हाईराइज इमारतों में लग रही है आग, ये सेफ्टी गाइडलाइंस बचाएंगी आपकी जान

दिल्ली फायर सर्विस और नेशनल डिजास्टर मैनेजमेंट अथॉरिटी के मुताबिक, हाईराइज सोसायटियों में 90% हादसे मानवीय लापरवाही या सुरक्षा उपकरणों के मेंटेनेंस न होने की वजह से गंभीर रूप ले लेते हैं.

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कहीं आपकी हाईराइज सोसाइटी में भी तो नहीं हैं ये 4 कमियां? (Photo-ITG) कहीं आपकी हाईराइज सोसाइटी में भी तो नहीं हैं ये 4 कमियां? (Photo-ITG)

aajtak.in

  • नई दिल्ली ,
  • 05 जून 2026,
  • अपडेटेड 10:15 AM IST

पिछले कुछ दिनों से आ रही आग की दिल दहला देने वाली खबरों ने हर किसी को दहशत में डाल दिया है. दिल्ली के एक होटल में लगी भीषण आग में 21 मासूम जिंदगियों का पल भर में खत्म हो जाना हो, या नोएडा की हाईराइज सोसायटियों से लगातार आने वाली आग की खबरें इन हादसों ने शहरी जीवन की सुरक्षा पर एक बड़ा सवालिया निशान लगा दिया है.

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सबसे ज्यादा परेशान करने वाली बात यह है कि इन हादसों में उन आम लोगों की कोई गलती नहीं होती जो अपने घरों में आराम से रोजमर्रा के काम कर रहे होते हैं. हाईराइज सोसायटियों की बनावट ऐसी होती है कि आग भले ही किसी एक फ्लैट या फ्लोर पर लगे, लेकिन उसका धुआं और लपटें देखते ही देखते कई परिवारों को अपनी चपेट में ले लेती हैं. समझते हैं इन हादसों की मुख्य वजहें क्या हैं और खुद को सुरक्षित रखने के लिए हमें क्या कदम उठाने चाहिए.

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आखिर क्यों बढ़ रहे हैं हाईराइज सोसायटियों में आग के हादसे?

एक्सपर्ट्स के अनुसार ऊंची इमारतों में आग लगने और फैलने के पीछे कुछ मुख्य कारण होते हैं- ओवरलोडिंग और शॉर्ट सर्किट, गर्मियों के मौसम में एसी गीजर और अन्य हैवी अप्लायंसेज का इस्तेमाल अचानक बढ़ जाता है. वायरिंग पुरानी होने या घटिया क्वालिटी के तारों के कारण ओवरहीटिंग होती है, जो शॉर्ट सर्किट का रूप ले लेती है.

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कई सोसायटियों में मेंटेनेंस की कमी के कारण स्प्रिंकलर, फायर अलार्म और स्मोक डिटेक्टर बंद पड़े होते हैं. वहीं हाईराइज बिल्डिंग्स में आग से ज्यादा खतरनाक उसका धुआं होता है, अगर कॉमन डक्ट्स या वेंटिलेशन शाफ्ट साफ न हों, तो धुआं तेजी से फ्लैट्स के अंदर फैल जाता है, जिससे दम घुटने से मौतें होती हैं. कई बार लोग सोसायटियों की सीढ़ियों या इमरजेंसी एग्जिट के पास पुराना सामान, साइकिल या गमले रख देते हैं. हादसे के वक्त यह लापरवाही जानलेवा साबित होती है.

हाईराइज सोसायटियों में सुरक्षा के लिए क्या करें? 

नेशनल बिल्डिंग कोड (NBC) और दिल्ली-एनसीआर फायर सर्विसेज के दिशा-निर्देशों के अनुसार, हर नागरिक और रेजिडेंट वेलफेयर एसोसिएशन (RWA) को इन बातों का सख्ती से पालन करना चाहिए

अपने फ्लैट के किचन और मुख्य हिस्से में कम से कम एक छोटा फायर एक्सटिंग्विशर जरूर रखें और स्मोक अलार्म लगवाएं. हर साल गर्मियों की शुरुआत से पहले अपने घर की वायरिंग और एसी की सर्विसिंग किसी सर्टिफाइड इलेक्ट्रिशियन से जरूर करवाएं. लोकल एक्सटेंशन बोर्ड्स पर ज्यादा लोड न डालें. कई लोग सुरक्षा के नाम पर बाल्कनी को लोहे की ग्रिल से पूरी तरह पैक कर देते हैं. आपातकाल में फायर ब्रिगेड की हाइड्रोलिक लिफ्ट यहीं से लोगों को रेस्क्यू करती है, इसलिए एक हिस्सा हमेशा खुलने योग्य रखें.

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 नेशनल बिल्डिंग कोड के अनुसार, हर हाईराइज सोसाइटी का साल में कम से कम एक बार मान्यता प्राप्त एजेंसी से 'फायर सेफ्टी ऑडिट' होना अनिवार्य है. सोसायटी के निवासियों को पता होना चाहिए कि अलार्म बजने पर क्या करना है. इसके लिए हर 6 महीने में फायर ड्रिल का आयोजन किया जाना चाहिए. फायर एग्जिट और सीढ़ियों पर किसी भी तरह का अतिक्रमण नहीं होना चाहिए. टेरेस के दरवाजे कभी भी लॉक नहीं होने चाहिए, ताकि लोग ऊपर की तरफ भाग सकें.

अगर अचानक आग लग जाए, तो तुरंत क्या करें?

आग लगने की स्थिति में बिजली कभी भी कट सकती है और आप लिफ्ट में फंस सकते हैं. हमेशा सीढ़ियों का इस्तेमाल करें. धुआं हमेशा ऊपर की तरफ उठता है और फर्श के पास हवा साफ होती है. इसलिए घुटनों के बल झुककर या रेंगकर बाहर निकलें. नाक और मुंह को किसी गीले कपड़े या तौलिए से ढक लें ताकि जहरीला धुआं फेफड़ों तक न पहुंचे. शांत रहकर सबसे पहले फायर ब्रिगेड (101 या 112) को सूचित करें और सोसायटी का अलार्म बटन दबाएं.

'सावधानी ही सुरक्षा है' यह बात हाईराइज सोसायटियों पर सबसे ज्यादा लागू होती है. बिल्डर, RWA और निवासियों, तीनों को मिलकर सुरक्षा मानकों के प्रति गंभीर होना होगा, ताकि किसी और बेकसूर की जान न जाए.
 

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