मुंबई के 'वैक्सीन घोटाले' पर बोले आदित्य ठाकरे- इस समय कुछ भी कहना सही नहीं होगा क्योंकि...

मुंबई की हीरानंदानी एस्टेट सोसायटी में फर्जी वैक्सीन लगाने के मामले में महाराष्ट्र सरकार में मंत्री आदित्य ठाकरे का बयान सामने आया है. आदित्य ठाकरे ने कहा कि इस मामले में अभी कुछ भी कहना सही नहीं होगा, क्योंकि इससे लोग पैनिक हो सकते हैं.

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आदित्य ठाकरे (फाइल फोटो) आदित्य ठाकरे (फाइल फोटो)

सौरभ वक्तानिया

  • मुंबई,
  • 19 जून 2021,
  • अपडेटेड 3:39 PM IST
  • आदित्य ठाकरे बोले- रिपोर्ट का इंतजार करिए
  • हीरानंदानी सोसायटी में सामने आया घोटाला
  • सोसायटी के 390 लोगों को लगी थी वैक्सीन

मुंबई की हीरानंदानी एस्टेट सोयायटी में सामने आए कथित 'वैक्सीन घोटाले' पर महाराष्ट्र सरकार के मंत्री आदित्य ठाकरे का बयान सामने आया है. उन्होंने कहा कि इस मामले में अभी कुछ भी कहना सही नहीं होगा, क्योंकि इससे लोग पैनिक हो सकते हैं. उन्होंने सलाह देते हुए कहा कि सोसायटीज को ऐसी कंपनियों के बैकग्राउंड की जांच करनी चाहिए.

आदित्य ठाकरे ने कहा, "इस समय कुछ भी कहना सही नहीं होगा क्योंकि इससे बड़े पैमाने पर दहशत फैल जाएगी. रिपोर्ट आने दीजिए. पुलिस जांच करेगी. रिपोर्ट आने पर उचित कार्रवाई की जाएगी."

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उन्होंने कहा, "हाउसिंग सोसायटी को बीएमसी से एनओसी लेनी चाहिए थी. सोसायटीज को ऐसी कंपनियों के बैकग्राउंड को चेक करना चाहिए. ये हम दोनों प्राइवेट सोसायटी और सरकार पर है कि वो ये सुनिश्चित करे कि आने वाली वैक्सीनेशन टीम वैध है या नहीं."

आदित्य ठाकरे से जब पूछा कि क्या अब प्राइवेट सोसायटी में वैक्सीनेशन के लिए और सख्त नॉर्म्स होंगे? तो उन्होंने कहा, "हां. हमें करना होगा."

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क्या है पूरा मामला?
दरअसल, मुंबई के कांदिवली इलाके स्थित हीरानंदानी एस्टेट सोसायटी में 30 मई को वैक्सीनेशन कैम्प लगाया गया था. इसमें 390 लोगों को कोविशील्ड लगाई गई थी. लेकिन कई दिन बीत जाने के बाद भी एक भी व्यक्ति को वैक्सीन के बाद के साइड इफेक्ट नजर नहीं आए. लोगों से वैक्सीन के एक डोज के लिए 1,260 रुपए भी लिए गए.

इतना ही नहीं लोगों को वैक्सीनेशनल सर्टिफिकेट भी 10-15 दिन बाद मिलने शुरू हुए. जबकि, आमतौर पर वैक्सीन का सर्टिफिकेट 5 से 10 मिनट के भीतर ही मिल जाता है. और तो और सर्टिफिकेट पर प्राइवेट अस्पतालों के नाम लिखे हुए थे. अस्पतालों का कहना था कि उन्होंने सोसायटी में कोई वैक्सीनेशन कैम्प नहीं लगाया. ऐसे में अब सवाल उठ रहे हैं कि क्या कोरोना वैक्सीनेशन के नाम पर लोगों को ठग लिया गया और उन्हें वैक्सीन की जगह कुछ और लगा दिया गया?

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