मिडिल ईस्ट में में जारी युद्ध के कारण ब्रिटेन की अर्थव्यवस्था पर दबाव बढ़ता जा रहा है, जिसका सीधा असर आम जनता के होम लोन पर पड़ने की संभावना है. बैंक ऑफ इंग्लैंड की रिपोर्ट के अनुसार, वैश्विक अर्थव्यवस्था को लगे इस झटके की वजह से साल 2028 के अंत तक लगभग 13 लाख अतिरिक्त परिवारों को अपनी किस्तों में बढ़ोत्तरी का सामना करना पड़ सकता है.
पहले के अनुमानों के मुताबिक करीब 39 लाख परिवारों पर इसका असर पड़ने की बात कही गई थी, लेकिन मौजूदा संघर्ष के चलते अब कुल 52 लाख परिवारों की बंधक लागत बढ़ने का खतरा मंडरा रहा है.
बीबीसी की रिपोर्ट के मुताबिक एक महीने पहले ईरान पर हुए हमलों के बाद से वैश्विक बाजार में तेल और गैस की कीमतें तेजी से बढ़ी हैं, जिससे सरकार के लिए कर्ज लेना महंगा हो गया है. बैंक की वित्तीय नीति समिति ने चेतावनी दी है कि इस स्थिति से देश में महंगाई बढ़ सकती है और आर्थिक विकास की गति धीमी पड़ सकती है, जिसके कारण ब्रिटेन का आर्थिक भविष्य पहले की तुलना में अधिक चिंताजनक नजर आ रहा है.
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हालांकि, राहत की बात यह है कि बैंक का मानना है कि किस्तों में होने वाली यह वृद्धि 2022 के 'मिनी-बजट' के दौरान आई भारी उछाल जितनी तीव्र नहीं होगी, बल्कि उसकी तुलना में यह बढ़ोत्तरी "मामूली" रहेगी.
ब्रिटेन के लोगों को हो सकती है परेशानी
बैंक का कहना है कि अगर बिजली-गैस के बिल और होम लोन की किश्तें लंबे समय तक इसी तरह महंगी बनी रहीं, तो ब्रिटेन के आम लोगों और वहां की कंपनियों की मुश्किलें और बढ़ जाएंगी. उन्हें अपना घर चलाने और व्यापार करने में काफी आर्थिक तंगी का सामना करना पड़ सकता है. हालांकि, बैंक का कहना है कि बैंकिंग प्रणाली सहित वित्तीय व्यवस्था अब तक "लचीली" रही है और बाजारों ने संघर्ष शुरू होने के बाद से आए "बड़े उतार-चढ़ाव" को संभाल लिया है. समिति का मानना है कि ब्रिटेन की बैंकिंग प्रणाली परिवारों और व्यवसायों की मदद करने में सक्षम होगी, भले ही आर्थिक और वित्तीय स्थिति उम्मीद से कहीं अधिक खराब हो जाए.
संघर्ष शुरू होने से पहले, बैंक ऑफ इंग्लैंड द्वारा तय की गई ब्याज दरें जो घर खरीदारों के लिए उधार दरों का आधार होती हैं, पिछले साल के दौरान गिरी थीं और इस साल उनके और गिरने की उम्मीद थी. हालांकि, बढ़ती ऊर्जा लागत के कारण कीमतों में बढ़ोतरी की आशंका का मतलब है कि ब्याज दरें अपने वर्तमान 3.75% पर ही बनी रह सकती हैं या मुद्रास्फीति को रोकने के लिए बैंक इन्हें फिर से बढ़ा सकता है.
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