बैंकों का कर्ज सस्ता होने की फिलहाल संभावना कम: एचडीएफसी बैंक

बैंक के उप प्रबंध निदेशक परेश सुक्तांकर ने कहा कि जमा और कर्ज की दरें जितनी गिर सकती थी, करीब- करीब गिर चुकी है.  इनमें और कमी की गुंजाइश फिलहाल नहीं दिखती.

Advertisement
प्रतीकात्मक फोटो प्रतीकात्मक फोटो

केशवानंद धर दुबे

  • नई दिल्ली,
  • 27 नवंबर 2017,
  • अपडेटेड 9:16 AM IST

एचडीएफसी बैंक के एक वरिष्ठ अधिकारी का मानना है कि हाल फिलहाल बैंकों का कर्ज और सस्ता होने की संभावना कम हैं, क्योंकि बैंकों के पास सुलभ अतिरिक्त नकदी खत्म हो रही है.

बैंक के उप प्रबंध निदेशक परेश सुक्तांकर ने कहा कि जमा और कर्ज की दरें जितनी गिर सकती थी, करीब- करीब गिर चुकी है.  इनमें और कमी की गुंजाइश फिलहाल नहीं दिखती.

Advertisement

उन्होंने कहा, ‘‘रिजर्व बैंक की ओर से लगातार पेश की जा रही नीति की तरफ देखें. मुद्रास्फीति के मामले में जो हुआ है और तेल आदि को लेकर जो संभावनाएं दिख रही हैं उससे स्पष्ट है कि रिजर्व बैंक के लोग मानते हैं कि नीतिगत दृष्टि से ब्याज दर में और कटौती की एक तरह से कोई गुंजाइश नहीं बची है.’’ उन्होंने कहा कि बैंकों के पास अतिरिक्त धन धीरे- धीरे खत्म हो चुका है. जमा दर में भी कमी की संभावित गुंजाइश कम हुई है.

रिजर्व बैंक छह दिसंबर को द्वैमासिक मौद्रिक नीति जारी करेगा. इस समय रिजर्व बैंक की नीतिगत दर (रेपो दर) 6.00 प्रतिशत है. उपभोक्ता मूल्य सूचकांक पर आधारित मुद्रास्फीति की दर अक्टूबर में 3.58 प्रतिशत हो गई, जबकि सितंबर में यह 3.28 प्रतिशत थी. अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतें भी प्रति बैरल 60 डॉलर से ऊपर चल रही हैं. मुद्रास्फीति बढ़ने के खतरे को देखते हुए रिजर्व बैंक की मौद्रिक नीति समिति की अगली बैठक में कटौती की संभावना कम ही दिखती है.

Advertisement

इस बीच उद्योग मंडल एसोचैम ने भी एक रिपोर्ट में कहा कि रिजर्व बैंक के लिए चिंता का महत्वपूर्ण विषय है. ऐसे में नीतिगत ब्याज दर में कटौती की संभावना धूमिल हो गयी है.

रिजर्व बैंक के लिए मुद्रास्फीति को चार प्रतिशत के दायरे में रखने की जिम्मेदारी दी गई है. इसमें हद से हद दो प्रतिशत तक की घट-बढ़ की छूट हो सकती है.

Read more!
Advertisement

RECOMMENDED

Advertisement
Latest News in Hindi »