कोरोना काल में दिल्लीवासियों के जख्म पर एमसीडी ने रगड़ा टैक्स का नमक, गरमाई सियासत

कोरोना काल में आर्थिक मुसीबत झेल रही देश की राजधानी में, साउथ दिल्ली नगर निगम ने टैक्स बढ़ाने के फैसले को मंजूरी दे दी है. इसके साथ ही, बीजेपी शासित साउथ दिल्ली नगर निगम ने, न सिर्फ टैक्स बढ़ाया है बल्कि जनता से एक नया 'प्रोफेशनल टैक्स' भी लेने की तैयारी कर ली है.

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प्रतीकात्मक तस्वीर प्रतीकात्मक तस्वीर

पंकज जैन

  • नई दिल्ली,
  • 28 जुलाई 2020,
  • अपडेटेड 1:45 AM IST

  • अब साउथ दिल्ली में लोगों को देना होगा प्रोफेशनल टैक्स
  • दक्षिणी दिल्ली नगर निगम ने प्रॉपर्टी ट्रांसफर ड्यूटी बढ़ायी

कोरोना काल में आर्थिक मुसीबत झेल रही देश की राजधानी में, साउथ दिल्ली नगर निगम ने टैक्स बढ़ाने के फैसले को मंजूरी दे दी है. इसके साथ ही, बीजेपी शासित साउथ दिल्ली नगर निगम ने, न सिर्फ टैक्स बढ़ाया है बल्कि जनता से एक नया 'प्रोफेशनल टैक्स' भी लेने की तैयारी कर ली है.

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प्रोफेशनल टैक्स

साउथ दिल्ली में डॉक्टर, इंजीनियर, आर्किटेक्ट, चार्टर्ड अकाउंटेंट समेत तमाम प्रोफेशनल्स को एक नए प्रकार का टैक्स 'प्रोफेशनल टैक्स' देना होगा. पास हुए प्रस्ताव के मुताबिक जिन प्रोफेशनल्स की वार्षिक आय 6 लाख रुपए से 9 लाख रुपए तक होगी, उन्हें हर साल 1200 रूपए टैक्स देना होगा. और जिन प्रोफेशनल्स की वार्षिक आय 9 लाख रुपए से 12 लाख रुपए तक होगी, उन्हें हर साल 1800 रूपए टैक्स देना होगा. वहीं 12 लाख या उससे अधिक वार्षिक आय वाले प्रोफेशनल्स को सालाना 2400 रूपए प्रोफेशनल टैक्स देना होगा.

प्रॉपर्टी ट्रांसफर ड्यूटी

दक्षिणी दिल्ली नगर निगम में प्रॉपर्टी की खरीद-फरोख्त पर लगने वाली ड्यूटी को 1% तक बढ़ाया गया है. अब तक प्रॉपर्टी अगर महिला के नाम पर ट्रांसफर होती थी तो प्रॉपर्टी की कीमत का 2% ड्यूटी देना होता था, जिसे बढ़ाकर 3% कर दिया गया है. जबकि पुरुष के नाम पर ट्रांसफर होने वाली प्रॉपर्टी पर अब 4% तक ड्यूटी देनी होगी, जो पहले 3% थी.

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हाउस टैक्स

अनाधिकृत कॉलोनियों में नगर निगम द्वारा हाउस टैक्स वसूला जाएगा. नगर निगम के सीनियर अधिकारी ने 'आजतक' को बताया कि कच्ची कॉलोनियों से हमेशा से हाउस टैक्स लिया जा रहा था. एक्ट के मुताबिक कॉलोनी कच्ची हो या पक्की, हाउस टैक्स देना पड़ता है. लेकिन अब तक कच्ची कॉलोनियों से सिर्फ 8 से 10% लोग ही हाउस टैक्स दे रहे थे. इसी वजह से 2004 में जबसे नया टैक्स सिस्टम लागू हुआ था, तब से 2018 तक का हाउस टैक्स माफ कर दिया गया है. लेकिन इसके लिए 2019 और 2020 का सालाना हाउस टैक्स जमा करना अनिवार्य होगा.

सीनियर अधिकारी ने बताया कि उदाहरण के तौर पर कच्ची कॉलोनियों में 100 मीटर के हिस्से में बने किसी भी रिहायशी मकान के लिए सालाना 1000 से 1200 रुपए तक का हाउस टैक्स देना होता है. नगर निगम का अनुमान है बकाया टैक्स की वसूली होने पर कच्ची कॉलोनियों से 150 से 200 करोड़ रूपए जमा हो सकते हैं.

हालांकि, आम आदमी पार्टी के साउथ दिल्ली नगर निगम के नेता विपक्ष प्रेम चौहान ने आरोप लगाया है कि पुराना बकाया टैक्स माफ करने के नाम पर अनाधिकृत कॉलोनियों से नगर निगम नया टैक्स ले रही है. प्रेम चौहान ने कहा कि "साउथ दिल्ली में 927 अनाधिकृत कॉलोनियों हैं, इन कॉलोनियों में नगर निगम बेसिक सुविधा और विकास के लिए कोई फंड इस्तेमाल नहीं करती है. फिर बीजेपी शासित नगर निगम अनाधिकृत कॉलोनियों से टैक्स क्यों लेना चाहती है? आम आदमी पार्टी की मांग है कि निगम द्वारा कच्ची कॉलोनियों में मूलभूत व्यवस्थाएं दी जाएं."

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फिलहाल पूरे मामले में राजनीति गरमा गयी है. दिल्ली में आम आदमी पार्टी के एमसीडी प्रभारी दुर्गेश पाठक ने कहा है कि "कोरोना के काल में बीजेपी की साउथ एमसीडी ने दिल्ली वालों के ऊपर टैक्स का बोझ डाल दिया है. इस महामारी के दौरान भी अब हर नागरिक के ऊपर अतिरिक्त बोझ पड़ेगा."

आम आदमी पार्टी ने दिल्ली BJP अध्यक्ष आदेश गुप्ता पर भी निशाना साधा है. दरअसल, आदेश गुप्ता ने रविवार को ट्वीट कर कहा था "मैंने दक्षिण दिल्ली नगर निगम के महापौर से बात कर ली है और निगम अधिकारियों के द्वारा लाये गये करों में वृद्धि के निगम प्रस्ताव को वापस लेने का आग्रह किया है. महापौर सहमत हैं."

हालांकि हैरानी की बात है कि बीजेपी के दिल्ली प्रदेश अध्यक्ष आदेश गुप्ता के दावे के उलट बीजेपी शासित साउथ दिल्ली नगर निगम ने, सदन में टैक्स बढ़ाने के प्रस्ताव को मंजूर कर दिया. वहीं, आम आदमी पार्टी ने बयान दिया है कि अगर बीजेपी शासित साउथ दिल्ली नगर निगम द्वारा, नए टैक्स को लागू करने और ड्यूटी टैक्स बढ़ाने का फैसला वापिस नहीं लिया जाता है तो वह सड़कों पर उतरकर विरोध प्रदर्शन करेगी.

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