों के साथ अपने सारे मीटिंग्स तब तक के लिए रद्द कर दिए हैं, जब तक कि प्रदर्शनकारियों की बेवकूफ़ाना तरीके से की जा रही हत्याएं बंद हो. मदद आपके रास्ते में हैं. मेक ईरान ग्रेट अगेन.'

कहने की जरूरत नहीं कि मानवाधिकारियों की दुहाई देकर अमेरिका पहले ही दिन से या फिर यूं कहें कि प्रदर्शन के काफी पहले से ही ईरान के अंदरुनी मामलों में दखल देता रहा है और ट्रंप की पोस्ट इस बात की निशानी है. बल्कि अब तो ट्रंप ने साफ-साफ कह दिया है कि अगर ईरान अपने प्रदर्शनकारियों को फांसी के तख्ते पर चढ़ाता है, तो उसके खिलाफ बेहद सख्त कार्रवाई की जाएगी. ट्रंप यही नहीं रुके. ईरान में अब तक हुई मौतों और जख्मी प्रदर्शनकारियों का हवाला देकर उन्होंने कहा कि ईरान में हो रही मौतों को लेकर उन्हें अलग-अलग पांच आंकड़ों का पता चला है. लेकिन वो ये कहना चाहते हैं कि जो भी लोग इसके पीछे हैं, उन्हें इसकी भारी कीमत चुकानी होगी. 

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जाहिर है ईरान के अंदरुनी मामले में ट्रंप की रुचि कुछ ज्यादा ही है और ऐसे में कूटनीतिक विशेषज्ञ इसके पीछे कोई और ही वजह देखते हैं. अभी चंद रोज पहले ही ट्रंप ने ईरान को न्यूक्लियर डील को लेकर बातचीत का न्यौता दिया था, लेकिन ईरान ने उसके न्यौते को हवा में उड़ा दिया, जिसके बाद ट्रंप के तेवर कुछ ज्यादा ही तीखे हो गए और ईरान में चल रहे विरोध प्रदर्शन के तौर पर उनके हाथ में बटेर लग गया.

लेकिन भड़कने और भड़काने के इस खेल में अकेले ट्रंप ही दोषी नहीं हैं. बल्कि खुद ईरान के बुजुर्ग शासक अयातुल्ला अली खामेनेई का भी इसमें कम रोल नहीं है. ईरान आर्थिक रूप से गर्त में जा चुका है, लेकिन इस्लामिक ब्रदरहुड में चौधराहट की खामेनेई की ख्वाहिश कम नहीं पड़ रही है. वो कभी प्रदर्शनकारियों को धमकाते हैं, कभी अमेरिका से दो-दो हाथ करने का दम भरते हैं तो कभी इजरायल को सबक सिखाने की धमकी देते हैं. लेकिन देश में भड़के असंतोष से शांतिपूर्ण तरीके से निपटने की कोई असरदार कोशिश नहीं दिखती. 

ऐसे में सवाल ये है उठता है कि क्या मनमुताबिक न्यूक्लियर डील के लिए अमेरिका खामेनेई की हुकूमत का दुश्मन बना बैठा है और ईरान में प्रदर्शनकारियों को लगातार भड़का रहा है? पूरी दुनिया में एक बड़े तबके का कुछ ऐसा ही मानना है. जिस तरह एक कहानी के मुताबिक राजा की जान भंवरे में बसती थी, उसी तरह ईरान को इस बात का अहसास है कि अमेरिकी जान इजरायल में बसती है. यही वजह है कि जब-जब ट्रंप ईरानी हुकूमत को देख लेने की बात कहते हैं, तब तब ईरान बढ़-चढ़ कर इजरायल को सबक सिखाने की बात कहता है. इस बार भी ईरानी नेताओं ने कुछ ऐसी ही बयानबाजी की है. 

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ये और बात है कि अब तक खुद इजरायल के प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू ने इस मामले में खामोशी की चादर ओढ़ रखी है. अब इसी कड़ी में पहले ईरान के सुप्रीम नेशनल सिक्योरिटी काउंसिल के सेक्रोटरी अली लारीजानी की ये पोस्ट पढ़िए और फिर ईरानी संसद के स्पीकर मोहम्मद बाकेर कालिबफ का एक बयान जानना ज़रूरी है. उन्होंने लिखा है, 'हम आपको ईरान के लोगों को अहम कातिलों के नाम बताते हैं- पहला ट्रंप, दूसरा नेतन्याहू. लारीजानी ने एक्स पर अपनी पोस्ट ट्रंप के उस पोस्ट के स्क्रीनशॉट के साथ डाली है, जिसमें ट्रंप ईरानी लोगों को और जोरदार प्रदर्शन के लिए उकसाते दिख रहे हैं.

इस बीच रूस और तुर्किए ने भी इस मामले पर टीका-टिप्पणी कर अपने होने का अहसास करवाया है. रूसी विदेश मंत्रालय ने बयान दिया है कि जो लोग जून 2025 की तरह ईरान पर हमले को दोहराने का रास्ता ढूंढ रहे हैं, उन्हें इसके खतरनाक अंजामों का पता होना चाहिेए, जबकि तुर्किए की रूलिंग पार्टी के नेता ने सीधे-सीधे अमेरिका और ईरान को आगाह किया है. साफ है हालात लगातार बेकाबू होते दिख रहे हैं. 

(आजतक ब्यूरो)

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