प्रद्युम्न केस: आरोपी की जमानत के लिए पड़ोसी ने दिए जमीन के पेपर, गांववालों ने दिया चंदा

प्रद्युम्न मर्डर केस में गिरफ्तार किए गए आरोपी बस कंडक्टर अशोक कुमार को मंगलवार को जमानत मिल गई. कोर्ट ने उसे 50 हजार रुपये के मुचलके पर जमानत दी है. अशोक के गांव गामरोज में रहने वाले उसके पड़ोसी महेश राघव जमानती हैं.

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बस कंडक्टर अशोक कुमार बस कंडक्टर अशोक कुमार

मुकेश कुमार / चिराग गोठी / पुनीत शर्मा

  • गुरुग्राम,
  • 22 नवंबर 2017,
  • अपडेटेड 2:41 PM IST

गुरुग्राम के रेयान इंटरनेशनल स्कूल में हुए प्रद्युम्न मर्डर केस में गिरफ्तार किए गए आरोपी बस कंडक्टर अशोक कुमार को मंगलवार को जमानत मिल गई. कोर्ट ने उसे 50 हजार रुपये के मुचलके पर जमानत दी है. अशोक के गांव गामरोज में रहने वाले उसके पड़ोसी महेश राघव जमानती हैं. वह कोर्ट में अपनी जमीन के पेपर बतौर जमानती देंगे.

अशोक के पड़ोसी महेश राघव ने बताया कि हमारे घर की दीवार एक है. हम अपनी जमीन की रजिस्ट्री के पेपर बतौर जमानत दे रहे हैं. पूरा गांव अशोक के साथ खड़ा है. गांववालों ने भी उसकी काफी मदद की है. जिससे जितना बन पड़ा है, उतना दिया है. किसी ने 100 रुपये तो किसी ने 50 रुपये दिए हैं. लेकिन हर कोई उसकी मदद कर रहा है.

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इस मामले की सुनवाई के बाद अतिरिक्त जिला एवं सत्र न्यायाधीश रजनी यादव ने अशोक को 50 हजार रुपये के मुचलके पर जमानत दी है. अशोक के वकील मोहित वर्मा ने कहा कि उसके खिलाफ कोई सबूत नहीं था. अदालत ने अनुच्छेद 21 के तहत उन्हें जमानत दे दी. अनुच्छेद 21 हर नागरिक को जिंदगी और स्वतंत्रता का अधिकार देता है.

उन्होंने कहा कि सीबीआई और हरियाणा पुलिस के सिद्धांतों के बीच बड़ा संघर्ष था. संदेह के लाभ के आधार पर उन्हें जमानत दी गई है. न्यायालय के निर्णय ने साबित कर दिया कि पुलिस जांच असली अपराधी को बचा रही है और अशोक कुमार को अपराध में शामिल फंसाया गया. बुधवार की शाम तक अशोक जेल से बाहर आ सकता है.

8 सितंबर की रेयान स्कूल के बाथरूम में 7 वर्षीय प्रद्युम्न ठाकुर का शव मिला था. उसकी गला रेकर हत्या की गई थी. इस मामले की जांच कर रही गुरुग्राम पुलिस ने 42 वर्षीय बस कंडक्टर अशोक कुमार को प्रद्युम्न की हत्या के आरोप में गिरफ्तार किया था. दावा किया था कि बच्चे के साथ गलत काम करने में नाकाम रहने के बाद उसने हत्या कर दी.

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स्कूल स्टॉफ के दो सदस्यों और अशोक के परिवार का दावा है कि गरीब परिवार से होने के कारण अशोक को 'बलि का बकरा' बनाया गया. अशोक के पिता अमीरचंद ने कहा कि हरियाणा पुलिस ने उनके बेटे को अपराध कबूलने के लिए नशीला पदार्थ दिया और उस पर बेरहमी से अत्याचार किए. उसने दबाव में आकर पहले इस जुर्म को कबूल किया था.

बताते चलें कि सीबीआई ने की थ्योरी को पलटते हुए आठ नवंबर को उसी स्कूल के कक्षा-11 के छात्र को गिरफ्तार किया था. आरोपी छात्र ने अपने जूनियर की हत्या इसलिए कर दी, क्योंकि वह उस दिन अभिभावक शिक्षक बैठक और यूनिट परीक्षा को स्थगित कराना चाहता था. सीबीआई के मुताबिक 'हत्यारा पढ़ाई में कमजोर है'.

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