घर बैठे कैसे खरीदें दुबई में प्रॉपर्टी, न वीजा की टेंशन और न जाने की जरूरत

आज एक भारतीय निवेशक अपने ड्राइंग रूम में बैठकर अंतरराष्ट्रीय स्तर की संपत्ति का मालिक बन सकता है. ब्याज मुक्त किस्तों और मजबूत रेंटल इनकम के कारण, यह अवसर लंबे समय तक संपत्ति बनाने की दिशा में एक क्रांतिकारी कदम साबित हो सकता है.

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हालिया तनाव के बावजूद दुबई के बाजार में भारी उछाल देखा गया है (Photo-Pexels) हालिया तनाव के बावजूद दुबई के बाजार में भारी उछाल देखा गया है (Photo-Pexels)

स्मिता चंद

  • नई दिल्ली,
  • 16 अप्रैल 2026,
  • अपडेटेड 4:17 PM IST

दुबई का रियल एस्टेट मार्केट इस समय भारतीय निवेशकों के लिए न केवल सबसे आकर्षक है, बल्कि निवेश की प्रक्रिया के मामले में सबसे आसान भी है. अगर आप भारत में बैठकर यह सोच रहे हैं कि विदेशी जमीन पर अपनी संपत्ति कैसे बनाई जाए तो हम आपको बताते हैं पूरी गाइडलाइन.

दुबई में निवेश का सबसे चर्चित तरीका 'ऑफ-प्लान प्रॉपर्टीज' है. आजतक रेडियो के शो प्रॉपर्टी से फायदा में इन्वेस्टमेंट बैंकर और रियल एस्टेट एक्सपर्ट जुनैद खान ने बताया कि जो लोग निवेश से मोटा रिटर्न चाहते हैं, वे अक्सर ऐसी प्रॉपर्टी चुनते हैं जो अभी निर्माणाधीन है. स्मार्ट निवेशक उन क्षेत्रों पर ध्यान केंद्रित करते हैं जहां इंफ्रास्ट्रक्चर अभी पूरी तरह विकसित नहीं है, लेकिन अगले दो-तीन साल में वहां हैंडओवर मिलना है. इस रूट का सबसे बड़ा फायदा यह है कि आपको प्रॉपर्टी की पूरी कीमत एक साथ नहीं चुकानी पड़ती.

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मॉर्गेज से मुक्ति और ब्याज मुक्त भुगतान प्लान

अक्सर लोग कर्ज के बोझ से डरते हैं, जुनैद का कहना है कि दुबई में निवेश का एक बड़ा फायदा यह है कि आपको मॉर्गेज या बैंक लोन लेने की जरूरत ही नहीं पड़ती. अधिकांश डेवलपर्स 'इंटरेस्ट-फ्री' पेमेंट प्लान देते हैं. आपको केवल कुल कीमत का 20% डाउन पेमेंट और 4% DLD (दुबई लैंड डिपार्टमेंट) रजिस्ट्रेशन फीस देनी होती है, जिसके बाद आपका सेल परचेस एग्रीमेंट (SPA) साइन हो जाता है. इसके बाद, कई डेवलपर्स 'पोस्ट-हैंडओवर पेमेंट प्लान' भी पेश करते हैं, जिसमें घर का कब्जा मिलने के बाद भी आप अगले 2-3 सालों तक किस्तों में भुगतान कर सकते हैं.

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विदेश में संपत्ति खरीदने की जटिलता को लेकर कई भ्रांतियां हैं. दुबई में 'ईज ऑफ इन्वेस्टमेंट' का स्तर जबरदस्त है. इसके लिए आपको अपना देश छोड़ने की भी जरूरत नहीं है. एक्सपर्ट के मुताबिक, आप गूगल मीट या वर्चुअल टूर्स के जरिए प्रॉपर्टी देख सकते हैं. निवेश शुरू करने के लिए सिर्फ पासपोर्ट की कॉपी और 'एक्सप्रेशन ऑफ इंटरेस्ट' (EOI) की राशि (जो कुल मूल्य का लगभग 2-3% होती है) देनी होती है. सारी कागजी कार्रवाई और रजिस्ट्री घर बैठे ऑनलाइन पूरी हो जाती है, जो इसे भारतीय निवेशकों के लिए बेहद सुविधाजनक बनाती है.

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सुरक्षा और कानूनी पहलुओं पर बात करते हुए जुनैद ने बताया कि निवेशकों के लिए बैकग्राउंड चेक की प्रक्रिया बहुत ही पारदर्शी है. निवेशक को एक अंडरटेकिंग देनी होती है कि वह 'पॉलिटिकली एक्सपोज्ड' व्यक्ति नहीं है और उसका कोई आपराधिक रिकॉर्ड नहीं है. मल्टीपल पासपोर्ट रखने वाले निवेशकों के लिए भी नियम लचीले हैं. एक्सपर्ट के अनुसार, दुबई में आप किसी भी वैध पासपोर्ट से निवेश कर सकते हैं, बस शर्त यह है कि आपकी यात्रा और निवेश के दस्तावेज एक ही पासपोर्ट से जुड़े होने चाहिए.

वैश्विक तनाव और मार्केट की स्थिरता

युद्ध और वैश्विक उथल-पुथल के बीच रियल एस्टेट की स्थिति पर चर्चा करते हुए जुनैद कहते हैं ' हालिया तनाव के बावजूद दुबई के बाजार में भारी उछाल देखा गया है. वर्तमान समय में यह एक 'बायर्स मार्केट' बन गई है. जब भी बाजार में थोड़ा 'डिप' आता है, तो खरीदने वालों की संख्या बढ़ जाती है. एक बार स्थिति पूरी तरह शांत होने के बाद, कीमतें और भी तेजी से ऊपर जाएंगी, क्योंकि दुबई ने खुद को दुनिया के सबसे सुरक्षित देशों के रूप में साबित किया है.'

भारत के मुकाबले दुबई में 'रेंटल यील्ड' काफी अधिक है. दुबई में सालाना 6% से 9% तक का रेंटल रिटर्न मिलना आम बात है. यदि आप आज की तारीख में निवेश करना चाहते हैं, तो एक्सपर्ट के अनुसार 5 लाख से 7 लाख दिरहम (AED 500k-700k) का बजट एक  शुरुआत है. यह निवेश न केवल आपको एक ग्लोबल एसेट देता है, बल्कि भविष्य में आपके बच्चों की शिक्षा या अंतरराष्ट्रीय व्यापार के लिए एक मजबूत आधार भी तैयार करता है.

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