अपना घर खरीदना जीवन के सबसे बड़े फैसलों में से एक होता है. भारत में मध्यम वर्ग के लिए घर का सपना अक्सर होम लोन के साथ शुरू होता है, लेकिन क्या आपने कभी सोचा है कि 20 से 25 साल तक चलने वाला यह कर्ज आपके जीवन की गुणवत्ता और आपकी वित्तीय स्वतंत्रता पर क्या असर डालता है. क्या होम लोन लेना एक सोची-समझी रणनीति है या फिर यह बिना पूंजी वाले लोगों की मजबूरी?
आजतक रेडियो के शो प्रॉपर्टी से फायदा में एक्स-बैंकर और लोन एक्सपर्ट प्रभात अग्रवाल कहते हैं- 'अगर आपके पास घर खरीदने के लिए पूरा पैसा है, तब भी होम लोन लेना एक 'स्मार्ट फाइनेंशियल मूव' हो सकता है. आज के समय में होम लोन की ब्याज दरें अमूमन 7 से 8 प्रतिशत के बीच हैं. अगर आप उस पैसे को घर में ब्लॉक करने के बजाय म्यूचुअल फंड या अपने व्यवसाय में निवेश करते हैं, तो वहां से आप आसानी से 12 से 15 प्रतिशत का रिटर्न हासिल कर सकते हैं. इस तरह आप कम ब्याज पर बैंक से पैसा ले रहे हैं और अपने पैसे से ज्यादा मुनाफा कमा रहे हैं.'
प्रभात आगे कहते हैं- ' दूसरा पहलू मजबूरी का है. उन लोगों के लिए जिनके पास एकमुश्त बड़ी पूंजी नहीं है, होम लोन ही एकमात्र जरिया है, जिससे वे अपने सिर पर छत सुनिश्चित कर सकते हैं. हालांकि, पहले होम लोन का एक बड़ा आकर्षण 'टैक्स बेनिफिट' हुआ करता था. पुराने टैक्स स्लैब में लोग 3.5 से 4 लाख रुपये तक का फायदा उठाते थे, लेकिन नई टैक्स व्यवस्था में ये लाभ अब उपलब्ध नहीं हैं. इसलिए, अब टैक्स बचाने के लिए होम लोन लेना कोई समझदारी भरा फैसला नहीं रह गया है.'
यह भी पढ़ें: मिडिल ईस्ट संकट ने बिगाड़ा ब्रिटेन का बजट, 13 लाख लोगों पर बढ़ेगा होम लोन का बोझ!
सैलरी का कितना हिस्सा ईएमआई में देना सुरक्षित है?
एक आम आदमी के मन में सबसे बड़ा डर यही होता है कि कहीं ईएमआई उसकी पूरी सैलरी न खा जाए. प्रभात सलाह देते हैं कि एक आदर्श स्थिति में आपकी कुल इन हैंड सैलरी का 30 से 40 प्रतिशत हिस्सा ही ईएमआई के लिए आवंटित होना चाहिए. यह वह स्तर है जहां आप बिना मानसिक तनाव के अपना घर चला सकते हैं और कर्ज भी चुका सकते हैं.
हालांकि, बैंक अक्सर आपकी आय का 50 से 55 प्रतिशत तक लोन देने को तैयार हो जाते हैं. प्रभात चेतावनी देते हैं कि यह 'खतरे की घंटी' हो सकती है. यदि किसी की सैलरी 7-8 लाख रुपये महीना है, तो 50 प्रतिशत ईएमआई के बाद भी उसके पास पर्याप्त पैसा बचेगा. लेकिन अगर आपकी सैलरी 1 या 2 लाख रुपये है और आप उसका आधा हिस्सा ईएमआई में दे देते हैं, तो महंगाई और अचानक आने वाले खर्चों के बीच आपकी वित्तीय प्लानिंग चरमरा सकती है.
यह भी पढ़ें: कभी शहर की शान थे, अब पसरा है सन्नाटा, क्यों फेल हुए भारत के 70% मॉल
होम लोन जब बन जाए जी का जंजाल
आज के दौर में कॉर्पोरेट जगत में छंटनी एक कड़वी हकीकत है. हाल ही में ओरेकल जैसी बड़ी कंपनियों में हुए बदलावों का जिक्र करते हुए प्रभात ने बताया कि अगर अचानक नौकरी चली जाए, तो होम लोन सबसे बड़ा मानसिक बोझ बन जाता है. ऐसे में 'रेमेडियल प्रोसेस' या बचाव के रास्ते क्या हैं? लोन लेते समय ही आपको कुछ अतिरिक्त इंतजाम करने चाहिए. आजकल बैंक लोन के साथ 'लोन प्रोटेक्शन इंश्योरेंस' देते हैं. इसमें ऐसे प्रावधान होते हैं कि यदि आपकी नौकरी छूट जाती है, तो बीमा कंपनी आपकी 3 से 6 महीने की ईएमआई का भुगतान करती है. यह समय आपको संभलने और दूसरी नौकरी ढूंढने के लिए पर्याप्त होता है. इसके अलावा, एक 'फाइनेंशियल कुशन' बनाना अनिवार्य है. यानी होम लोन के साथ-साथ एक एसआईपी (SIP) शुरू करें, जिसे जरूरत पड़ने पर किसी भी आपात स्थिति में भुनाया जा सके.
क्या होम लोन आपको अनुशासित बनाता है?
अक्सर लोग इसे नकारात्मक नजरिए से देखते हैं, लेकिन प्रभात का मानना है कि होम लोन व्यक्ति को 'फाइनेंशियल डिसिप्लिन' यानी वित्तीय अनुशासन सिखाता है. जब आपको पता होता है कि हर महीने की एक निश्चित तारीख को एक बड़ी राशि खाते से कटनी है, तो आप अपने अन्य खर्चों को नियंत्रित करना शुरू कर देते हैं. यह लंबे समय में आपको फिजूलखर्ची से बचाता है और आपके लिए एक स्थायी संपत्ति का निर्माण करता है. लेकिन यह अनुशासन तभी तक सुखद है जब तक आपके पास आय का एक स्थिर स्रोत है. यदि आय में उतार-चढ़ाव आता है, तो यही अनुशासन 'तनाव' में बदल जाता है.
यह भी पढ़ें: ईंट-सीमेंट की छुट्टी! ₹1.5 लाख में बनेगा अपना घर, भूकंप भी बेअसर
50 लाख के लोन पर 1 करोड़ का भुगतान
एक चौंकाने वाला तथ्य जो बैंक अक्सर सीधे तौर पर नहीं बताते, वह है 'इंटरेस्ट का चक्रवृद्धि प्रभाव'. यदि आप 20 से 25 साल के लिए होम लोन लेते हैं, तो लोन की अवधि खत्म होने तक आप बैंक को लगभग दोगुनी राशि चुका चुके होते हैं. उदाहरण के तौर पर, यदि आपने 50 लाख रुपये का लोन लिया है, तो ब्याज मिलाकर आप करीब 1 करोड़ रुपये चुकाएंगे.
यदि आप लोन की अवधि घटाकर 15 साल कर देते हैं, तो आप मूलधन का लगभग 80 प्रतिशत अतिरिक्त ब्याज देते हैं. और अगर यह 10 साल हो, तो लगभग 60 प्रतिशत. बैंकर कभी भी आपको यह नहीं कहेगा कि आप डबल पे कर रहे हैं, क्योंकि अगर ग्राहक को यह गणित समझ आ गया, तो वह शायद लोन लेने से हिचकिचाए. इसलिए, समझदारी इसी में है कि जैसे-जैसे आपकी आय बढ़े, आप लोन का 'प्री-पेमेंट' करते रहें ताकि ब्याज का बोझ कम हो सके.
होम लोन लेना न तो पूरी तरह सही है और न ही पूरी तरह गलत. यह इस बात पर निर्भर करता है कि आपने इसकी तैयारी कैसे की है. यदि आप अपनी सैलरी का सही हिस्सा ईएमआई में देते हैं, साथ में इंश्योरेंस का बैकअप रखते हैं और निवेश जारी रखते हैं, तो होम लोन आपके जीवन की सबसे बड़ी उपलब्धि बन सकता है.
स्मिता चंद